इन दिनों श्राद्ध पक्ष चल रहा है। श्राद्ध पक्ष में पितरों यानी पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान आदि किए जाते हैं। हमारे धर्म शास्त्रों में श्राद्ध पक्ष के लिए कई नियम भी बताए गए हैं। इन नियमों में कुछ कामों के लिए मनाही है, वहीं कुछ बातें जरूरी बताई गई हैं। ऐसा माना जाता है कि इन नियमों का पालन करने से पितर हमसे संतुष्ट होते हैं और शुभ फल प्रदान करते हैं। इसलिए पितरों को प्रसन्न रखने के लिए इन नियमों का पालन जरूर करना चाहिए। ये नियम इस प्रकार हैं-

1. श्राद्ध पक्ष में बॉडी मसाज या तेल की मालिश नहीं करवानी चाहिए। इन दिनों पान भी नहीं खाना चाहिए। श्राद्ध के दौरान क्षौर कर्म यानी बाल कटवाना, शेविंग करवाना या नाखून काटना आदि की भी मनाही है।

2. जो पुरुष श्राद्ध का दान देकर अथवा श्राद्ध में भोजन करके स्त्री के साथ समागम करता है, उसके पितर उस दिन से लेकर एक महीने तक उसी के वीर्य में निवास करते हैं। इसलिए भूलकर भी उस दिन स्त्री समागम नहीं करना चाहिए।
3.श्राद्ध पक्ष के दौरान किसी और का खाना नहीं खाना चाहिए। इन दिनों खाने में मसूर की दाल, चना, लहसुन, प्याज, काला जीरा, काले उड़द, काला नमक, राई, सरसों आदि वर्जित मानी गई है। अत: खाने में इनका प्रयोग ना करें तो बेहतर रहता है।
आखिरी श्राद्ध ३० सितंबर को होगा

4. श्राद्ध के दिनों में तांबे के बर्तनों का अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए। श्राद्ध कर्म या पिण्डदान आदि कार्य करते समय कमल, मालती, जूही, चम्पा के पुष्प अर्पित करने से पितर प्रसन्न होते हैं।

5. श्राद्ध करते समय पितरों की तृप्ति के लिए नीचे लिखे मंत्र का जाप करते रहें। इस मंत्र का जाप करने से पितरों सहित सभी देवी-देवता भी आपसे प्रसन्न होंगे।
मंत्र- ऊं पितृभ्य स्वधायीभ्य स्वधा नम: पितामहेयभ्य: स्वधायीभ्य स्वधा नम: प्रपितामहेयभ्य स्वधायीभ्य स्वधा नम:, अक्षंतपितरोमी पृपंतपितर: पितर: शुनदद्धवम्

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