1 सिंतबर को आने वाली एकादशी 101 वर्षों बाद विशेष संयोग के साथ आ रही है . हम आपको बता दे कि यमराज यदि मृत्यु के देवता हैं तो शनि कर्म के दंडाधिकारी हैं, गलती जाने में हुई हो या अनजाने में, दण्ड तो भोगना ही पड़ेगा . कहते हैं जिस व्यक्ति पर शनि की ढैया या साढ़ेसाती से ग्रस्त हो या फिर कुंडली में शनि के अशुभ प्रभाव के कारण वो किसी न किसी रोग से पीड़ित रहता हैं.

एकादशी की शाम तुलसी के सामने गाय के घी का दीपक लगाए और ॐ वासुदेवाय नमः मंत्र बोलते हुए तुलसी की 11 परिक्रमा करें। इससे घर में सुख-शांति बानी रहती है और संकट नहीं आता।

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