कुरुक्षेत्र के मैदान में लड़े गए भीषण युद्ध में अर्जुन ने अपने दिव्य अस्त्र गांडीव के दम पर न केवल कौरवों की विशाल सेना बल्कि उस पक्ष में उपस्थित महान योद्धाओं को भी परास्त कर विजयी हासिल करी.

दिव्य धनुष गांडीव के कारण ही महाभारत युग में सभी लोग अर्जुन को महान धनुधर मानते थे. अर्जुन ने अपने इस प्रिय अस्त्र के लिए यह प्रतिज्ञा ली थी की जो भी व्यक्ति इस गांडीव धनुष को उनसे मांगेगा, वह उसी क्षण उसकी हत्या कर देंगे.

आइये जानते है की आखिर इस धनुष में ऐसी क्या खूबी थी जिसके आवाज मात्र से शत्रु भयभीत हो जाते थे.

1 . प्रभु श्री राम को गांडीव धनुष भगवान विष्णु के अंशावतार परशुराम जी से उस वक्त प्राप्त हुआ था जब देवी सीता के स्वयम्बर में श्री राम ने शिव धनुष तोड़ा तथा तब वहां परशुराम जी पधारे थे.

यह धनुष श्री राम जी से अर्जुन के पास कैसे पहुंचा इससे पहले यह जान लेते है की यह दिव्य धनुष आया कहा से था.

2 . विष्णुधर्मोत्तर पुराण के अनुसार यह कथा मिलती है की इस दिव्य धनुष का निर्माण ब्र्ह्मा जी ने किया था तथा बाद में इस धनुष को उन्होंने संहारकर्ता भगवान शिव को प्रदान किया.

भगवान शिव ने यह दिव्य धनुष पाताल में राक्षसों के बढ़ते पाप को रोकने के लिए तथा उनके संहार के लिए परशुराम को दिया था.

Loading...
loading...
Loading...