चाणक्य से महान राजनीतिज्ञ एवम नीतिशास्त्र का लोहा पूरी दुनिया मानती है. उनकी हर बात आज भी उनती ही प्रांसगिक है जिनती की हजारो साल पहले थी. चाणक्य ने अपने जीवन से जुड़े अनुभवो के ज्ञान को जिस पुस्तक में वर्णित किया था उसी के चौदहवे अध्याय में बताई तीन महत्वपूर्ण बाते आज हम आपको बताएंगे.

इन बातो को यदि कोई अपने जीवन में अपनाले तो कोई भी बाधा एवम समस्या व्यक्ति को सफलता को प्राप्त करने से नहीं रोक सकता .

” ये अच्छा होगा यदि आप राजा, अग्नि और स्त्री से उचित दुरी बना कर रखे. और भी ध्यान रखे की आप इनसे कुछ ज्यादा ही दूर न हो जाए अन्यथा आप इनसे मलने वाले लाभ से वंचित रह जाएंगे.”

आइये इस बात को अब थोड़ी गहराई से समझते है और इसे आज के परिपेक्ष्य में स्थापित करने का प्रयास करते है.

पहले तो हम राजा, अग्नि एवम स्त्री का अर्थ समझते है :-

राजा से अभिप्राय ऐसे व्यक्ति से है जिसके पास को बड़ा पद हो, कोई ऐसा व्यक्ति जिसके पास कुछ करने का विशेष अधिकार हो, जैसे की किसी कंपनी का बॉस या मैनेजर, देश का नेता, मंत्री इत्यादि.

तथा अग्नि का आशय ही रिश्क से, और अंत में स्त्री से अभिप्राय है भोग विलास या सुख सुविधाओ से भरी चीज़ों से.

आखिर क्यों बनाये राजा से उचित दुरी ?

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