लेकिन अब चलन इन बोतल बंद पानी का ही है । क्योंकि गंगा के पवित्र जल को लोग भूलते जा रहे हैं। वैसे आप सभी को पता है कि गंगा का जल मात्र जल नहीं है, बल्कि इस जल में समाएं हैं जीवन रक्षक तत्व..जी हां..

बता दें कि हिसार स्थित राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (एनआरसीई) के वैज्ञानिकों की टीम ने पशुओं और इंसानों में निमोनिया, मस्तिष्क ज्वर के अलावा बर्न, घाव,सर्जरी व यूरिनल इन्फेक्शन का कारण बनने वाले क्लबसेला, स्यूडोमोनास, स्टेफाइलोकॉकस आदि बैक्टीरिया के चार बैक्टिरियोफाज (जीवाणुभोजी) को गंगा के जल से खोज निकाला है।

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