यदि सुबह उठ कर देखो आप इन चीज़ों को, तो यह धन प्राप्ति के संकेत !

किसी भी व्यक्ति की पैसों से जुड़ी इच्छाएं कब पूरी होंगी, महालक्ष्मी की कृपा कब मिलेगी, यह जानने के लिए ज्योतिष में कुछ संकेत बताए गए हैं. मान्यता है कि जब भी ये संकेत मिलते हैं तो समझ लेना चाहिए कि व्यक्ति को लक्ष्मी की कृपा मिलने वाली है और पैसों की परेशानियां दूर होने वाली हैं. जानिए लक्ष्मी कृपा से जुड़े 15 शुभ संकेत…

1. सुबह उठते ही शंख, मंदिर की घंटियों की आवाज सुनाई दे तो यह बहुत शुभ होता है.
2. यदि जागते ही हमारी पहली नजर दही या दूध से भरे बर्तन पर पड़े तो इसे भी शुभ संकेत समझा जाता है.
3. यदि किसी व्यक्ति को सुबह-सुबह गन्ना दिखाई दे तो निकट भविष्य में उसे धन संबंधी कार्यों में सफलता मिल सकती है.
4. यदि किसी व्यक्ति के सपनों में बार-बार पानी, हरियाली, लक्ष्मीजी का वाहन उल्लू दिखाई देने लगे तो समझ लेना चाहिए कि निकट भविष्य में लक्ष्मी कृपा से धन संबंधी परेशानियां दूर हो सकती हैं.
5. यदि हम किसी आवश्यक काम के लिए जा रहे हैं और रास्ते में लाल साड़ी में पूरे सोलह श्रृंगार किए हुए कोई स्त्री दिख जाए तो यह भी महालक्ष्मी की कृपा का इशारा ही है. ऐसा होने पर उस दिन कार्यों में सफलता मिलने की संभावनाएं काफी अधिक रहती है.
6. नारियल, शंख, मोर, हंस, फूल आदि चीजें सुबह-सुबह दिखती हैं तो बहुत शुभ होता है.
7. सप्ताह के सातों दिन अलग-अलग देवी-देवताओं की पूजा के लिए तय किए गए हैं. शास्त्रों के अनुसार शुक्रवार को महालक्ष्मी की पूजा करने पर विशेष कृपा मिलती है. इस दिन यदि कोई कन्या आपको सिक्का दे तो यह शुभ संकेत है. ऐसा होने पर समझ लेना चाहिए निकट भविष्य में धन लाभ होने वाला है.
8. यदि घर से निकलते ही गाय दिखाई दे तो यह शुभ संकेत है. गाय सफेद हो तो बहुत शुभ होता है.
9. यदि किसी व्यक्ति के सपने में सफेद सांप, सोने के जैसा सांप दिखाई देने लगे तो यह भी महालक्ष्मी की कृपा का इशारा है. ऐसा होने पर निकट भविष्य में कोई विशेष उपलब्धि हासिल हो सकती है.
10. यदि कहीं आते-जाते समय कोई सफेद सांप दिखे तो यह शुभ संकेत है.

करोड़पति बना देगा चावल का सिर्फ यह एक उपाय, बस शर्त ये हे की इसे करने से पहले इसके बारे में न बताये किसी को !

पैसा या धन का मोह केवल वर्तमान में ही नहीं बल्कि प्राचीन काल में भी था. तब चलती थीं सोने-चांदी की अशर्फियां. लेन-देन में उपयोग होते थे सोने-चांदी के जेवर भी. उस समय भी अमीर-गरीब होते थे. लोग अमीर बनने की कोशिशें भी करते थे. तब मेहनत के साथ ही चमत्कारी उपायों का चलन भी सर्वाधिक था. काफी लोग ऐसे उपाय करते थे. रातोंरात बदल जाती थी उनकी किस्मत.

चमत्कारी उपाय अलग-अलग चीजों से किए जाते थे. जैसे गोमती चक्र, कौड़ी, बिल्वपत्र, शहद, हल्दी, काली हल्दी. चावल से भी होते थे चमत्कारी उपाय. आज भी होते हैं. यहां जानिए चावल से मालामाल होने के चमत्कारी उपाय. वैदिक काल यानी प्राचीन काल में करते थे लोग ये उपाय.

चावल को अक्षत भी कहा जाता है और अक्षत का अर्थ है अखंडित. जो टूटा हुआ न हो वही अक्षत यानि चावल माना गया है. शास्त्रों के अनुसार यह पूर्णता का प्रतीक है. इसी वजह से सभी प्रकार के पूजन कर्म में भगवान को चावल अर्पित करना अनिवार्य माना गया है. इसके बिना पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती है.

चावल चढ़ाने से भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्त को देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है. प्रति सोमवार शिवलिंग का विधिवत पूजन करें. पूजन में बैठने से पूर्व अपने पास करीब आधा किलो या एक किलो चावल का ढेर लेकर बैठें. पूजा पूर्ण होने के बाद अक्षत के ढेर से एक मुट्ठी चावल लेकर शिवलिंग पर अर्पित करें.

इसके बाद शेष चावल को मंदिर में दान कर दें या किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दे दें. ऐसा हर सोमवार को करें. इस उपाय को अपनाने से कुछ ही समय में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होने लगेंगे. धन संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए ज्योतिष शास्त्र में कई सटीक उपाय बताए गए हैं. जिन्हें अपनाने से सभी प्रकार के ग्रह दोष दूर होते हैं और आय बढऩे में आ रही समस्त रुकावटें दूर हो जाती हैं.

एक अन्य उपाय के अनुसार किसी भी शुभ मुहूर्त या होली के दिन या किसी भी पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठें. सभी नित्य कर्मों से निवृत्त हो जाएं. इसके बाद लाल रंग का कोई रेशमी कपड़ा लें. अब उस लाल कपड़े में पीले चावल के 21 दानें रखें. ध्यान रहें चावल के सभी 21 दानें पूरी तरह से अखंडित होना चाहिए यानि कोई टूटा हुआ दाना न रखें. उन दानों को कपड़े में बांध लें.

लाल कपड़े में 21 पीले चावल के दाने बांधने के बाद धन की देवी माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजन करें. पूजा में यह लाल कपड़े में बंधे चावल भी रखें. पूजन के बाद यह लाल कपड़े में बंधे चावल अपने पर्स में छिपाकर रख लें. ऐसा करने पर महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और धन संबंधी मामलों में चल रही रुकावटें दूर हो जाती हैं.

ऐसा करने पर धन संबंधी परेशानियां दूर होने लगेंगी. ध्यान रखें कि पर्स में किसी भी प्रकार की अधार्मिक वस्तु कतई न रखें. इसके अलावा पर्स में चाबियां नहीं रखनी चाहिए. सिक्के और नोट अलग-अलग व्यस्थित ढंग से रखे होने चाहिए. नोट के साथ बिल या अन्य पेपर न रखें. किसी भी प्रकार की अनावश्यक वस्तु पर्स में न रखें. चावल को पीला करने के लिए हल्दी का प्रयोग करें. इसके लिए हल्दी में थोड़ा पानी डालें. अब गीली हल्दी में चावल के 21 दानें डालें.

इसके बाद अच्छे से चावल को हल्दी में रंग लें. चावल रंग जाए इसके बाद इन्हें सुखा लें. इस प्रकार तैयार हुए पीले चावल का उपयोग पूजन कार्य में करें. शास्त्रों के अनुसार पीले चावल का उपयोग पूजन कर्म में करने से देवी-देवताओं की कृपा बहुत ही जल्द प्राप्त हो जाती है.

किसी भी देवी-देवता को निमंत्रण देने के लिए चावल को पीला किया जाता है. पीले चावल देकर आमंत्रित किए गए भगवान अवश्य ही भक्त के घर पधारते हैं. यदि पर्स में पीले चावल रखेंगे तो महालक्ष्मी की कृपा भी आप बनी रहेगी.

जब नारद का अभिमान हुआ चूर, एक शिक्षाप्रद कथा !

एक बार नारदजी के मन में यह अभिमान उभर आया कि उनके समान संगीतज्ञ इस संसार में दूसरा कोई नहीं है. एक दिन भ्रमण करते हुए उन्होंने मार्ग में कुछ स्त्री-पुरुषों को देखा जो घायल पड़े हुए थे और उनके विशेष अंग कटे हुए थे.

नारद ने उनसे इस स्थिति का कारण पूछा तो वे बोले- ‘हम सभी राग-रागनियां हैं. पहले हम अंग-प्रत्यंगों से परिपूर्ण थे, परंतु आजकल नारद नामक एक संगीतानभिज्ञ व्यक्ति दिन-रात रागनियों का अलाप करता चलता है, जिससे हम लोगों का अंग-भंग हो गया है.

यदि आप विष्णु लोक जा रहें हैं तो कृपया हमारी दुरवस्था का निवेदन भगवान विष्णु से करें और उनसे प्रार्थना करें कि हम लोगों को इस कष्ट से शीघ्र मुक्ति प्रदान करने की कृपा करें.नारदजी ने जब अपनी संगीतानभिज्ञता की बात सुनी तो वे बड़े दु:खी हुए.

वे भगवद्धाम ही जा रहे थे और जब वे वहां पहुंचे तो प्रभु ने उनका उदास मुख मण्डल देखकर उनकी इस खिन्नता और उदासी का कारण पूछा. नारदजी ने अपनी व्यथा-कथा सुना दी और कहा- ‘अब आप ही निर्णय कीजिए.

भगवान बोले- ‘मैं भी इस कला का मर्मज्ञ कहां हूं. यह तो भगवान शंकर के वश की बात है. अत: राग-रागनियों के कष्ट दूर करने के लिए आपको शंकरजी से प्रार्थना करनी होगी.नारदजी शंकरजी के पास पहुंचे और सारी कथा कह सुनाई.

शंकरजी बोले- ‘मैं यदि ठीक ढंग से राग-रागनियों का अलाप करूं तो नि:संदेह वे सभी अंगों से पूर्ण हो जाएंगे, पर मेरे संगीत का स्रोता कोई उत्तम अधिकारी मिलना चाहिए.’

अब नारदजी को यह जानकर और भी क्लेश हुआ कि मैं संगीत सुनने का अधिकारी भी नहीं हूं.’ जी हां, उन्होंने भगवान शंकर से ही कोई संगीत सुनने के अधिकारी का चयन करने की प्रार्थना की. उन्होंने भगवान नारायण का नाम प्रस्तावित किया. प्रभु से प्रार्थना की गई और वे मान गए.

संगीत समारोह प्रारम्भ हुआ. सभी देव, गन्धर्व तथा राग-रागनियां वहां उपस्थित हुई. महादेवजी के सब संगीतज्ञों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया, किन्तु राग अलापते ही राग-रागनियों के अंग पूरे हो पाए थे.नारदजी का भ्रम भंग हुआ. नारदजी साधु हृदय, परम महात्मा तो थे ही, अहंकार भी दूर हो चुका था. अब राग-रागनियों को पूर्णांग देखकर वे बड़े प्रसन्न हुए.

”इसलिए नहीं लेनी चाहिए किन्नरो की बद्दुआ”, पुराण में छुपा हे यह रहस्य !

हमारे देश और समाज में किन्नरों को मुख्यधारा से जहाँ अलग माना जाता है और देखा जाये तो उन्हें सम्मान भी दिया जाता है. और दूसरी तरफ से देखा जाये तो उन्हें कई प्रकार की सामाजिक कुरीतियों तथा बुराइयों के बंधनों में बांधकर समाज से बिलकुल अलग भी रखा जा रहा है.

हकीकत में हमारा समाज विशेषकर सनातन धर्म हिन्दू धर्म में किन्नरों को बहुत ही अत्यधिक सम्मान दिया जाता है. इतना ही नहीं यह भी कहा जाता है कि किन्नर जिसको भी अपना आशीर्वाद दें, उसका भाग्य एकदम से चमक उठता है और जिसको भी बद्दुआ दे, उसके दुखों का फिर कोई अंत नहीं होता. ऐसे ही हम यहाँ जानेंगे किन्नर समाज से जुड़ी हुयी कुछ ऐसी ही अनोखी परंपराएं…

आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के अनुसार वीर्य की बहुत अधिकता से पुत्र तथा रज की बहुत अधिकता से कन्या का उत्पन्न होना है. यदि होने वाली संतान के समय वीर्य और रज दोनों की समान मात्रा हो तो इन किन्नरों की उत्पत्ति होती है.

पुराने शास्त्र और ग्रंथों में भी किन्नरों का पूर्ण वर्णन किया गया है. रामायण के समकालीन ग्रंथों में इन्हें स्वर्गलोक के अंदर रहने और नृत्य, गायन, संगीत इत्यादि कलाओं में महारथी कहकर प्रशंसा की जाती रही है. महाभारत के अंदर भी अर्जुन के अज्ञातवास के दौरान किन्नर बनने का संदर्भ दिया हुआ है.

हमारे समाज में किन्नरों को मंगलमुखी भी कहा जाता है. इसीलिए घर में केसा भी शुभ अवसर जैसे शादी ब्याव , जन्म या अन्य किसी भी प्रकार के शुभ कामों में किन्नरों को सम्मान स्वरूप आमंत्रित कर इनसे आशीर्वाद लेते है. लेकिन घर में कोई भी मातम या घटना होने पर इन्हें बिलकुल नहीं बुलाया जाता.

सिर्फ 40 दिन लगाए इस मंदिर में हाजरी गारन्टी के साथ पूरी होगी कोई भी मनोकामना !

कोई भी व्यक्ति चाहे वह राजा हो या रंक भगवान के सामने सब एक समान है, हर कोई उनके दरबार में अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए प्राथना करने आता है.

भगवान से अपनी मनोकामना की पूर्ति के लोग भगवान को हर प्रकार से प्रसन्न करने का प्रयास करते है, जिसके लिए वह तरह तरह के धार्मिक अनुष्ठान भी करवाते है, परन्तु उनको फिर भी पता नहीं होता की उनकी मुराद आखिर कब पूरी होगी.

परन्तु शायद आपको यह बात सुन थोड़ा अजीब लगे की माता का एक ऐसा भी मंदिर है जहां लागातार सिर्फ चालीस दिन माता के दर्शन करने से आपकी हर मनोकामना पूरी हो जायेगी, लेकिन ये बिलकुल सच्च बात है.

आपको इस बात पर तब यकीन हो ही जाएगा जब हम ये बताएंगे की हरियाणा के पंचकूला में मनसा देवी मंदिर स्थित है , इस मंदिर में जो भी व्यक्ति 40 दिन तक लागातार हाजिरी लगाता है उसकी मनोकामना गांरटी के साथ पूरी होती है.

मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि जब माता सती अपने पिता राजा दक्ष के घर अश्वमेध यज्ञ में बिना बुलाए पहुंची तो वहां किसी ने उनका सत्कार नहीं किया और माता ने अग्नि कुंड में कूदकर आत्मदाह कर दिया.

सती के आत्मदाह की खबर लगते ही भगवान शिव यज्ञ स्थान पर पहुंचे और सती का शरीर लेकर तांडव नृत्य करते हुए भटकने लगे. भगवान शिव के इस उग्र रूप को देखकर सभी देवता बहुत चिंतित हुए, तब जाकर भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को खंड-खंड कर दिया.

भगवान विष्णु द्वारा सुदर्शन चक्र के प्रहार से कई जगहों पर सती के शरीर के अंग गिरे, जहां-जहां सती के शरीर के अंग गिरे उन सभी स्थानों पर शक्तिपीठों की स्थापना हुई और शिव ने कहा कि इन स्थानों पर भगवती की भक्ति भाव से आराधना करने पर मनोकामना पूरी होगी.

वास्तु विज्ञान के अनुसार साधरण सा नमक कर सकता है आपकी सभी समस्याओ का हल, जाने कैसे ?

वैसे तो नमक किसी के घर में भी बड़ी आसानी से मिल जाता परन्तु क्या आप जानते है की ये साधारण सा नमक बहुत ही चमत्कारी है तथा आपको किसी भी समस्या से निजात दिला सकता है. सुनने में तो ये थोड़ा सा आपको अजीब लग रहा होगा परन्तु ये बिलकुल सच है.

वास्तु विज्ञानं के अनुसार साधारण से नमक की केवल एक चुटकी व्यक्ति के बड़ी सी बड़ी बाधा को हल करने में सक्षम है. बस आपको इसके लिए सिर्फ खाने के अलावा दूसरे कामों में भी नमक का प्रयोग करना होगा. नमक का इस्तेमाल नजर दोष उतारने के लिए भी किया जाता है.

अगर आपको लगता है कि आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को नजर लगी है तो एक चुटकी नमक लेकर तीन बार उसके ऊपर से घुमाकर बाहर फेंक दें. कहते हैं इससे नजर दोष खत्म हो जाता है.

वास्तु विज्ञान के अनुसार शीशे के प्याले में नमक भरकर शौचालय और स्नान घर में रखना चाहिए इससे वास्तुदोष दूर होता है. इसका कारण यह है कि नमक और शीशा दोनों ही राहू की वस्तु हैं और राहु के नकारात्मक प्रभाव को दूर करने का काम करती हैं. राहू नकारात्मक ऊर्जा और कीट-कीटाणुओं का भी कारक माना गया है.

जिनसे घर में सुख समृद्धि और स्वास्थ्य प्रभावित होता है. शीशे के बर्तन में नमक भरकर घर के किसी कोने में रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. राहू, केतु की दशा चल रही हो या जब मन में बुरे-बुरे विचार या डर पैदा हो रहे हों तब यह प्रयोग बहुत लाभ देता है.

डली वाला नमक लाल रंग के कपड़े में बांधकर घर के मुख्य द्वार पर लटकाने से घर में किसी बुरी ताकत का प्रवेश नहीं होता है. कारोबर में उन्नति के लिए अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान के मुख्य द्वार पर और तिजोरी के ऊपर लटकाना लाभप्रद माना गया है.

शीघ्र शादी होने का यह है अचूक उपाय, लग जाएगी रिश्तो की लाइन !

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कोई भी कारण हो लेकिन लड़के या लड़की की शादी में यदि देरी हो रही है, तो यह चिंता की बात है. लेकिन वास्तुशास्त्र में ऐसे कई उपाय बताए गए हैं, शादी में हो रही देरी को दूर किया जा सकता है. इस समस्या से उबरने के लिए आप आसान से वास्तु टिप्स आजमा सकते हैं.

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यदि विवाह प्रस्ताव में परेशानी आ रही हो तो विवाह वार्ता के लिए घर आए अतिथियों को इस प्रकार बैठाएं कि उनका मुख घर में अंदर की ओर हो. उन्हें द्वार दिखाई न दे.

यदि मंगल दोष के कारण विवाह में विलंब हो रहा हो तो उसके कमरे के दरवाजे का रंग लाल अथवा गुलाबी रखना चाहिए.

विवाह योग्य युवक-युवती जिस पलंग पर सोते हैं, उसके नीचे लोहे की वस्तुएं या व्यर्थ का सामान नहीं रखना चाहिए. ऐसा होने से उनके विवाह योग में बाधा उत्पन्न होती हैं.

विवाह योग्य युवक-युवतियों को उत्तर या उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित कमरे में रहना चाहिए. ऐसा करने से इनके लिए विवाह के प्रस्ताव आने लगते हैं.

विवाह योग्य युवक-युवतियों के कमरे एवं दरवाजे का रंग गुलाबी, हल्का पीला या सफेद (चमकीला) हो तो विवाह में आ रही परेशानियां दूर हो जाती हैं.

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यदि कोई विवाह योग्य युवक-युवती विवाह के लिए तैयार न हो, तो उसके कक्ष की उत्तर दिशा की ओर क्रिस्टल बॉल कांच की प्लेट अथवा प्याली में रखनी चाहिए.

जिन व्यक्तियों को शीघ्र विवाह की कामना हों उन्हें गुरुवार को गाय को दो आटे के पेडे पर थोडी हल्दी लगाकर खिलाना चाहिए. तथा इसके साथ ही थोडा सा गुड व चने की पीली दाल का भोग गाय को लगाना शुभ होता है.

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इसके अलावा शीघ्र विवाह के लिये एक प्रयोग भी किया जा सकता है. यह प्रयोग शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार को किया जाता है. इस प्रयोग में गुरुवार की शाम को पांच प्रकार की मिठाई, हरी ईलायची का जोडा तथा शुद्ध घी के दीपक के साथ जल अर्पित करना चाहिये. यह प्रयोग लगातार तीन गुरुवार को करना चाहिए.

गुरुवार को केले के वृ्क्ष के सामने गुरु के 108 नामों का उच्चारण करने के साथ शुद्ध घी का दीपक जलाना चाहिए. अथा जल भी अर्पित करना चाहिए.

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एक अन्य उपाय के रुप में सोमवार की रात्रि के 12 बजे के बाद कुछ भी ग्रहण नहीं किया जाता, इस उपाय के लिये जल भी ग्रहण नहीं किया जाता.

इस उपाय को करने के लिये अगले दिन मंगलवार को प्रात: सूर्योदय काल में एक सूखा नारियल लें, सूखे नारियल में चाकू की सहायता से एक इंच लम्बा छेद किया जाता है. अब इस छेद में 300 ग्राम बूरा (चीनी पाऊडर) तथा 11 रुपये का पंचमेवा मिलाकर नारियल को भर दिया जाता है.
यह कार्य करने के बाद इस नारियल को पीपल के पेड के नीचे गड्डा करके दबा देना. इसके बाद गड्डे को मिट्टी से भर देना है. तथा कोई पत्थर भी उसके ऊपर रख देना चाहिए.

यह क्रिया लगातार 7 मंगलवार करने से व्यक्ति को लाभ प्राप्त होता है. यह ध्यान रखना है कि सोमवार की रात 12 बजे के बाद कुछ भी ग्रहण नहीं करना है.

साधारण से शंख की इस असाधारण विशेषता को सुन आप भी मजबूर हो जाएंगे इसे घर में रखने पर !

जैसा की हम सभी जानते हैं की सनातन धर्म पूर्णतया वैज्ञानिक नियमों पे ही आधारित है,, अथवा ये कह लें की सनातन धर्म से ही विज्ञान की उत्पत्ति हुई है,, तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी . आज इसका एक और उद्दहरण देखते हैं .

पूजा-पाठ में शंख बजाने का चलन युगों-युगों से है . देश के कई भागों में लोग शंख को पूजाघर में रखते हैं और इसे नियमित रूप से बजाते हैं, जो न केवल आध्यात्मिक रूप से, अपितु कई दूसरे तरह से भी लाभकारी हैं.शंख रखने, बजाने व इसके जल का उचित उपयोग करने से कई तरह के लाभ होते हैं. कई लाभ तो सीधे रूप से स्वास्थ्य से जुड़े हैं .

शंख की पूजा इस मंत्र के साथ की जाती है……..

त्वं पुरा सागरोत्पन्न:विष्णुनाविघृत:करे देवैश्चपूजित:
सर्वथैपाञ्चजन्यनमोऽस्तुते।

1. जिस घर में शंख होता है, वहां लक्ष्मी का वास होता है. धार्मिक ग्रंथों में शंख को लक्ष्मी का भाई बताया गया है, क्योंकि लक्ष्मी की तरह शंख भी सागर से ही उत्पन्न हुआ है. शंख की गिनती समुद्र मंथन से निकले चौदह रत्नों में होती है .

2. शंख को इसलिए भी शुभ माना गया है, क्योंकि माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु, दोनों ही अपने हाथों में इसे धारण करते हैं .

shani dev ko khush kaise kare in hindi – शनिदेव को खुश कैसे करे

shani dev ko khush kaise kare in hindi – शनिदेव को खुश कैसे करे

धर्म ग्रंथों के अनुसार शनिदेव को ग्रहों में न्यायाधीश का पद प्राप्त है. मनुष्य के अच्छे-बुरे कर्मों का फल शनिदेव ही उसे देते हैं. जिस व्यक्ति पर shani की टेड़ी नजर पड़ जाए, वह थोड़े ही समय में राजा से रंक बन जाता है और जिस पर शनिदेव प्रसन्न हो जाएं वह मालामाल हो जाता है. जिस किसी पर भी शनिदेव की साढ़ेसाती या ढैय्या रहती है उसे उस समय बहुत ही मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

धर्म ग्रंथों के अनुसार शनिवार के दिन शनि देव को प्रसन्न करने के लिए किए गए विशेष उपायों का फल शीघ्र ही प्राप्त होता है. आज शनिवार को हम आपको बता रहे हैं ऐसे उपाय, जिन्हें करने से शनिदेव आप पर न सिर्फ प्रसन्न होंगे बल्कि आपकी किस्मत भी चमका देंगे. वे उपाय सच्चे मन से करने पर शनिदेव अवश्य प्रसन्न होते हैं.

शनिवार को बजरंगबली का नाम आपको समस्त शनि प्रकोपों से निजात दिला सकता है. महावीर की आराधना से आप खुशियों का वरदान पा सकते हैं. यूं तो मंगलवार को बजरंगबली की पूजा के लिए बेहद उत्तम माना गया है, लेकिन शनिवार को शनिदेव संग हनुमान की पूजा न केवल शनि की साढ़ेसाती, ढैया जैसी महादशाओं से ही छुटकारा दिलाने में मददगार साबित होती है, बल्कि मंगलदोष निवारण के लिए भी शनिवार को बजरंबली की पूजा का खास महत्व माना गया है.

आखिर शनिवार को शनिदेव संग बजरंगबली की भी पूजा का विधान क्यों माना गया है.

इस सवाल का जवाब त्रेतायुग में छिपा हुआ है. कहानी उस समय की है जब माता सीता को ढूढते हुए हनुमान जी लंका पहुंचे, तो उन्होंने वहां शनिदेव को उल्टा लटके हुए देखा. जब हनुमान ने उनसे इसका कारण पूछा तो शनिदेव ने बताया कि रावण ने अपने योग बल से उन्हें लंका में कैद कर रखा है.

यदि यह एक चिन्ह है आपके हाथ में भी तो हर हाल में होंगे आप करोड़पति !

धनवान बनना भला कौन नहीं चाहता लेकिन चाहत उसी की पूरी होती है जो ऊपर से अपने भाग्य में धन लेकर आया हो. अगर आपके भाग्य में धन है तो आप कैसे भी करके अपनी चाहत पूरी कर ही लेते हैं और इसमें आपको कुदरत भी पूरा सहयोग करती है

क्योंकि कुदरत आपको वह सब कुछ देना चाहती है क्योंकि आप अपने पूर्व कार्मों से उस चीज को पाने के हकदार होते हैं.

जन्मपत्री हो या हस्तरेखा सभी कुदरत के उन्हीं फैसलों को बयां करते हैं. इसलिए अगर आपकी हथेली में ऐसे चिन्ह नजर आते हैं तो यकीन मानिए आपको दौलतमंद बनने से कोई रोक नहीं सकता क्योंकि यह कुदरत का फैसला है.

कलश का निशान हथेली में होना धनवृद्धि योग कहलाता है. जिनकी हथेली में यह योग बनता है उनका धन निरंतर बढ़ता रहता है. ऐेसे लोगों के पास अच्छी जमा पूंजी होती है.

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