रामायण की कथा तो आप बचपन से ही सुनते और पढ़ते आ रहे है परन्तु आज हम आपको रामायण से जुडी एक ऐसी कथा के बारे में बताने जा रहे है जिस से आप शायद ही परिचित हो.

तुलसीदास द्वारा प्रभु श्री राम की कथा का वर्णन करते हुए यह बात कहि गई देवी सीता के स्वयम्बर से पूर्व भगवान श्री राम माता सीता से जनकपुर के पुष्पवाटिका में मिल चुके थे.

जनकपुर वर्तमान में नेपाल में स्थित है, भगवान श्री राम गुरु वशिष्ठ के आज्ञा से पूजा के लिए पुष्प लाने पुष्प वाटिका में पहुचे थे. ठीक उसी समय माता सीता भी पुष्प वाटिका में पहुची. माता सीता भगवान श्री राम को देखकर उन पर मोहित हो गयी भगवान श्री राम भी उन्हें देखकर आकर्षित हो गए.

उसी समय भगवान श्री राम को माता सीता ने अपने पति के रूप में चुन लिया. परन्तु तभी माता सीता को एक चिंता सताने लगी और वह यह थी की उनके विवाह के लिए पिता जनक द्वारा रखा गया शिव धनुष.

शर्त यह थी की जो भी उस शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा उसी को माता सीता वरमाला डालेगी. अगर श्री राम इस शर्त को पूरा नही कर पाए तो राम उन्हें पति के रूप में प्राप्त नही हो पाएंगे.

देवी सीता अपनी इस शंका को दूर करने के लिए अपने आराध्य माता पार्वती के पास गयी.

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