कुंडली के इस स्थान पर राहु का होना जातक को बनाता है अरबो का मालिक !dhan yog kundali hindi

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कुंडली से जाने धन प्राप्ति के योग kundali dhan yog :-

पुराणों में राहु ग्रह को छाया या काल कहा गया है जिसका अभिप्राय होता है साक्षात् मृत्यु. राहु तथा केतु ग्रह सदैव व्रकी भ्रमण करते है. राहु में शनि तथा केतु में मंगल के समान गुण पाए जाते है. राहु का कुंडली के केंद्र में स्थित होने पर तथा कभी कभी ऐसी जगह पर स्थान परिवर्तित करता रहता है जहा व्यक्ति पर कालसर्प का योग बनता है.

कुंडली के केंद्र स्थान में, और कही अलग स्थितियो मे राहु विराजमान होने पर जातक के जीवन में काल सर्प योग बन जाता है.

राहु को मोह और माया का करक भी कहा जाता है, इसलिए जब जीवन में राहु की 18  साल की लम्बी महादशा शुरू होती है, तो जातक अपना जीवन किसी न किसी बात के कारन किसी डर में अपना जीवन व्यतीत करता है, और अपने ही बातो में उलझा हुआ रहता है .

ऐसे भयानक ग्रह राहु के बारे में जब हम सुनते है तो बड़ा डर लगता है, लेकिन बहुत सारी परिस्थितियों में, कुंडली के अलग स्थानों में राहु शुभ फल देता है . राहु एक चतुर और एक हठयोगी ग्रह है, वक़्त आने पर अपना पराक्रम भी दिखाते है .

तृतीय स्थान में राहु हो ने पर जातक पराक्रमी होता है, किसी काम के लिए उसकी निष्ठा और तेज सराहनीय होती है . अपने भाइयो में जातक सबसे छोटा या सबसे बड़ा होता है .

राहु यदि नवम ग्रह पर किसी शुभ ग्रह के साथ हो तो बहुत ही अच्छे फल देता है. इस प्रकार के जातक को हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है, शिक्षा के क्षेत्र में भी वे आगे रहते है.

सन्तान प्राप्ति का सिद्ध एवम अचूक उपाय सन्तानहीन स्त्री की भर उठेगी गोद ! santan prapti ke upay

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santan prapti ke upay सन्तान प्राप्ति के उपाय :-

हर परिवार में यदि कोई चार चाँद लगाए है तो वह है बच्चे, इनके बगेर तो घर में रौनक ही नहीं होती. ये न सिर्फ घर में खुसिया लाते है बल्कि पति पत्नी के प्यार को मजबूत करने का जरिया भी होते है.

और सबसे बड़ी बात बच्चे की हस्सी देख सबसे ज्यादा खुस होती है उसकी माँ, क्योकि माँ बनना अपने आप में एक गर्व की बात है बहुत ही सौभाग्यशाली औरतो को ही माँ बनने का सौभाग्य मिलता है.

परन्तु कुछ स्त्रियां इतनी भाग्यशाली नहीं होती है तथा वे सन्तान सुख को प्राप्त करने से वंचित रह जाती है. बच्चे का अभाव उसे और उसके परिवार वालो को जिंदगी भर सताता है तथा वे खुद को अधूरा महसूस करने लगती है.

आज हम सन्तान प्राप्ति से जुड़े ऐसे उपाय बताने जा रहे है जिनसे जल्द ही आपकी सुनी गोद खिल उठेगी व आपको सन्तान सुख की प्राप्ति होगी.

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1 . जो स्त्रियां सन्तान सुख से वंचित है उन्हें हर रोज गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए .

2 .भगवान गणेश की एक छोटी सी मूर्ति लाये जो विश्राम मुद्रा में हो तथा उसे घर के मंदिर में स्थापित कर दे. रोज भगवान गणेश को एक लड्डू चढाये तथा उस प्रसाद के छोटे से भाग को चिड़ियों को दान कर दे.

3 . हर रविवार को भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति के समाने दही अथवा मक्खन का भोग लगाए तथा धुप आदि के पश्चात इसे स्वयं ग्रहण करे. ऐसा रोज करने से सन्तान सुख की प्राप्ति शीघ्र होती है.

रातो-रात बदल सकती है आपकी किस्मत बस करे सिर्फ ये उपाय !

ऐसा अपने अक्सर सूना होगा की किस्मत हर किसी पर मेहरबान नहीं होती, परन्तु अगर यह किसी पर मेहरबान हो जाए तो उसे फिर पीछे मुड़ कर देखने की जरूरत नहीं पड़ती. बहुत से लोगो की यह शिकायत रहती है उनकी किस्मत हमेसा खराब ही रहती है यदि आप भी इसी श्रेणी में हो तो यकीन मानिये आप अकेले नहीं है.

अक्सर लोगो की यह लगता है की उनका भाग्य खराब है या उनकी किस्मत उनका साथ नहीं दे रही.

सफलता प्राप्त करने के लिए मेहनत तथा ईमानदारी का साथ होना बहुत जरूरी है परन्तु पूरी मेहनत और लग्न के बावजूद यदि सफलता प्राप्त नही हो पा रही है तो इसके लिए शास्त्रो में कुछ उपाय वर्णित है जो आपकी इस समस्या का समाधान कर सकती है.

व्यक्ति को बार बार हासिल हो रही असफलता का मुख्य कारण है कुंडली में बैठे उसके ग्रह का उसका साथ न देना. क्योकि व्यक्ति के ग्रह उसके अनुकूल नहीं होते अतः हर कदम पर कुछ न कुछ बढ़ाये उसका पीछा करती ही रहती है. और हर बार असफलता उसके हाथ लगती है.

ऐसे में आपके कुंडली में बैठे अशुभ प्रभाव वाले ग्रहो का शांत करना अत्यंत आवश्यक है ताकि बुरे परिणामो से बचा जा सके. ज्योतिष शास्त्र में अनेक ऐसे उपाय बतलाये गए है जो रातो रात आपकी किस्मत बदल सकते है तथा दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल सकते है.

भगवान शिव का यह अचूक उपाय, घर से दरिद्रता दूर कर बनता है धनवान !

नित्य रूप से किए गए पूज्य कार्यो से भगवान शीघ्र ही प्रसन्न होते हैं. भगवान की प्रसन्नता से सारी इच्छाये पूर्ण हो सकती हैं, दरिद्रता से मुक्ति मिल सकती है. सभी देवी-देवताओं में शिवजी का विशेष स्थान है. शिवपुराण के अनुसार इस संपूर्ण सृष्टि की रचना शिवजी की इच्छा से ही ब्रह्माजी ने की है.

भोलेनाथ की पूजा से सभी देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और कुंडली के ग्रह दोष शांत हो जाते हैं. इसलिए शिवलिंग पर जल दूध इत्यादि चढ़ाने चाहिए. यहां जानिए दरिद्रता दूर करने के लिए उपाय .

शिवलिंग पर ये चीजें चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते है और उनकी कृपा हमेशा अपने भक्तो पर बनी रहती है. इसीलिए हमे ये कार्य नित्य करने चाहिए. इन सभी चीजों को एक साथ मिलाकर या एक-एक चीज से शिवजी को स्नान करवा सकते हैं.

1. जल,
2. दूध,
3. दही,
4. शहद,
5. घी,
6. शकर,
7. ईत्र,
8. चंदन,
9. केशर,
10. भांग (विजया औषधि)

यदि विवाह में आ रही हो रुकावट, तो जरूर अपनाये यह बहुत ही सरल उपाय !

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हर माता पिता का सपना होता है उनकी सन्तान का विवाह बड़े ही धूमा धाम से हो परन्तु कभी कभी कुछ माता पिताओ की सन्तानो की कुंडली में ऐसे भी योग होते है जिस कारण वे शादी से वंचित रह जाता है व उनके माता पिता का सपना टूट जाता है.

सिर्फ जन्म कुंडली में अशुभ योग के कारण ही स्त्री अथवा पुरुष विवाह के सुख से वंचित नहीं रह जाते है बल्कि कई बार इस प्रकार की बाधा बाह्य कारणों से भी उतपन्न होती है.

लागातार उम्र बढ़ने लगती है तथा अनेको प्रयासों के बावजूद भी रिश्ता मिल नहीं पाता. तथा मनचाहे रिश्ते की प्राप्ति से जैसे असम्भव प्रतीत होती है.

इस प्रकार की समस्याओ से मुक्ति के समाधन के लिए आज हम आपको कुछ उपाय बताने जा रहे जो बेहद सरल है तथा यदि इसे पुरे विधि विधान व समर्पित भाव से किया जाए तो वर अथवा कन्या को निश्चित रूप से मनचाहे रिश्ते की प्राप्ति होगी.

1 . शीघ्र विवाह की मनोकामना हेतु व्यक्ति चाहे वह कन्या हो अथवा युवक को सोमवार के दिन शिवालय में जाकर भगवान शिव पर जलाभिषेक करना चाहिए. इसके बाद 1200 ग्राम चने की दाल व सवा लीटर दूध किसी जरूरत मंद व्यक्ति को दान करे. यह क्रिया व्यक्ति को हर सोमवार करनी है जब तक की उसका विवाह सम्पन्न न हो जाए.

इस उपाय अत्यधिक प्रभावशाली है तथा शीघ्र ही कन्या अथवा युवक के लिए अच्छे रिश्ते आने लगते है.

यह है साक्षात् दुर्लभ चमत्कारी वनस्पति, इस उपाय द्वारा शीघ्र हो जाएंगे आप धनवान !

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अद्भुत एवं चमत्कारी वनस्पति ‘‘हत्था जोडी’’ (Hatha jodi) एक वनस्पति है एक विशेष जाति के पौधे की जड़ खोदने पर उसमे मानव भुजा जैसी दो शाखाये दिखाई पड़ती है इसके सिरे पर पंजा जैसा बना होता है,

उंगलियों के रूप में उस पंजे की आकृति ठीक इस तरह होती है जैसे कोई मुट्ठी बांधे हो, जड़ निकलकर उसकी दोनों शाखाओं को मोडकर परस्पर मिला देने से यह हाथो के जैसी दिखने लगती हे यही हत्ता जोड़ी है. इसकी पौधे प्रायः मध्यप्रदेश में होते हैं.

हत्था जोडी (Hatha jodi) बहुत ही शक्तिषाली व प्रभावकारी वस्तु है यह एक जंगली पौधे की जड़ होती है. इसका चमत्कार मुकदमा, शुत्रु संघर्ष, दरिद्रता को दूर करने व दुर्लभ व्याधियों आदि के निवारण में इसकी जैसी चमत्कारी वस्तु आज तक देखने में नही आई इसमे वशीकरण को भी अद्भुत शक्ति है.

इसको पास मे रखने से भूत, प्रेत आदि का भय नहीं रहता है यदि इसे तांत्रिक विधि से सिद्ध कर दिया जाए तो साधक निश्चित पद्यमावति का कृपा पात्र हो जाता है. यह जिसके पास होती है उसे हर कार्य मे सफलता मिलती है धन संपत्ति देने वाली यह बहुत चमत्कारी साबित हुई है.

तंत्र मे इसका महत्वपूर्ण स्थान है. हत्था जोड़ी – Hatha jodi में अद्भुत प्रभाव निहित रहता है, यह साक्षात पद्यमावति का प्रतिरूप है यह जिसके पास भी होगा वह अद्भुत रूप से प्रभावकारी होगा, सम्मोहन, वशीकरण, अनुकूलन, सुरक्षा मे अत्यंत गुणकारी होता है, इससे प्रयोग से भी शीघ्र ही धन लाभ होने लगता है.

दुनिया का सबसे शक्तिशाली मन्त्र, यह गारन्टी है की हर कार्य होगा सफल !

माँ बगलामुखी की साधना करने वाला साधक सर्वशक्ति सम्पन्न हो जाता है. यह मंत्र विधा अपना कार्य करने में सक्षम हैं. मंत्र का सही विधि द्वारा जाप किया जाए तो निश्चित रूप से सफलता प्राप्त होती है.

बगलामुखी मंत्र के जाप से पूर्व बगलामुखी कवच का पाठ अवश्य करना चाहिए. देवी बगलामुखी पूजा अर्चना सर्वशक्ति सम्पन्न बनाने वाली सभी शत्रुओं का शमन करने वाली तथा मुकदमों में विजय दिलाने वाली होती है.

माँ बगलामुखी मंत्र :-

श्री ब्रह्मास्त्र-विद्या बगलामुख्या नारद ऋषये नम: शिरसि.
त्रिष्टुप् छन्दसे नमो मुखे. श्री बगलामुखी दैवतायै नमो ह्रदये.
ह्रीं बीजाय नमो गुह्ये. स्वाहा शक्तये नम: पाद्यो:.
ऊँ नम: सर्वांगं श्री बगलामुखी देवता प्रसाद सिद्धयर्थ न्यासे विनियोग:.

मंत्र

ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां
वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्ववां कीलय
बुद्धि विनाशय ह्रीं ओम् स्वाहा.

राजा दशरथ के मुकुट का एक अनोखा राज, पहले कभी नही सुनी होगी यह कथा आपने !

अयोध्या के राजा दशरथ एक बार भ्रमण करते हुए वन की ओर निकले वहां उनका समाना बाली से हो गया. राजा दशरथ की किसी बात से नाराज हो बाली ने उन्हें युद्ध के लिए चुनोती दी. राजा दशरथ की तीनो रानियों में से कैकयी अश्त्र शस्त्र एवं रथ चालन में पारंगत थी.

अतः अक्सर राजा दशरथ जब कभी कही भ्रमण के लिए जाते तो कैकयी को भी अपने साथ ले जाते थे इसलिए कई बार वह युद्ध में राजा दशरथ के साथ होती थी. जब बाली एवं राजा दशरथ के मध्य भयंकर युद्ध चल रहा था उस समय संयोग वश रानी कैकयी भी उनके साथ थी.

युद्ध में बाली राजा दशरथ पर भारी पड़ने लगा वह इसलिए क्योकि बाली को यह वरदान प्राप्त था की उसकी दृष्टि यदि किसी पर भी पद जाए तो उसकी आधी शक्ति बाली को प्राप्त हो जाती थी. अतः यह तो निश्चित था की उन दोनों के युद्ध में हर राजा दशरथ की ही होगी.

राजा दशरथ के युद्ध हारने पर बाली ने उनके सामने एक शर्त रखी की या तो वे अपनी पत्नी कैकयी को वहां छोड़ जाए या रघुकुल की शान अपना मुकुट यहां पर छोड़ जाए. तब राजा दशरथ को अपना मुकुट वहां छोड़ रानी कैकेयी के साथ वापस अयोध्या लौटना पड़ा.

रानी कैकयी को यह बात बहुत दुखी, आखिर एक स्त्री अपने पति के अपमान को अपने सामने कैसे सह सकती थी. यह बात उन्हें हर पल काटे की तरह चुभने लगी की उनके कारण राजा दशरथ को अपना मुकुट छोड़ना पड़ा.

वह राज मुकुट की वापसी की चिंता में रहतीं थीं. जब श्री रामजी के राजतिलक का समय आया तब दशरथ जी व कैकयी को मुकुट को लेकर चर्चा हुई. यह बात तो केवल यही दोनों जानते थे.

कैकेयी ने रघुकुल की आन को वापस लाने के लिए श्री राम के वनवास का कलंक अपने ऊपर ले लिया और श्री राम को वन भिजवाया. उन्होंने श्री राम से कहा भी था कि बाली से मुकुट
वापस लेकर आना है.

यदि किस्मत नहीं देती साथ तो एक बार जरूर अपनाये ये छोटा सा उपाय, बदल जाएगी आपकी जिंदगी !

यदि भरसक प्रयास करने के बाद भी आप किसी काम में बार असफल होते है या यु कहे की दिन रात मेहनत करने के बावजूद भी वह सफलता हासिल नहीं हो पा रही है जिसके आप हक़दार है. तो इस स्थिति में कहा जाता है की आपकी किस्मत अथवा भाग्य आपका साथ नही दे रही है. 

धन अथवा पैसा कमाने के लिये भाग्य का आपके साथ होना अत्यंत आवश्यक है क्योकि बगेर किस्मत के मनोकामना पूर्ति असम्भव सा ही है. चलिए अब बात करते है की किस्मत है किया तथा कैसे अपने किस्मत का ताला खोला जाए?

कई बार इंसान कर भी कुछ नहीं कर पाता तो कई बार उसे बैठे बैठे ही बहुत कुछ मिल जाता है. इसे ही किस्मत कहते है. कई बार जब किसी व्यक्ति की किस्मत उसका साथ नहीं देती तो वह गम में डूब जाता है तथा तब वह इस समस्या से मुक्ति के लिए भगवान या ज्योतिष की सहायता लेता है. 

जब कभी कभी किस्मत किसी का साथ दे रही हो तो हम उसे अपनी योग्यता मान लेते है कई बार लोग उचित समय का लाभ उठा लेते है तो कई बार व्यक्ति ऊपर से नीचे भी आ जाता.

अर्थात मेरे कहने का अभिप्राय है की व्यक्ति की कभी कभी किस्मत के साथ ही वक्त भी साथ देता है.  तथा इसमें मनुष्य के अच्छे कर्मो का बहुत बड़ा योगदान होता है. 

ज्योतिष शास्त्र एवं तंत्र शास्त्र में कई अनेक ऐसे छोटे उपायो का वर्णन किया गया है जो बेहद प्रभावकारी है. इन छोटे छोटे उपायो को मनुष्य यदि अपने जिंदगी में अपनाये तो वह बहुत ही कम समय में अपने जिंदगी में परिवर्तन देखेगा. उसकी किस्मत उसका साथ देने लगेगी और वह बहुत ही जल्दी सफलता की बुलन्दियो को छू जाएगा. 

भूल से भी न करे इन 4 प्रकार की मूर्तियों के दर्शन, वरना जिंदगी भर दुर्भाग्य नहीं छोड़ेगा पीछा !

वर्तमान समय में हर किसी जिदंगी बहुत व्यस्त हो चुकी है, परन्तु इस भाग-दौड़ भरी जिंदगी में भी हम भगवान को याद करना नहीं भूलता. हर किसी के घर में आपको भगवान का मंदिर अवश्य ही मिल जाएगा अथवा भगवान की मूर्ति अवश्य मिल जायेगी. 

हमसे अधिकतर लोग ऐसे भी है जो सुबह उठते है सर्वप्रथम भगवान की तस्वीर को देख अपने बिस्तर से उठते है. लेकिन क्या आप जानते है की घर में आप भगवान की हर प्रकार की मूर्ति नहीं रख सकते ऐसा इसलिए क्योकि भगवान की कुछ मुर्तिया घर में रखने से सुख शांति नहीं बल्कि दुर्भाग्य आपके पास लेकर आती है.  

अतः यदि आप दुर्भाग्य से बचना चाहते हो तो भगवान की इन 4 मूर्तियों को कभी भी भूल से अपने घर में ना रखे अन्यथा आपके घर में सम्पदा की जगह विपदा प्रवेश कर सकती है.

ये चार प्रकार की मुर्तिया वास्तु शास्त्र के अनुसार विपदा एवम दरिद्रता को निमंत्रण देने वाली बताई गई है. 

चलिए बताते है हम आपको उन मूर्तियों के बारे में जिनके दर्शन आखिर क्यों नहीं करने चाहिए.