भगवान शिव की पुत्री का चमत्कारी मंदिर, कोई नहीं गया आज तक यहां से खाली हाथ !

पुराणों में बताई गई एक अन्य कथा के अनुसार ऋषि कश्यप के मस्तिक से देवी मनसा का जन्म हुआ था. परन्तु एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार नागदेवता वासुकि के बहन प्राप्ति की इच्छा के कारण भगवान शिव ने वरदान स्वरूप देवी मनसा को उन्हें सोपा.

भगवान शिव द्वारा प्रदान की गई इस दिव्य कन्या का तेज इतना अधिक था की नाग देवता वासुकि इन्हें सहन नहीं कर पाए तथा इन्हें नागलोक के दिव्य तपस्वी हलाहल को सोंप दिया. उन दिव्य ऋषि के देख रेख में ही देवी मनसा बड़ी हुई.

परन्तु किसी कारण वश एक बार देवी मनसा की रक्षा करनते हुए ऋषि हलाहल ने अपने प्राणों की आहुति दे दी.

नागलोक में पालन पोषण होने के कारण देवी माता मनसा को नाग कन्या भी कहा जाता है. तथा नाग पंचमी का दिन माता मनसा के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है.

लोक कथाओ के अनुसार माता मनसा के सम्बन्ध यह भी कहा जाता है की वे पहले आदिवासियों की देवी थी, तथा इन्हें केवल निम्न वर्ग के लोगो द्वारा ही पूजा जाता था. परन्तु धीरे धीरे माता के चमत्कार के कारण इनकी कृति हर जगह फैलने लगी.

तथा इसके बाद माता मनसा को भगवान शिव के परिवार के सदस्य के रूप में पूजा जाने लगा.

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