शकुनी ने युधिष्ठिर को कई बार चौपड़ के खेल में हराया और जिसका परिणाम द्रौपदी का चीर हरण और पांडवों को वनवास फिर अज्ञातवास मिला. लेकिन शकुनी की चाल का जवाब देवराज इंद्र ने ऐसा दिया कि शकुनी चारो खाने चित्त हो गए.

महाभारत युद्ध के दौरान कर्ण को हराना अर्जुन के लिए कठिन था. इंद्र को अंदेशा था कि सूर्य के कवच के कारण कर्ण अर्जुन को पराजित न कर दे.

इसलिए इंद्र ब्रह्मण बनकर इंद्र के पास दान मांगने पहुंच गए. दान में इन्होंने कर्ण से कवच और कुंडल मांग लिया जिससे शकुनी और दुर्योधन का कर्ण को सेनापति बनाने की चाल नाकामयाब हुई.

शकुनी ने जुए में जब पांडवों को हरा दिया और 12 वर्ष का वनवास और एक साल का अज्ञातवास दिया तब इंद्र ने अज्ञातवास के दौरान अर्जुन की पहचान छिपाने के लिए गजब की चाल चली.

इंद्र ने दिव्यास्त्र प्राप्त करने के लिए अर्जुन को स्वर्ग बुलाया यहां अर्जुन को उर्वशी नाम की अप्सरा से नपुंसक होने का शाप मिल गया.

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