पुनर्जन्म की सच्ची घटना, real story of reincarnation, reincarnation story, real incident of reincarnation, reincarnation real incident, punarjanam ki sachhi kahani

एक ऐसी सत्य घटना जो आपको विवश करें देगी ”पुनर्जन्म” में विश्वास करने पर !

जिस किसी ने भी इस मृत्युलोक में जन्म लिया है, यह निश्चित है की एक ना एक दिन उसकी मृत्यु होनी है. यह हमारे जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई है तथा प्रकृति का यह कानून है.

मृत्यु के बाद का क्या होता है इस सवाल का जवाब वर्षो से एक पहेली बना हुआ है.

वैज्ञानिक दृष्टि से अगर बात की जाए तो विज्ञान का मानना है की कोई भी मरने के बाद पुनः पैदा नहीं हो सकता .

लेकिन आज हम आपको जिस कहानी के बारे में बताने जा रहे वह विज्ञान की आँखों से आँख मिलाकर खड़ी है, जिसके सामने विज्ञान के सारे तर्क फीके पड़ते दिखाई देते है.

यह कहानी है शांति देवी की, वर्ष 1930 में दिल्ली में शांति का जन्म एक खुशहाल परिवार में बाबू बहादुर माथुर के यहाँ हुआ था. बचपन में उसका विकास अन्य समान्य बच्चों की तरह ही हो रहा था परन्तु जब वह चार साल की हुई उसने अजीब अजीब से बाते करनी शुरू कर दी.

उसने अपने माता पिता को पहचानने से इंकार कर दिया, उसका कहना था की अभी वह जा रह रही है यह उसका घर नहीं है वास्तव में उसका घर वहां से काफी दूर मथुरा में है जहां उसका पूरा परिवार रहता है.

उस मात्र चार साल की लड़की ने कहा की उसका नाम भी शान्ति देवी नहीं है बल्कि उसका वास्तविक नाम लुडगी देवी है.

उसके पति का नाम केदार नाथ चौबे है तथा उसे सब चौबाइन कह कर बुलाते थे. उसकी मौत बच्चे के जन्म के समय हुई थी.

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