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महाभारत की एक अनसुनी कहानी- कैसे हुई थी गांधारी, कुंती और धृतराष्ट्र की मृत्यु, एक रहस्य

महाभारत एक ऐसा पौराणिक ग्रंथ है जिससे जुड़ी नाजाने कितनी ही कहानियां हम समय समय पर सुनते रहते हैं। इस ग्रंथ में कई पात्रों का समावेश है, जिसकी वजह से यह एक विस्तृत और विशाल गाथा में तब्दील हो गया है।

महाभारत और रामायण
जब हमें लगता है कि महाभारत की अधिकांश कहानियों से अब हम वाकिफ हैं तो एक नई कहानी हमारे सामने आ जाती है। सही बताएं तो वे लोग जो इस बात पर गुमान करते हैं कि वे महाभारत और रामायण की लगभग सभी घटनाओं या तथ्यों से अवगत हैं उन्हें भी कुछ ना कुछ ऐसा जरूर होगा जो नहीं पता होगा।

कहानियां
महाभारत की बात करें तो आज भी ऐसी बहुत सी कहानियां हैं जो हमारे रोंगटे खड़े कर देती हैं, जिन्हें सुनकर हम हैरानी में पड़ जाते हैं कि क्या वाकई ऐसा हो सकता है।

कौरवों का संहार
इन्हीं कहानियों में से एक है गांधारी, धृतराष्ट्र और कुंती की मृत्यु से जुड़ी घटना। कुरुक्षेत्र के युद्ध कौरवों का संहार हो गया था और पांडवों की मृत्यु उनके महाप्रस्थान के दौरान हुई थी। भीष्म पितामाह ने मृत्यु शैया पर अपना दम तोड़ा था, लेकिन कुंती, धृतराष्ट्र और गांधारी की मृत्यु कैसे हुई इस बात पर शायद किसी का ध्यान नहीं गया।

युयुत्सु
कुरुक्षेत्र के युद्ध में धृतराष्ट्र ने अपने 99 बेटों को खो दिया था। युयुत्सु ने पांडवों की ओर से युद्ध लड़ा था इसलिए मात्र एक वही एकमात्र कौरव थ जो जीवित रह गया था।

साक्ष्य
पांडवों ने भी अपने पुत्र, अभिमन्यु और उसकी अजन्मीं संतान को खोया था। महाभारत का युद्ध, इतिहास के बड़े औइर भयंकर युद्धों में से एक था, जिसका साक्ष्य कुरुक्षेत्र की वो मिट्टी जिसका रंग आज भी लाल है।

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