”इसलिए नहीं लेनी चाहिए किन्नरो की बद्दुआ”, पुराण में छुपा हे यह रहस्य !

हमारे देश और समाज में किन्नरों को मुख्यधारा से जहाँ अलग माना जाता है और देखा जाये तो उन्हें सम्मान भी दिया जाता है. और दूसरी तरफ से देखा जाये तो उन्हें कई प्रकार की सामाजिक कुरीतियों तथा बुराइयों के बंधनों में बांधकर समाज से बिलकुल अलग भी रखा जा रहा है.

हकीकत में हमारा समाज विशेषकर सनातन धर्म हिन्दू धर्म में किन्नरों को बहुत ही अत्यधिक सम्मान दिया जाता है. इतना ही नहीं यह भी कहा जाता है कि किन्नर जिसको भी अपना आशीर्वाद दें, उसका भाग्य एकदम से चमक उठता है और जिसको भी बद्दुआ दे, उसके दुखों का फिर कोई अंत नहीं होता. ऐसे ही हम यहाँ जानेंगे किन्नर समाज से जुड़ी हुयी कुछ ऐसी ही अनोखी परंपराएं…

आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के अनुसार वीर्य की बहुत अधिकता से पुत्र तथा रज की बहुत अधिकता से कन्या का उत्पन्न होना है. यदि होने वाली संतान के समय वीर्य और रज दोनों की समान मात्रा हो तो इन किन्नरों की उत्पत्ति होती है.

पुराने शास्त्र और ग्रंथों में भी किन्नरों का पूर्ण वर्णन किया गया है. रामायण के समकालीन ग्रंथों में इन्हें स्वर्गलोक के अंदर रहने और नृत्य, गायन, संगीत इत्यादि कलाओं में महारथी कहकर प्रशंसा की जाती रही है. महाभारत के अंदर भी अर्जुन के अज्ञातवास के दौरान किन्नर बनने का संदर्भ दिया हुआ है.

हमारे समाज में किन्नरों को मंगलमुखी भी कहा जाता है. इसीलिए घर में केसा भी शुभ अवसर जैसे शादी ब्याव , जन्म या अन्य किसी भी प्रकार के शुभ कामों में किन्नरों को सम्मान स्वरूप आमंत्रित कर इनसे आशीर्वाद लेते है. लेकिन घर में कोई भी मातम या घटना होने पर इन्हें बिलकुल नहीं बुलाया जाता.

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