मृत्यु से जुड़े गरुड़ पुराण के कुछ रोचक तथ्य : –

एक अच्छी जिंदगी तथा लम्बी आयु की कामना तो हर किसी व्यक्ति की होती है परन्तु क्या अपने कभी सोचा है की जब आपकी आत्मा आपके शरीर का साथ झोड़ देगी तब उसका क्या होगा और कब उसे दुसरा शरीर पुनः प्राप्त होगा.

वेदो एवं पुराणों में इस संबंध में अनेक बातो का वर्णन आया है. वेदो में बताई गई तत्वज्ञान से संबंधित इन बातो को उपनिषद अथवा वेदांत कहते है.

वेदांत के अनुसार कुछ मोको पर किसी आत्मा को शरीर तत्क्षण ही प्राप्त हो जाते है फिर वह शरीर मनुष्य का या फिर किसी अन्य जीव का. आत्मा दूसरे शरीर को तीन दिन बाद धारण करती है तभी तीजा बनाई जाती है.

कुछ आत्माएं दुसरा शरीर 10 या 13 दिन बाद धारण करती है, अतः इसी कारण दसवीं व तेरहवीं मनाई जाती है. कुछ आत्माओं को सवा माह यानि 34 से 40 दिन नए शरीर धारण करने में लगते है.

यदि कोई आत्मा प्रेत अथवा पितर योनि में बादल जाती है तो फिर उसके मुक्ति के लिए एक साल के बाद उसकी बरसी करी जाती है फिर 3 वर्ष बाद उसे गया छोड़ के आ जाते है.

ताकि यदि आत्मा या पितर को मुक्ति ना मिल रही हो तो वह गया में ही रहे वही उसे मुक्ति की प्राप्ति होगी.

आत्मा का वास्विक स्वरूप :-

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