जब बच्चे विवाह की अवस्था में पहुच जाते है तो हर अभिभावक को उनकी शादी की चिंता सताने लगती है. अपने पुत्र अथवा पुत्री के विवाह के स्वपन जो उन्होंने उनके बचपन से सँजोये होते है उसे पूरा करने के लिए माँ बाप अपनी साड़ी शक्ति लगा देते है.

उनकी सिर्फ यही एक इच्छा रहती की उनके सन्तान को एक अच्छा जीवनसाथी मिल जाए ताकि वे अपना सारा जीवन ख़ुशी से बिता सके.

परन्तु उनके सन्तान का विवाह किस्से, कैसे और कब होगा ये तो उसकी रेखाओ में ऊपर से ही लिख कर आ जाता है, इसके लिए व्यर्थ की चिंता करने से कुछ नही होगा. व्यक्ति की हाथ की रेखा में यह पहले से ही अंकित होता है की उसका विवाह कब और किस्से होगा.

कौन सी रेखा आपके विवाह पक्ष को प्रभावित करती है तथा आपके विवाह का उचित समय कब है व इसके साथ ही आपका विवाह जीवन कैसा रहेगा यह सब आज हम आपको बताने जा रहे है.

अगर आपके हाथ में एक से अधिक विवाह रेखाएं है तो इन रेखाओ में से जो रेखा सबसे बड़ी होती है उसे ही विवाह रेखा समझना चाहिए. बाकी जो छोटी विवाह रेखा होती है वह आपके प्रेम सम्बन्ध को दिखाती है.

लंबी विवाह रेखा यदि पतली होती जाती है तो इसका तातपर्य होता है की आपके विवाह जीवन में समय के साथ कुछ दरारे आ सकती है.

कनिस्ठिका के नीचे बुध पर्वत होता है जहां से हृदय रेखा निकलकर ब्रहस्पति पर्वत की और जाती है. ऊँगली के नीचे और हृदय रेखा के बीच में जो आड़ी तिरछी रेखाएं होती है वही व्यक्ति के विवाह से सम्बन्धित होती है.

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