हमारे हिन्दू शास्त्रों में मनुष्य की हर समस्या का इलाज है। चाहे वह धन से सम्बंधित हो या सेहत से सम्बंधित , हर परेशानी को हल करने का कोई ना कोई उपाय शास्त्रों में दर्ज है। यदि इसे नियमानुसार किया जाए, तो इनका लाभ अवश्य मिलता है |

इंसान धन को अपनी जिंदगी में काफी अहमियत देता है, लेकिन जब बात सेहत पर आती है तो उसे अपनी सेहत धन से भी अधिक महत्वपूर्ण लगने लगती है। व्यक्ति का स्वास्थ्य कुशल रहे, इसके लिए शास्त्रों में कई उपाय दर्ज हैं। पारंपरिक उपाय या फिर मंत्रों की मदद से व्यक्ति खुद को सेहतमंद बना सकता है।

लेकिन आज हम यहां एक ऐसा मंत्र प्रस्तुत करने जा रहे हैं, जो एक गर्भवती स्त्री के लिए फायदेमंद है। यह मंत्र उस गर्भवती स्त्री के साथ-साथ उसकी होने वाली संतान की भी रक्षा करता है।

अगर कोई स्त्री गर्भवती है, वह गर्भधारण के पहले या मध्यम चरण में भी हो, तब भी यह मंत्र उसकी रक्षा करने के लिए सक्षम है। इस मंत्र के जाप से होने वाली संतान स्वस्थ रूप से संसार में आती है।
इस मंत्र के लिए गर्भवती महिला को शिव जी की संतान भगवान गणेश की मूर्ति लानी है। इसी मूर्ति या तस्वीर के सामने बैठकर मंत्र जाप करना है।

मंत्र जाप करने के बाद गणेश जी को कम से कम दो मोदक का भोग भी लगाना है। गर्भवती महिला इस बात का ध्यान रखे कि यह मोदक उसी के हाथों से बने हों और इसे ग्रहण भी केवल और केवल उसी को करना है। मोदक का यह प्रसाद अन्य किसी भी परिवार के सदस्य को नहीं देना है।

मंत्र कुछ इस प्रकार है – रक्ष रक्ष गणाध्यक्ष: रक्ष त्रैलोक्य नायक:, भक्त नाभयं कर्ता त्राताभव भवार्णवात्

इस मंत्र का प्रतिदिन कम से कम एक माला, यानी कि 108 बार जाप करना है। यदि संभव हो तो इससे अधिक भी कर सकते हैं। जब प्रसव का समय पास आने लगे, तब माला की संख्या बढ़ाई जा सकती है, इससे प्रसव में आसानी होती है।
यदि कोई महिला गर्भाधान से लेकर पूरे नौ महीने तक इस मंत्र का जाप कर ले, तो उसकी होने वाली संतान हृष्ट-पुष्ट भी होती है और वह खुद भी स्वस्थ रहती है।

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