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गौ का महत्व हिन्दुओ के लिए क्यों है

सनातन धर्म में गाय को बहुत ही पवित्र और पूजा योग्य माना जाता है सिर्फ गाय ही नहीं बल्कि गाय से मनुष्यों को मिलनेवाली हर चीज़ बेहद पवित्र होती है.

कहा जाता है कि गाय माता में तैंतीस कोटी देवी-देवताओं का वास होता है, और फिर कृष्ण भगवान् को तो कितनी प्रिय है गौ माता |
जो इंसान गौ सेवा करता है उसके जीवन से एक-एक करके सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं.

गाय माता जिस स्थान पर खड़े रहकर अपने आपको सुरक्षित महसूस करतीं है उस स्थान से सरे वास्तु दोष दूर हो जाते है |

गाय माता के गोबर से बने उपलो से रोजाना नियमित रूप से दुकानों में,घर में, मंदिर आदि में धुप करने से वातावरण शुद्ध हो जाता है और भगवान् स्वयं प्रसन्न होते है|

काली गाय की पूजा करने से नौ ग्रहों की पीड़ा शांत होती है. जो ध्यानपूर्वक धर्म के साथ गौ सेवा करता है उनको शत्रु दोषों से छुटकारा मिलता है और उस पर आने वाली सभी प्रकार की विपदाओं को गौ माता हर लेती हैं.

गाय को इस धरती पर साक्षात देव स्वरुप माना जाता है. गाय माता के खुर्र में नागदेवता, गोबर में लक्ष्मी जी, मुत्र में गंगाजी का वास होता है. जबकि गौ माता के एक आंख में सूर्य व दूसरी आंख में चंद्र देव का वास होता है.

गाय माता की पूंछ में हनुमानजी का वास होता है. किसी व्यक्ति को बुरी नज़र लग जाए तो गौ माता की पूंछ से झाड़ा लगाने पर नज़र उतर जाती है.

गाय माता की पीठ पर एक उभरा हुआ कुबड़ होता है. उस कुबड़ में सूर्य केतु नाड़ी होती है. रोजाना सुबह आधा घंटा गौ माता की कुबड़ में हाथ फेरने से रोगों का नाश होता है.

गाय को अन्नपूर्णा देवी और कामधेनु माना जाता है. मान्यता है कि गौ माता का दूध अमृत के समान है जो रोगों की क्षमता को कम करता है.

गाय माता से ही मनुष्यों के गौत्र की स्थापना हुई है. गौ माता चौदह रत्नों में एक रत्न है. कहा जाता है कि गाय को चारा खिलाने से उनका भोग लगाने से तैंतीस कोटी देवी देवताओं को भोग लग जाता है.

गाय माता के दूध, घी, मक्खन, दही, गोबर और गोमुत्र से बने पंचगव्य हजारों रोगों की दवा है. इसके सेवन से असाध्य रोग मिट जाते हैं. इन पंचगव्य के बिना पूजा पाठ हवन सफल नहीं होते हैं.

तन-मन-धन से जो मनुष्य गाय की सेवा करता है, उसे गौ लोकधाम में वास मिलता है. गौ माता को घर पर रखकर सेवा करने वाला इंसान सुखी आध्यात्मिक जीवन जीता है और उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती.

अगर आपकी भाग्य रेखा सोई हुई है तो अपनी हथेली में गुड़ को रखकर गाय को चटाये. गाय अगर अपने जीभ से आपकी हथेली पर रखे गुड़ को चाटती है तो इससे आपकी सोई हुई किस्मत खुल सकती है.

गाय को जगत जननी कहा जाता है उसे पृथ्वी का रुप भी माना जाता है इसलिए गाय के चारो चरणों के बीच से निकल कर परिक्रमा करने से इंसान भय मुक्त हो जाता है. गौ माता कि सेवा परिक्रमा करने से सभी तीर्थो के पुण्यों का लाभ मिलता है.

गाय एक चलता फिरता मंदिर है. हम रोजाना तैंतीस कोटि देवी-देवताओं के मंदिर जा कर उनके दर्शन नहीं कर सकते पर गौ माता के दर्शन से सभी देवी-देवताओं के दर्शन हो जाते हैं.

कोई भी शुभ कार्य अटका हुआ हो और बार-बार प्रयत्न करने पर भी सफल नहीं हो रहा हो, तो कहा जाता है कि गाय के कान में अपनी परेशानी कहने से रुका हुआ काम बनने लगता है.

मान्यता है कि जब गाय अपने बछड़े को जन्म देती है तब का पहला दूध बांझ स्त्री को पिलाने से उनका बांझपन मिट जाता है.

गाय माता के दूध से बने एक चम्मच घी को हवन में इस्तेमाल करें से हजारो टन ऑक्सीजन पैदा होती है |

गाय माता हमे अपना सब कुछ देकर भी हमसे किसी चीज़ की उम्मीद नही करती जो व्यक्ति गाय माता की इन सब कथनों को सत्य मानते है उनलोगों के लिए तो गाय माता पूजनीय है और जो नही मानते उनके लिए गाय माता एक जानवर से ज्यादा कुछ नही है | आज हम देखते है की इस संसार में गाय माता की हालात कितनी दैयनीय है इसके पीछे का कारण हम इंसान ही तो है |

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