यदि अंगद नहीं करता मंदोदरी का अपमान तो राम के साथ युद्ध में विजयी हो जाता रावण, अनसुनी कथा !

माता सीता को रावण की कैद से मुक्त करने के लिए भगवान श्री राम ने वानर सेना के साथ लंका पर चढ़ाई कर दी. लंका पहुंचने से पूर्व उनके सामने एक विशाल सागर बाधा के रूप में सामने आई परन्तु श्री राम ने नल-नील की सहायता से उस विशाल सागर पर एक सेतु का निर्माण करवाया.

रावण की सेना बहुत ही विशाल एवं मायावी थी इसके साथ ही उसके पास एक से बढ़कर एक योद्धा थे. राम की सेना में भी एक से बढ़कर एक योद्धा थे उनमे से ही एक पराक्रमी योद्धा था अंगद.

अंगद वानर राज बाली का पुत्र था तथा वह अपने पिता के समान ही बलशाली एवं बुद्धिमान था.

राम एवं रावण के बीच हुए इस भयंकर युद्ध में रावण के सभी प्रमुख वीर योद्धा मारे गए, अब केवल रावण ही शेष रह गया था. तब रावण ने प्रभु राम से युद्ध में विजयी प्राप्त करने के लिए एक बहुत ही विशाल यज्ञ का आयोजन करवाया.

इस यज्ञ में रावण द्वारा विद्वान महृषियो को आमंत्रित किया गया. यहाँ तक की स्वर्ग से देवी देवताओ को इस यज्ञ को सम्पन्न करने के लिए बुलाया गया. रावण के भय से देवताओ को उस यज्ञ में सम्म्लित होना पड़ा.

देवराज इंद्र रावण की नजर से छुपते हुए प्रभु राम के पास पहुंचे तथा उन्होंने श्री राम को रावण के यज्ञ के विषय में बतलाया. तब भगवान श्री राम ने अंगद को रावण के इस यज्ञ को रोकने के लिए कुछ वानरों के साथ भेजा.

रावण को महृषियो ने यज्ञ से पूर्व यह चेतावनी दी थी की चाहे कुछ भी हो जाए उसे यज्ञ के सम्पन होने के बाद ही उठना है, अगर वह भूल से भी यज्ञ सम्पन होने से पूर्व अथवा यज्ञ के बीच में उठ जाए तो उसे यज्ञ का फल प्राप्त नहीं होगा .

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