कुंडली में धन प्राप्ति योग , kundali dhan prapti yog, dhan prapti ke saral upay hindi me,dhan yog kundali hindi, dhan yoga in kundali, कुंडली में धन योग

कुंडली से जाने धन प्राप्ति के योग kundali dhan yog :-

पुराणों में राहु ग्रह को छाया या काल कहा गया है जिसका अभिप्राय होता है साक्षात् मृत्यु. राहु तथा केतु ग्रह सदैव व्रकी भ्रमण करते है. राहु में शनि तथा केतु में मंगल के समान गुण पाए जाते है. राहु का कुंडली के केंद्र में स्थित होने पर तथा कभी कभी ऐसी जगह पर स्थान परिवर्तित करता रहता है जहा व्यक्ति पर कालसर्प का योग बनता है.

कुंडली के केंद्र स्थान में, और कही अलग स्थितियो मे राहु विराजमान होने पर जातक के जीवन में काल सर्प योग बन जाता है.

राहु को मोह और माया का करक भी कहा जाता है, इसलिए जब जीवन में राहु की 18  साल की लम्बी महादशा शुरू होती है, तो जातक अपना जीवन किसी न किसी बात के कारन किसी डर में अपना जीवन व्यतीत करता है, और अपने ही बातो में उलझा हुआ रहता है .

ऐसे भयानक ग्रह राहु के बारे में जब हम सुनते है तो बड़ा डर लगता है, लेकिन बहुत सारी परिस्थितियों में, कुंडली के अलग स्थानों में राहु शुभ फल देता है . राहु एक चतुर और एक हठयोगी ग्रह है, वक़्त आने पर अपना पराक्रम भी दिखाते है .

तृतीय स्थान में राहु हो ने पर जातक पराक्रमी होता है, किसी काम के लिए उसकी निष्ठा और तेज सराहनीय होती है . अपने भाइयो में जातक सबसे छोटा या सबसे बड़ा होता है .

राहु यदि नवम ग्रह पर किसी शुभ ग्रह के साथ हो तो बहुत ही अच्छे फल देता है. इस प्रकार के जातक को हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है, शिक्षा के क्षेत्र में भी वे आगे रहते है.

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