भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को दूर्वा अष्टमी पर्व मनाया जाएगा। इस दिन दूर्वा से शिव परिवार के पूजन का विधान है। भविष्योत्तरपुराण, स्मृतिकौस्तुभ, हेमाद्रि, कृत्यकल्पतरु, पुरुषार्थचिंतामणि जैसे शास्त्रों ने दूर्वा घास का व्याख्यान मिलता है। श्रीगणेश को अति प्रिय दूर्वा को अमृता, शतपर्वा व भार्गवी की उपाधि प्राप्त है।

तंत्र उपासना में 2, 3 या 5 दुर्वा अर्पण की जाती है। यज्ञ कार्य में 3 दूर्वा का प्रयोग आणव, कार्मण व मायिक रूपी अवगुणों को भस्म करने हेतु होता है। इस दिन तिल व गेहूं के आटे से बने पकवान चढ़ाएं जाते हैं। दूर्वा अष्टमी के विशेष व्रत, पूजन व उपायों से सौभाग्य, सुख की प्राप्ति होती है व दुर्गति से मुक्ति मिलती है।

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