जो चली थी 18 दिन से भी ज्यादा ”अनोखा रहस्य” !

महाभारत के प्रसिद्ध पात्र एवं गंगा पुत्र भीष्म को परशुराम ने अस्त्रों शास्त्रों की विद्या दी थी. युद्ध में पारंगत भीष्म अजेय थे कोई भी उन्हें युद्ध की चुनौती देने से घबराता था.

एक दिन काशी राज्य के राजा ने अपनी पुत्रियों के विवाह के लिए स्वयम्बर का आयोजन किया. काशी नरेश के तीनो पुत्रिया अत्यधिक सुन्दर एवं गुणवान थी जिनका नाम अम्बा, अम्बिका एवं अम्बाला था. उनके स्वयंबर में बहुत दूर दूर से राजा महाराजा काशी नरेश पधारे.

शांतुन पुत्र भीष्म ने भी उस स्वयम्बर में हिस्सा लिया. क्योकि उस समय तक भीष्म काफी वृद्ध हो चले थे तो उन्हें देख लोगो समझने हसने लगे. वहां उपस्थित सभी लोग यह सोच रहे थे की भीष्म अपने विवाह के लिए यहाँ आये है. परन्तु वास्तविकता में भीष्म को अपने भाई विचित्रवीर्य के विवाह के लिए सुन्दर कन्या के तलाश थी.

स्वयम्बर में पधारे राजाओ के व्यवहारों से भीष्म पितामह को काफी आहत पहुंची तथा गुस्से में उन्होंने तीनो राजकुमारियों का हरण कर लिया. वहां आये राजा महाराजो ने उन्हें रोकने का प्रयास किया परन्तु अजेय भीष्म के आगे कोई भी नहीं टिक सका, सब को युद्ध में मुंह की खानी पड़ी.

तीनो राजकुमारियों को हरण कर भीष्म उन्हें हस्तिनापुर में लाये उन दिनों राजपूतो द्वारा राजकुमारियों के हरण कर शादी करने की प्रथा थी.

जब इन तीनों राजकुमारियों के विवाह की तैयारियाँ हो रही थीं तो राजकुमारी अम्बा इससे प्रसन्न नहीं थी. भीष्म के पूछने पर उसने कहा कि वह राजा शल्य से प्यार करती है. इसलिए विचित्रवीर्य से विवाह नहीं कर सकती.

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