कोंन थे दानवीर कर्ण जाने उनकी पूरी कहानी जनम से मृत्यु तक :-

महाभारत का युद्ध ( mahabharat yuddha )अधर्म पर धर्म की विजय को दर्शाता है जिसमे भगवान् श्री कृष्ण का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान था. जब दुर्योधन ने अपनी तरफ सेना मांगी तो श्री कृष्ण को पांडवो की तरफ होना पड़ा . महाभारत में कौरवों और पांडवो की सेना में अनेको योद्धा थे जिन्होंने युद्ध में विशेष भूमिका निभाई और वीरगति को प्राप्त हुए तथा अपना नाम सदा सदा के लिए महाभारत ग्रन्थ में लिख दिया.

इन्ही योद्धाओं में से एक था दानवीर कर्ण जो कौरवों की तरफ से लड़े और वीरगति को प्राप्त हुए लेकिन आज हम आपको कुछ दानवीर कर्ण के बारे में कुछ ऐसी बातें बताएँगे जो सायद ही आपने पहले कभी सुनी होंगी.

आप सब जानते है की कर्ण के पिता सूर्य और माता कुंती थी और पांडवो के ज्येष्ठ भ्राता थे, पर उनका पालन एक रथ चलाने वाले ने किया था, इसलिए वो सूतपुत्र कहलाएं और इसी कारण उन्हें वो समाज में कभी सम्मान नहीं मिला, जिसके वो अधिकारी थे। इस लेख में आज हम महारथी कर्ण से सम्बंधित कुछ रोचक बातें जानेंगे।

कर्ण के वध में भगवान् श्री कृष्ण का बहुत योगदान था जिन्होंने अर्जुन को कर्ण वध का रास्ता सुझाया. भगवान् श्री कृष्ण जानते थे की कर्ण बहुत ही दानवीर योद्धा थे लेकिन जब कर्ण मृत्युशैया पर थे तब कृष्ण उनके पास उनके दानवीर होने की परीक्षा लेने के लिए आए। कर्ण ने कृष्ण को कहा कि उसके पास देने के लिए कुछ भी नहीं है। ऐसे में कृष्ण ने उनसे उनका सोने का दांत मांग लिया।

कर्ण ने अपने समीप पड़े पत्थर को उठाया और उससे अपना दांत तोड़कर कृष्ण को दे दिया। कर्ण ने एक बार फिर अपने दानवीर होने का प्रमाण दिया जिससे कृष्ण काफी प्रभावित हुए। कृष्ण ने कर्ण से कहा कि वह उनसे कोई भी वरदान मांग़ सकते हैं।

कर्ण ने कृष्ण से कहा कि एक निर्धन सूत पुत्र होने की वजह से उनके साथ बहुत छल हुए हैं और पूरी जिंदगी मुझे हालत के साथ समझौता करना पड़ा. इसीलिए अगली बार जब कृष्ण धरती पर आएं तो वह पिछड़े वर्ग के लोगों के जीवन को सुधारने के लिए प्रयत्न करें. इसके साथ कर्ण ने दो और वरदान मांगे.

दूसरे वरदान के रूप में कर्ण ने यह मांगा कि अगले जन्म में कृष्ण उन्हीं के राज्य में जन्म लें और तीसरे वरदान में उन्होंने कृष्ण से कहा कि उनका अंतिम संस्कार ऐसे स्थान पर होना चाहिए जहां कोई पाप ना हो।

Loading...
loading...
Loading...