अधिकांश लोग अपार धन पाने की इच्छा रखते है परंतु काफी मेहनत के बाद भी उनका की परिणाम नही निकलता क्योंकि धन की इच्छा महालक्ष्मी की पूजा और कृपा के बिना नही हो सकती.

महालक्ष्मी के आठ रूप होते है सभी रूपो का अलग अलग महत्व बताया गया है.माँ लक्ष्मी जैसी जिसके मन में कामनाये होती है सभी को पूर्ण करती है. माँ लक्ष्मी की पूजा करने से पहले विष्णु भगवान् की भी पूजा करनी चाहिए शास्त्रो के अनुसार माँ लक्ष्मी का वास वही होता है जहां उनकीं पूजा से पहले विष्णु भगवान् की पूजा की जाती है क्योंकि लक्ष्मि जी विष्णु भगवान् की अर्धांग्नी है.

माँ लक्ष्मी के आठ रूप.
१. धन लक्ष्मी – माँ लक्ष्मी के इस रूप की अर्चना करने से अपार धन की प्राप्ति होती है.
२. यश लक्ष्मी – माँ लक्ष्मी की इस रूप की अर्चना करने से यश की प्राप्ति होती है .
३. आयु लक्ष्मी – माँ लक्ष्मी के इस रूप की साधना करने से दीर्घायु और स्वास्थ का वरदान मिलता है.
४. वाहन लक्ष्मी – माँ लक्ष्मी के इस रूप की उपासना करने से वाहन सुख प्राप्त होता है.
५. स्थिर लक्ष्मी – इस रूप में माँ लक्ष्मी की पूजा करने से धन धान्य सम्पदा हमेशा बनी रहती है.
६. गृह लक्ष्मी – इस रूप को पूजने से सर्वगुण संपन्न पत्नी की प्राप्ति होती है.
७. संतान लक्ष्मी – माँ लक्ष्मी के इस रूप की पूजा करने से संतान की प्राप्ति होती है.
८. भवन लक्ष्मी – यदि आपके पास अपना खुद का घर नहीं है तो आप माँ लक्ष्मि के इस रूप की पूजा करे. .

माँ लक्ष्मी की पूजा पूरे विधि विधान के साथ करने से आपको उसका फल अवश्य प्राप्त होगा.

शास्त्रो में कहा तो ये भी जाता है की किसी समय माँ लक्ष्मी मैले वस्त्र पहन कर अपना रूप बदलकर सभी के घर घर गयी थी परंतु सभी ने उन्हें भिछुक समझकर उन्हें घर से निकल दिया था परंतु अंत में वे एक बनिए के घर गयी और उस बनिए ने उन्हें यानि की माँ लक्ष्मी को पहचान लिया और उस बनिए ने माँ लक्ष्मी से अपने घर के अंदर आने को कहा और उनसे बोला की आप यहाँ पर रहो और में गंगा स्नान करने जा रहा हूँ परंतु जब तक मैं न आउ तब तक आप मेरे घर की रक्षा करना और तभी से कहा जाता हे की माँ लक्ष्मी का निवास अधिकतर बनियो के घर में जरूर मिलता हे…..

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