कच्चे धागे से बांधे शनिदेव से पक्का रिश्ता कटेगा शनि का प्रकोप

शनि के लिए ये एक ऐसी मुश्किल की घड़ी थी, जिसका समाधान करना उनके जीवन का सबसे बड़ा मकसद बन गया. कहते हैं जब शनिदेव ने हिमाचल प्रदे के इसी महाकाल मंदिर में आकर शिव की आराधना की और घनघोर तप किया. शनि की पूजा और आंसुओं ने महाकाल को पिघला दिया.

महाकाल के आशीर्वाद ने शनिदेव को इतना शक्तिशाली बना दिया कि इंसान क्या देवता भी उनसे खौंफ खाते हैं. इतना ही नहीं महाकाल ने सूर्य देव को भी ये विश्वास दिला दिया कि शनि उन्हीं के पुत्र हैं. उसी दिन से इस धाम में शिव और शनिदेव की एक साथ पूजा की जाती है. पहले शनिदेव भगवान शिव के साथ ही विराजते थे, लेकिन बाद में उनके मंदिर को अलग बनवा दिया गया. यहां भक्त पहले महाकाल के दशर्न कर उनसे आशीर्वाद लेते हैं फिर शनिदेव की आराधना की जाती है. कहते हैं यहां आने के बाद कोई खाली हाथ नहीं जाता है और अगर ग्रहण और किसी विशेष दिन पूजा कर ली जाए तो भक्तों की हर इच्छा को मिल जाता है महाकाल संग शनिदेव का भी आशीर्वाद

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