हमारे सनातन धर्म में भक्तो द्वारा अनेक देवी देवताओ को पूजा जाता है, तथा सभी देवी-देवताओ का अपना विशेष स्थान एवं महत्व है. परन्तु सभी देवी देवताओ में से कुछ देवी देवताओ की कृपा प्राप्त करने के लिए भक्त कुछ भी करने को तैयार है.

वे भक्तो की आस्था एवं तपस्या से प्रसन्न होकर उन पर अपनी कृपा कर दे, यही भक्तो की कामना रहती है.

भगवान विष्णु की धर्म पत्नी माता लक्ष्मी का महत्व भी कुछ ऐसा ही है, माता लक्ष्मी का आशीर्वाद एवं उनकी कृपा प्राप्त हो जाए यह हर किसी का स्वप्न रहता है. क्योकि यदि माता लक्ष्मी एक बार अपनी कृपा भक्त पर बरसा देती है तो उस भक्त को कभी कंगाली का सामना नहीं करना पड़ता.

माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शास्त्रों में अनेक बाते कही गई है. माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए उन्हें किस मन्त्र, किस उपाय एवं किस प्रकार के कर्मो से प्रसन्न किया जा सकता है, ये सभी बाते शास्त्रों में वर्णित है.

देवी लक्ष्मी के केवल मन्त्र को ही नहीं बल्कि उनके श्रृंगार के समान सहित उनके धारण किये गए आभूषणो को भी पूजनीय बतलाया गया है. माता लक्ष्मी के द्वारा धारण किये गए सिंदूर को पवित्र एवं पूजनीय माना गया है. अनेक शुभ कार्यो एवं त्योहारों में माता लक्ष्मी के पद चिन्हों की पूजा करी जाती है.

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