रुद्राभिषेक से तात्पर्य है कि रुद्र मंत्रों से भगवान रुद्र का स्नान, यह स्नान भगवान मृत्युंजय शिव को कराया जाता है. इसे रुद्राभिषेक के रुप में ज्यादातर पहचाना जाता है. अभिषेक के कई प्रकार तथा रुप होते हैं. भगवान रुद्र का अभिषेक यानि कि शिवलिंग पर रुद्रमंत्रों के द्वारा स्नान कराना.

“रुद्राभिषेक” शिव आराधना का सर्वश्रेष्ठ विधान माना गया है. शास्त्रों में भगवान शिव को जलधारा अत्यन्त प्रिय है. भगवान सदाशिव का विभिन्न प्रकार से पूजन करने से विशिष्ठ लाभ की प्राप्ति होती हैं.यजुर्वेद में बताये गये विधि से रुद्राभिषेक करना अत्यंत लाभप्रद माना गया हैं.

लेकिन जो व्यक्ति पूर्ण विधि-विधान से पूजन को करने में असमर्थ हैं अथवा विधान से परिचित नहीं हैं वे लोग केवल भगवान सदाशिव के षडाक्षरी मंत्र- “ॐ नम:शिवाय” का जप करते हुए रुद्राभिषेक तथा शिव-पूजन कर सकते हैं, जो बिलकुल ही आसान है.

यह अभिषेक जल और दूध के अतिरिक्त कई तरल पदार्थों से किया जाता है. आइए जानते हैं किस धारा के अभिषेक से क्या फल मिलता है-

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