नवरात्र के पहले द‌िन कलश स्थापना क‌िया जाता है। कलश पूजा के दौरान कलश के नीचे जयन्ती बोया जाता है। सामान्यतया दो से तीन दिन में जौ से अंकुरित होकर जयंती निकल आती है। जयंती देर से निकलने का मतलब यह है क‌ि देवी संकेत दे रही है क‌ि आने वाले साल में काफी परिश्रम करना पड़ेगा। मेहनत का फल विलम्ब से प्राप्त होगा।

जयंती का रंग अगर नीचे पीला और ऊपर की ओर हरा हो तो साल की पहली छमाही आपके ल‌िए ठीक नहीं रहेगी ले‌क‌िन बाद में सब अच्छा होने लगेगा।

जयंती अगर नीचे से हरा और ऊपर जाकर पीला हो तब साल का पहला भाग खुशहाली वाला रहेगा लेक‌िन साल दूसरे भाग में उलझन और परेशान‌ियों का सामना करना होगा।
आपके घर में जयंती श्वेत या हरा रंग का उगे और पुष्ट हो तब यह आपके ल‌िए बहुत ही शुभ संकेत है। आपको यह मानना चाह‌िए ‌क‌ि आपकी पूजा सफल हुई है आपके ल‌िए आने वाला पूरा साल खुशहाल और सुख समृद्ध‌ि से भरपूर होगा।

जयन्ती यदि अशुभ फल का संकेत देती है तो मां से संकट दूर करने की प्रार्थना करें और दशवीं तिथि को नवग्रह के नाम से 108 बार हवन करें फिर मां के बीज मंत्र ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमः स्वाहा से 1008 बार हवन करें। हवन के पश्चात मां की आरती करें और हवन से प्राप्त भभूत से नित्य तिलक करें।
रोग की भविष्यवाणी होने पर प्रतिदिन ‘रोगान शेषान पहंसि तुष्‍टा रूष्‍टा तु कामान्‍सकलान भीष्‍टान्॥ त्‍वामाश्रितानां न विपन्‍नराणां त्‍वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयांति॥ इस मंत्र का जप करें। अगर इन सब के लिए समय नहीं हो तो नित्य कवच, कीलक, अर्गला और सिद्घ कुंजिका स्तोत्र का पाठ करने से भी नवग्रह अनुकूल रहते हैं और व्यक्ति कष्ट से पार होने में सफल होता है।

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