आखिर क्यों पति अपनी पत्नियों से डरते है, जाने पुराणों में छिपी इस राज से जुडी कथा !

पुलिस हो या मंत्री, कोई अफसर हो या अधिकारी सभी चाहे बाहर अपना प्रभाव क्यों न दिखाए परन्तु जब आप घर में आते है तो आपकी सारी शक्ति सारा सामर्थ्य छू मंतर अर्थात गायब हो जाता है क्योकि वहां आपकी पत्नी मौजूद होती है तथा उनके आगे आपकी एक भी नहीं चलती.

पति पत्नियों के ऊपर बहुत से जोक भी बनते है परन्तु आखिर इन सब के पीछे क्या वजह होगी आपने कभी सोचा है.

यदि नहीं तो आज हम आपको पौराणिक कहानियो के बारे में बताने जा रहे है जिसमे आपके पति पत्नी से जुड़े हर प्रश्नों के उत्तर छिपे हुए है.

संसार में स्त्री की उत्पत्ति का श्रेय महादेव शिव को जाता है उन्होंने अर्धनारीश्वर का रूप धारण कर सृष्टि में स्त्री को उत्पन किया तथा जब उस स्त्री को उन्होंने पत्नी में रूप में प्राप्त किया तब उन्हें स्त्री शक्ति का बोध हुआ.

स्त्री शक्ति का अंदाजा भगवान शिव को तब हुआ जब उन्होंने एक बार देवी सती को मायके जाने से मना कर दिया. देवी सती इस बात के लेकर बहुत क्रोधित हुई तथा उन्होंने विकराल रूप धारण कर 10 महाविद्याओ को उत्पन्न किया.

10 महाविद्याओ ने भगवान शिव पर आक्रमण कर दिया, अंत में भगवान शिव को उनसे बचते हुए माता सती के चरणों में आना पड़ा. यानी की देवी सती एवम भगवान शिव ने इस बात को तय कर लिया की पति एवम पत्नी में हमेसा पत्नी का वर्चस्व रहेगा.

भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु भी पत्नी के प्रभाव से अछूते नहीं है. वैसे तो अक्सर आपने चित्रो में देखा होगा की माता लक्ष्मी भगवान विष्णु के चरणों को दबाती है परन्तु एक बार दुर्वाशा ऋषि के श्राप के कारण देवी लक्ष्मी वैकुंठ धाम छोड़कर अपने मायके सागर के अंदर चली गयी.

इसके बाद पुरे देवलोक के साथ ही वैकुण्ठलोक में भी अन्धेरा छा गया. वेकुंठ का सारा वैभव गायब हो गया तथा वहाँ अब चमक नही रही. इसके बाद सागर मंथन द्द्वारा लक्ष्मी पुनः प्रकट हुई तथा भगवान विष्णु ने फिर उन्हें नाराज करने का जोखिम नही लिया.

कहते है कि हर स्त्री में देवी लक्ष्मी का वास होता है और हर स्त्री गृहलक्ष्मी होती है. और यह जानती है की इन्ही के कारण घर में सुख शांति हो सकती है अतः यह अपना लोहा मनवाती है.

श‌िव और व‌िष्‍णु जब पत्नी की ताकत को स्वीकार करते हैं तो भला ब्रह्मा जी इससे कैसे बच सकते हैं. त्र‌िदेवों में सृष्ट‌ि कर्ता के पद पर व‌िराजमान ब्रह्मा जी देवी सरस्वती की सत्ता को स्वीकार करते हैं क्योंक‌ि एक बार पुष्कर में ब्रह्मा जी ने यज्ञ का आयोजन क‌िया और देवी सरस्वती के यज्ञ स्‍थल तक पहुंचने में समय लग गया तो गायत्री नाम की कन्या से व‌िवाह कर ल‌िया.

देवी सरस्वती ने जब ब्रह्मा के साथ गायत्री को देखा तो ब्रह्मा जी को शाप दे द‌िया क‌ि आपकी पूजा कहीं नहीं होगी और रुठकर रत्नाग‌िरी पर्वत पर चली गई. यहां देवी सरस्वती की साव‌ित्री रूप में पूजा होती है. यानी पत्‍नी रुठी तो सब रुठे इसल‌िए पत्‍नी को मनाए रखने में ही पत‌ि अपनी भलाई मानते हैं.

भगवान शनि देव के प्रकोप से समस्त दुनिया डरती है परन्तु शनि देव को भी अपनी पत्नी से भय लगता है. इसलिए ज्योतिषशास्त्र में भी शनि देव को प्रसन्न करने के लिए एक उपाय के अनुसार उनकी पत्नी की पूजा बताई गयी है. इनकी पत्नी के नाम का जाप शनि देव के कुदृष्टि से शीघ्र मुक्ति दिलाता है.

इसका एक कारण यह भी है की शनि देव की वर्क दृष्टि उनके पत्नी के श्राप के कारण ही हुई है. अतः शनि देव की पत्नी का जप लाभदायक है अर्थात जब पत्नी क्रोधित होती है तब वह विनाशकारी हो जाती है इसका एक उदाहरण माँ काली भी है.

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *