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शैलपुत्री

नवरात्र के पहले दिन मां के जिस रूप की उपासना की जाती है, उसे शैलपुत्री के नाम से जाना जाता है। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण मां दुर्गा के इस रूप का नाम ‘शैलपुत्री’ पड़ा था।शास्‍त्रों के अनुसार माता शैलपुत्री का स्वरुप अति दिव्य है। मां के दाहिने हाथ में भगवान शिव द्वारा दिया गया त्रिशूल है जबकि मां के बाएं हाथ में भगवान विष्‍णु द्वारा प्रदत्‍त कमल का फूल सुशोभित है। मां शैलपुत्री बैल पर सवारी करती हैं और इन्‍हें समस्त वन्य जीव-जंतुओं का रक्षक माना जाता है।

नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के शैलपुत्री वाले रूप की आराधना करने से आकस्मिक आपदाओं से मुक्ति मिलती है। इसीलिए दुर्गम स्थानों पर बस्तियां बनाने से पहले मां शैलपुत्री की स्थापना की जाती है माना जाता है कि इनकी स्थापना से वह स्थान सुरक्षित हो जाता है और मां की प्रतिमा स्थापित होने के बाद उस स्थान पर आपदा, रोग, व्‍याधि, संक्रमण का खतरा नहीं होता तथा जीव निश्चिंत होकर उस स्‍थान पर अपना जीवन व्यतीत कर सकते हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार मां शैलपुत्री अपने पूर्वजन्म में दक्ष-प्रजापति की पुत्री सती थीं, जिनका विवाह भगवान शिव से हुआ था।

धार्मिक मान्‍यतानुसार मां दुर्गा के इस शैलपुत्री के रूप की उपासना करते समय निम्‍न मंत्र का उच्‍चारण करने से मां जल्‍दी प्रसन्‍न होती हैं, तथा वांछित फल प्रदान करने में सहायता करती हैं-

वन्देवांछितलाभायचंद्राद्र्धकृतशेखराम। वृषारूढ़ा शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम।।

इस नवरात्री माँ पधार रही है आपके द्वार कीजिये मैया का स्वागत सम्पूर्ण नियम और विधि विधान के साथ |

नवरात्री के नौ दिनों तक देवी माँ के एक स्वरुप की पूजा की जाती है। जो इस प्रकार है :-
1 अकटूबर , 2016 ( शनिवार )      – प्रतिपदा तिथि   –  घटस्थापना  , श्री शैलपुत्री पूजा
2 अकटूबर , 2016  ( रविवार )      – प्रतिपदा तिथि   – चंद्र दर्शन , श्री शैलपुत्री पूजा
3  अक्टूबर , 2016 (  सोमवार )     – द्वितीया तिथि     – श्री ब्रह्मचारिणी पूजा
4 अक्टूबर , 2016 ( मंगलवार )      – तृतीय तिथि       – श्री चंद्रघंटा पूजा
5 अक्टूबर , 2016  ( बुधवार )        – चतुर्थी तिथि       – श्री कुष्मांडा पूजा
6 अक्टूबर , 2016  ( गुरुवार )        – पंचमी तिथि       – श्री स्कन्दमाता पूजा
7 अक्टूबर , 2016  ( शुक्रवार )       – षष्ठी तिथि          – श्री कात्यायनि पूजा
8 अक्टूबर , 2016 ( शनिवार )       – सप्तमी तिथि      – श्री कालरात्रि पूजा
9 अक्टूबर , 2016  ( रविवार )       – अष्टमी तिथि        – श्री महागौरी पूजा , महा अष्टमी पूजा , सरस्वती पूजा
10 अक्टूबर , 2016 ( सोमवार )    – नवमी तिथि         – श्री सिद्धिदात्री पूजा , महा नवमी पूजा , आयुध पूजा , नवमी होम
11 अक्टूबर , 2016 ( मंगलवार )   – दशमी तिथि        –  दुर्गा विसर्जन , विजया दशमी , दशहरा
घट स्थापना
नवरात्री में घट स्थापना का बहुत महत्त्व है। नवरात्री की शुरुआत घट स्थापना से की जाती है।कलश को सुख समृद्धि , ऐश्वर्य देने वाला तथा मंगलकारी माना जाता है। कलश के मुख में भगवान विष्णु गले में रूद्र , मूल में ब्रह्मा तथा मध्य में देवी शक्ति का निवास माना जाता है। नवरात्री के समय ब्रह्माण्ड में उपस्थित शक्तियों का घट में आह्वान करके उसे कार्यरत किया जाता है।
इससे घर की सभी विपदा दायक तरंगें नष्ट हो जाती है तथा घर में सुख शांति तथा समृद्धि बनी रहती है।

गौ का महत्व हिन्दुओ के लिए क्यों है

सनातन धर्म में गाय को बहुत ही पवित्र और पूजा योग्य माना जाता है सिर्फ गाय ही नहीं बल्कि गाय से मनुष्यों को मिलनेवाली हर चीज़ बेहद पवित्र होती है.

कहा जाता है कि गाय माता में तैंतीस कोटी देवी-देवताओं का वास होता है, और फिर कृष्ण भगवान् को तो कितनी प्रिय है गौ माता |
जो इंसान गौ सेवा करता है उसके जीवन से एक-एक करके सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं.

गाय माता जिस स्थान पर खड़े रहकर अपने आपको सुरक्षित महसूस करतीं है उस स्थान से सरे वास्तु दोष दूर हो जाते है |

गाय माता के गोबर से बने उपलो से रोजाना नियमित रूप से दुकानों में,घर में, मंदिर आदि में धुप करने से वातावरण शुद्ध हो जाता है और भगवान् स्वयं प्रसन्न होते है|

काली गाय की पूजा करने से नौ ग्रहों की पीड़ा शांत होती है. जो ध्यानपूर्वक धर्म के साथ गौ सेवा करता है उनको शत्रु दोषों से छुटकारा मिलता है और उस पर आने वाली सभी प्रकार की विपदाओं को गौ माता हर लेती हैं.

गाय को इस धरती पर साक्षात देव स्वरुप माना जाता है. गाय माता के खुर्र में नागदेवता, गोबर में लक्ष्मी जी, मुत्र में गंगाजी का वास होता है. जबकि गौ माता के एक आंख में सूर्य व दूसरी आंख में चंद्र देव का वास होता है.

गाय माता की पूंछ में हनुमानजी का वास होता है. किसी व्यक्ति को बुरी नज़र लग जाए तो गौ माता की पूंछ से झाड़ा लगाने पर नज़र उतर जाती है.

गाय माता की पीठ पर एक उभरा हुआ कुबड़ होता है. उस कुबड़ में सूर्य केतु नाड़ी होती है. रोजाना सुबह आधा घंटा गौ माता की कुबड़ में हाथ फेरने से रोगों का नाश होता है.

गाय को अन्नपूर्णा देवी और कामधेनु माना जाता है. मान्यता है कि गौ माता का दूध अमृत के समान है जो रोगों की क्षमता को कम करता है.

गाय माता से ही मनुष्यों के गौत्र की स्थापना हुई है. गौ माता चौदह रत्नों में एक रत्न है. कहा जाता है कि गाय को चारा खिलाने से उनका भोग लगाने से तैंतीस कोटी देवी देवताओं को भोग लग जाता है.

गाय माता के दूध, घी, मक्खन, दही, गोबर और गोमुत्र से बने पंचगव्य हजारों रोगों की दवा है. इसके सेवन से असाध्य रोग मिट जाते हैं. इन पंचगव्य के बिना पूजा पाठ हवन सफल नहीं होते हैं.

तन-मन-धन से जो मनुष्य गाय की सेवा करता है, उसे गौ लोकधाम में वास मिलता है. गौ माता को घर पर रखकर सेवा करने वाला इंसान सुखी आध्यात्मिक जीवन जीता है और उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती.

अगर आपकी भाग्य रेखा सोई हुई है तो अपनी हथेली में गुड़ को रखकर गाय को चटाये. गाय अगर अपने जीभ से आपकी हथेली पर रखे गुड़ को चाटती है तो इससे आपकी सोई हुई किस्मत खुल सकती है.

गाय को जगत जननी कहा जाता है उसे पृथ्वी का रुप भी माना जाता है इसलिए गाय के चारो चरणों के बीच से निकल कर परिक्रमा करने से इंसान भय मुक्त हो जाता है. गौ माता कि सेवा परिक्रमा करने से सभी तीर्थो के पुण्यों का लाभ मिलता है.

गाय एक चलता फिरता मंदिर है. हम रोजाना तैंतीस कोटि देवी-देवताओं के मंदिर जा कर उनके दर्शन नहीं कर सकते पर गौ माता के दर्शन से सभी देवी-देवताओं के दर्शन हो जाते हैं.

कोई भी शुभ कार्य अटका हुआ हो और बार-बार प्रयत्न करने पर भी सफल नहीं हो रहा हो, तो कहा जाता है कि गाय के कान में अपनी परेशानी कहने से रुका हुआ काम बनने लगता है.

मान्यता है कि जब गाय अपने बछड़े को जन्म देती है तब का पहला दूध बांझ स्त्री को पिलाने से उनका बांझपन मिट जाता है.

गाय माता के दूध से बने एक चम्मच घी को हवन में इस्तेमाल करें से हजारो टन ऑक्सीजन पैदा होती है |

गाय माता हमे अपना सब कुछ देकर भी हमसे किसी चीज़ की उम्मीद नही करती जो व्यक्ति गाय माता की इन सब कथनों को सत्य मानते है उनलोगों के लिए तो गाय माता पूजनीय है और जो नही मानते उनके लिए गाय माता एक जानवर से ज्यादा कुछ नही है | आज हम देखते है की इस संसार में गाय माता की हालात कितनी दैयनीय है इसके पीछे का कारण हम इंसान ही तो है |

इस नवरात्री करें ये उपाय और चमकाए अपना भाग्य |

कहते हैं कि अगर किसी व्यक्ति ने माता को इस समय में प्रसन्न कर लिया तो उसको इससे मनचाहा फल भी मिलता है.

तो आइये आज हम आपको बताते है की नवरात्रो में माँ को कैसे मनाना है

नवरात्रों के उपाय 

1. माता की छोटी-सी चुनरी

अगर आपको बार-बार असफलताओं का सामना करना पड़ रहा है या फिर आप घर से निकलते वक़्त की अनहोनी हो लेकर डरने लगते हैं तो आप इन नवरात्रों में आसान-सा एक उपाय आजमायें कि माता की छोटी-सी लाल चुनरी को पहले पूजा के स्थान पर रखकर पूजा करें और उसके बाद उस चुनरी को अपने पास बैग में रख लें. आपको इन नौ दिनों में माता के आश्चर्यजनक चमत्कार देखने को जरुर मिलेंगे.

2. धन चाहिए तो माता की चौकी लगाइए

अगर आप माता से धन की विनती करना चाहते हैं तो एक आसान-सा उपाय कीजिये कि नवरात्रे के पहले दिन ही मुहूर्त के अनुसार माता की चौकी घर में लगायें. हर रोज आपको यहाँ पूजा करनी हैं और साथ ही साथ रोज आधी रात के समय माता की चौकी पर घी का दीया जलाकर बैठना है. आपको माता की चौकी पर तब तक बैठना है जब तक दीया ना बुझ जाये. लाल किताब के अनुसार ऐसा करने से कई बार अचानक से भी धन प्राप्त हो जाता है.

अकटूबर महीने में चमकने वाली है इन चार राशियों की किस्मत, तारे बदलेंगे अपना रुख |

1 मेष

आपको अब आराम की जरूरत है. अक्टूबर माह सबसे ज्यादा लाभदायक मेष राशि वालों के लिए रहेगा. इस माह तो ऐसा भी हो सकता है कि आप बैठे रहें और लक्ष्मी जी आप तक खुद आती रहें. नौकरी-पेशा वालों को कार्यालय में थोड़ी परेशानी हो सकती हैं लेकिन कुल मिलाकर समय अनुकूल रहेगा. बुध का कन्या राशि में जाना आपके लिए भी शुभ रहेगा. प्रेमिका से आपको प्यार मिलेगा समाज में मान सम्मान बढेगा और घर वालों से आपको पूरा सपोर्ट मिलेगा.

2. वृष

अक्टूबर का माह आपके लिए शुभ होने वाला है. आपका स्वास्थ्य सही रहेगा. दोस्तों का आपको पूरा साथ मिलने वाला है. इस माह जब आप परिवार के साथ समय बिताएंगे तो आपको काफी अच्छा लगेगा. कोई खोया हुआ दोस्त भी मिल सकता है. बस आप रिश्तों की अहमियत को समझ जाओ और बड़ो को मान सम्मान दो.

3. मिथुन

विवादों का अंत होना इस माह शुरू हो जायेगा. इस माह के मध्य तक जरुर आप परेशान रहने वाले हैं किन्तु उसके बाद आप चिंतामुक्त जीवन जी सकते हैं. दुश्मनों पर बस नजर रखें. कौन अपना है और कौन पराया है, इस बात में फर्क करना आपको सीख लेना चाहिए. पत्नी पर विश्वास रखें क्योकि वह आपको बड़ी से बड़ी समस्या से बचा सकती है.और माता पिता की आज्ञा के बिना कोई कार्य शुरू न करें |

यदि घर में होगी ये चीज़े, तो दूर रहेगी दरिद्रता और होगा देवी लक्ष्मी का निवास !

आज के जमाने में हाथों में पैसा होना बहुत जरुरी है. क्या आप सिर्फ कठिन महनत कर के ही पैसे कमा सकते हैं? जी नहीं, कई लोंगो की किसमत हर चीज़ में अच्छी होती है मगर उनके घर में फिर भी पैसे नहीं टिकते.

घर में रूपए-पैसे ना टिकना, एक खराब वास्तु का परिणाम हो सकता है. आइये जानते हैं आप इसे कैसे ठीक कर सकते हैं.

यहां पर जानिये कि आपको अपने घर पर ऐसी कौन सी चीज़ें रखनी चाहिये, जिससे वास्तु का अच्छा परिणाम मिले और आपके घर में पैसे बहना शुरु हो जाएं.

हनुमान जी की मूर्ति रखिये :-

अपने घर के दक्षिण-पश्चिम दिशा में हनुमान की एक पंचरूप मूर्ति रखें. इस मूर्ति की रोजाना पूजा करने से आपके जीवन में किसी भी प्रकार की वित्तीय बाधा नहीं आएगी.

कीजिए बजरंगबली के ये उपाय -होगी अचानक धन की प्राप्ति मिलेगी सभी कर्जो से मुक्ति |

क्या आप किन्ही कारणों से कर्ज में डूबे हुए है या फिर कर्ज से परेशान है तो आप हनुमान भक्ति से कर्ज से छुटकारा पा सकते है कर्जो से मुक्त होना आसान नही है पर कठिन भी नही | हनुमान जी की कृपा हुई तो आप कर्जो से जल्द ही मुक्ति पा सकते है अगर आप पर किसी तरह का कर्ज नहीं है तो यह उपाय आपको अपार धन, सुख, समृद्धि और संपन्नता का शुभ वरदान देंगे।

मंगलवार का दिन हनुमान जी का माना गया है| यह दिन कर्जो से मुक्ति पाने का सबसे अच्छा दिन है | मंगलवार के दिन हनुमान चालीस का पाठ करना चाहिए और पाठ करके हनुमान मंदिर में नारियल चढ़ाना अच्छा माना जाता है

मंगलवार को हनुमान मंदिर के बाहर इन चीजों के प्रयोग व दान का विशेष महत्व है- तांबा, सोना, केसर, कस्तूरी, गेहूं, लाल चंदन, लाल गुलाब, सिन्दूर, शहद, लाल पुष्प, शेर, मृगछाला, मसूर की दाल, लाल कनेर, लाल मिर्च, लाल पत्थर, लाल मूंगा।

आटे से पंचमुखी दीपक बनाये और उस दीपक को बढ़ के पत्ते पर रख कर जलाये | इसी प्रकार पांच पत्तो पर पांच दीपक रखे और इन्हें हनुमान जी के मंदिर में रख दे ऐसा कम से कम ११ मंगलवार तक करे |

घर में सुख शांति और समृद्धि के आसान उपाय

शाश्त्रो के अनुसार घर को मंदिर की तरह पवित्र मन जाता है सुख और शांति की कामनाएं तो हर व्यक्ति करता है मगर घर में किन्ही कारणों की वजह से गृह क्लेश और घर के सदस्यो के मन में द्वेष की भावना उत्पन्न होने लगती है | घर सिर्फ सुन्दर सजाने से और घर की दीवारों पर पेंटिंग्स लगने से बेशकीमती सामान लगाने से नही बनता घर बनता है घर के लोगो से उनकी ख़ुशी से |

आमतौर पर सुख सम्रद्धि और खुशियो से भरा हुआ घर बनाने के लिए शांति तथा पैसा दोनों की ही जरुरत पड़ती है परन्तु किसी के पास पैसा है तो शांति और सुख नहीं है. किसी के पास सुख शांति है तो पैसा नहीं है हर व्यक्ति किसी ना किसी समस्या से परेशान है. इसीलिये हमें कुछ ऐसे उपाय करने चाहिए जिनको प्रयोग में लाने से जीवन में आपको कभी धन और सुख समृद्धि की कमी ना हों और घर में हमेशा शांति का माहौल बना रहें.

*रात को सोने से पहले हमे अपने घर के रसोई घर में एक बाल्टी पानी भरकर रखनी चाहिए जिससे सभी कर्ज़ों से छुटकारा मिलता है और साथ साथ अथरूम में एक बाल्टी पानी भरकर रख देना चाहिए जिससे उन्नति के मार्ग में रुकावट नहीं आती |

*रोजाना प्रातःकाल घर में भजन जरूर लगाए इससे घर में सुख शांति बानी रहती है और मन को भी सुकून मिलता है |

*कभी भी आप अपने घर की देवरो पर घडी लगाए तो ये जरूर याद रखे कि दिशा उत्तर- पूर्व ही होनी चाहिए | उत्तर पूर्व दिशा में घडी लगाने से समय अच्छा बीतता है |

*भोजन कक्ष को हमेशा उत्तर पश्चिम में बनाएं इससे स्वास्थ्य ठीक रहता है तथा किसी प्रकार की बीमारी नहीं होती|

*घर में बैठक का कमरा उत्तर पूर्व या उत्तर पश्चिम दिशा में बनना चाहिए. इससे सुख और समृद्धि में वृद्धि होती है.|

* जब भी आप घर बनवाये तो ये हमेशा याद रखे की टॉयलेट और बाथरूम दक्षिण और पश्चिम दिशा में ही हो ऐसा करने से बहुत लाभ मिलता है |

*पूजा पाठ का स्थान हमेशा ईशानकोण यानि उत्तर और पूर्व का कोना जहां मिलता है में ही बनाना चाहिए. इससे मान-सामान में बढ़ोत्तरी होती है|

*घर को हमेशा साफ रखे घर में कभी जाले न लगने दे इससे घर में अशांति पैदा होती है |

*रोजाना रोटी बनाने के बाद सबसे पहले 1 रोटी गाय के लिए रखें. इससे देवता भी खुश होते हैं और पितरों को भी शांति मिलती है.

*अपनी तिजोरी को हमेशा पूर्व उत्तर व दक्षिण में ही रखें. इससे तिजोरी भरी रहती है तथा पैसे की कमी नहीं होती|

*जब भी आप घर में पोछा लगाते हैं तो हफ्ते में एक बार समुद्री नमक अथवा सेंधा नमक से लगाए. इससे नकारात्मक ऊर्जा हटने लगती है|

*घर को साफ़ रखे और नियमित रूप से रोजाना घर में झाड़ू पोंछा लगाए इससे घर से दरिद्रता दूर होती है |

*रात को खाना खाने के बाद जूठे बर्तन ना रखें. इससे घर सुख सम्रद्धि तथा बरकत नहीं आती है. हमेशा बर्तनों को भोजन कि तुरंत बाद ही साफ करके ही रखें |

*आप अपनी सुबह की पूजा का समय प्रातः 6 से 8 बजे के बीच में ही करे तथा भूमि पर आसन बिछा कर पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके पूजा करे. इससे घर में सुख तथा शांति बनी रहती है|

*घर में तुलसी का पौधा जरूर होना चाहिए तथा जिस गमले में तुलसी का पौधा हो उसमे कोई दूसरा पौधा ना लगाए. तुलसो को हमेशा घर के पूर्व या उत्तर दिशा में ही लगाए.

*रात को सोते समय हमेशा दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर सिर कर के सोएं. पूर्व की ओर सिर करने से विद्या की प्राप्ति होती है तथा दक्षिण की ओर सिर करके सोने से आयु तथा धन में बढ़ोतरी होती है.

*घर में जूते चप्पलो को सम्भालकर रखें. इधर-उधर बिखेर कर या उल्टे सीधे करके नहीं रखने चाहिए. इससे घर में अशांति होने लगती है|

* कभी भी अपने घर के मुख्य दरवाजे के पास कूड़ेदान नहीं रखना चाहिए. ऐसा करने से पडोसी शत्रु बन सकते हैं|

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*सूर्यास्त होते समय यदि कोई पडोसी अथवा कोई अन्य व्यक्ति दूध,दही या प्याज मांगे तो उसे ये सब वस्तुएं ना दें. इससे घर की बरकत समाप्त हो जाती है |

*झाड़ू को घर में कभी भी खड़ा कर के ना रखें. ना ही झाड़ू में पैर लगाए तथा झाड़ू के ऊपर से ना गुजरे. ऐसा करने से घर की बरकत नहीं होती|

*कभी भी बिस्तर पर बैठ कर कभी खाना नहीं खाना चाहिए. बिस्तर पर खाना खाने से धन की हानि होने की सम्भावना रहती है|

* कभी भी खाना कहते वक़्त नमक की जरुरत पड़े तो अपनी हतेली पर नमक नही लेना चाहिए|

*महीने में एक बार पुरे घर में गौ मूत्र या फिर गंगाजल छिड़के. इससे घर सुद्ध होता है साथ ही यदि किसी बुरी शक्ति की वजह से घर में चल रही लड़ाई खत्म हो जाती है.

* सुबह उठकर सबसे पहले अपने घर कि खिड़की और दरवाजे खोलन चाहिए जिससे सूर्य नारायण की रौशनी पुरे घर में और मंदिर पर पड़े ऐसा करने से घर में शुख शांति आती है |

*नहाने के बाद जिस तोलिये का उपयोग किया हो उसका उपयोग दुबारा नहीं करना चाहिए. या फिर पहले दिन उपयोग में लाया गया तौलिया जो धोया ना हो उसका भी उपयोग ना करें. इससे संतान हठी व परिवार से अलग होने लगती है. इसलिए हमेशा तोलिये को धो कर ही प्रयोग में लाये|

* शाम के समय अपने घर के मुख्य द्वार खोल देने चाहिए और जुटे चप्पलो को वहाँ से हटा देना चाहिए कहते है की शाम के समय माँ लक्ष्मी का घर में आगमन होता है |

संतान प्राप्ति के लिए किस भगवान् की पूजा करनी चाहिए

जल्द भरेगी आपकी गोद ….

बच्चे हर परिवार की धड़कन होते है बच्चो के होने से घर में रौनक रहती है पति पत्नी के बीच बच्चे एक जरिया होते है जो उनके प्यार को और भी मजबूत करते है | सबसे बड़ी बात है की माँ बनना एक औरत के लिए बहुत गर्व और ख़ुशी की बात होती है क्योंकि बच्चे के आने से उसे एक नयी दुनिया मिलती है और उसे एक जीने का नया कारण मिलता है परंतु कीच महिलाये ऐसी होती है जिनके जीवन में ये ख़ुशी नही होती और उसे संतान की प्राप्ति नही हो पाती | दरसल एक औरत जो माँ नही बन सकती वो एक अधूरी औरत होती है जो अपने आप को जीवन भर अधूरा ही महसूस करती है |

आपके सब कुछ करने के बाद भी आपको संतान प्राप्ति नही हो रही है परंतु आप निराश न हो बल्कि ये उपाय आजमाए आपको संतान की प्राप्ति जरू होगी |

1. जिन स्त्रियों के कोई संतान नहीं, वे रोज गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ करें ।

2. भगवान् गणेश की छोटी मूर्ति लाएं। उसे मंदिर में स्थापित करें और रोज एक लड्डू चढ़ाकर उस प्रसाद के दाने चिडि़यों को डालें ।

3. प्रत्येक रविवार भगवान को दही अथवा मक्खन का भो लगाएं और फिर धूप आदि के बाद उसे स्वयं ग्रहण करें। ऐसा रोज करने से संतान बाधा दूर होगी ।

4. पति-पत्नि दोनों लड्डू गोपाल की मूर्ति लाएं। उसे पालने में रखे और नए वस्त्रादि धारण कर, धूपादि अर्पित करके एक ऋतु फल और अंजीर तथा दही का भोग लगाएं। उस दिन उपवास करें। इसके पश्चात् प्रतिदिन इस प्रकार का भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करके ही भोजन करें । जन्माष्टमी के दिन से यह उपाय आरंभ करें ।

5. रविपुष्प के दिन एक संतान गोपाल यंत्र पूजा स्थान में लाल कपड़े पर स्थापित करें और गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ करें। संतानकष्ट दूर होगा ।

6. जिन महिलाओं की संतान गर्भ में ही समाप्त हो जाती है वं मंगलवार को इक्कीस पान के पते लाएं। उन पर सिंदूर से राम लिखें फिर उन्हें हनुमान मंदिर ले जाएं और लाल कपड़े मं बांध लें और या तो बहते पानी में प्रवाहित करें अथवा पीपल के वृक्ष में चढा दें। आपका काम पूर्ण होगा ।

7. जिन विवाहित स्त्री-पुरुषो के कोई संतान नहीं है वे किसी शुक्ल पक्ष के गुरुवार को एक पीतल की भगवान् लड्डू गोपाल की मूर्ति लाएं और रोज उस मूर्ति की उसी प्रकार से पालन व सेवा करें जैसे माता-पिता अपनी संतान की सेवा करते हैं। बाल्य अवस्था में रोज उस मूर्ति को थाली के बीचो बीच रखकर स्नान कराएं, वस्त्र पहनाएं और भोग लगाकर फिर आप भोजन करें । जल्दी ही आपकी गोद भरेगी ।

8 हो सके तो आपको प्रतिदिन गऊ माता की सेवा भी करनी चाहिए गऊ माता जिन स्त्रियों की कोख बंदी होती है उनकी कोख खोलती है

9 जिन स्त्रियों के कोई संतान नही है उन्हें अहोई अष्टमी का भी व्रत करना चाहिए | अहोई अष्टमी दिवाली से पहले आती है इस दिन अहोई मैया सभी स्त्रियों को संतान प्राप्ति का वरदान देती है |इस साल अहोई अष्टमी 22 अक्टूबर की है

एक मुस्लिम परिवार ने अपने बच्चे को क्यों दिया गणेश नाम

हिन्दू मुस्लिम जाने कब से धर्म के नाम पर लड़ते आ रहे है.

हिन्दू मुस्लिम के बीच लड़ाई इतनी गहरी है कि भारत में आज भी ये दंगे फसाद देखने को मिलते है

लेकिन कभी कभी कुछ बाते ऐसी हो जाती है कि लगता है – अब हिन्दू मुस्लिम में धर्म के के लोगो में बदलाव देखने को भी खूब मिलते है |

तो आइये जानते है हिन्दू मुस्लिम के बीच ऐसा क्या हुआ –

मुंबई में रहने वाला इलियाज अपनी पत्नी नूरजहां को प्रसव हेतु अस्पताल लेकर जा रहा था, लेकिन रास्ते में नूरजहाँ की तबियत ख़राब हो गई .

टेक्सी में नूरजहाँ की हालत ख़राब होते देख, टेक्सी वाले ने टेक्सी रास्ते में रोक कर नूरजहाँ और उसके पति को टेक्सी से उतार दिया. इस डर से कि कही प्रसव उसके टेक्सी में ही ना हो जाए.