जैसा की हम सभी जानते हैं की सनातन धर्म पूर्णतया वैज्ञानिक नियमों पे ही आधारित है,, अथवा ये कह लें की सनातन धर्म से ही विज्ञान की उत्पत्ति हुई है,, तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी . आज इसका एक और उद्दहरण देखते हैं .

पूजा-पाठ में शंख बजाने का चलन युगों-युगों से है . देश के कई भागों में लोग शंख को पूजाघर में रखते हैं और इसे नियमित रूप से बजाते हैं, जो न केवल आध्यात्मिक रूप से, अपितु कई दूसरे तरह से भी लाभकारी हैं.शंख रखने, बजाने व इसके जल का उचित उपयोग करने से कई तरह के लाभ होते हैं. कई लाभ तो सीधे रूप से स्वास्थ्य से जुड़े हैं .

शंख की पूजा इस मंत्र के साथ की जाती है……..

त्वं पुरा सागरोत्पन्न:विष्णुनाविघृत:करे देवैश्चपूजित:
सर्वथैपाञ्चजन्यनमोऽस्तुते।

1. जिस घर में शंख होता है, वहां लक्ष्मी का वास होता है. धार्मिक ग्रंथों में शंख को लक्ष्मी का भाई बताया गया है, क्योंकि लक्ष्मी की तरह शंख भी सागर से ही उत्पन्न हुआ है. शंख की गिनती समुद्र मंथन से निकले चौदह रत्नों में होती है .

2. शंख को इसलिए भी शुभ माना गया है, क्योंकि माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु, दोनों ही अपने हाथों में इसे धारण करते हैं .

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