भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के उपलक्ष्य में 14 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। भगवान श्री कृष्ण ने अपने अत्याचारी मामा कंस का विनाश करने के लिए धरती पर अवतार लिया था। उन्होंने भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आधी रात में मथुरा में अवतार लिया था।

इस शुभ मौके पर हम आपको एक ऐसी चीज के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनसे भगवान श्री कृष्ण को बेहद प्रेम था और यदि ये चीज अगर आप जन्माष्ठमी पर अपने घर लाते है इससमे भगवन श्रीकृष्ण बेहद खुश होते है. दोस्तों हम बात कर रहे है – कमल से बानी वैजन्ती माला

वैजयंती माला- भगवान श्री कृष्ण अपने गले में वैजयंती माला पहनते थे। यह माला कमल के बीजों से बनी हुई होती है। कमल के बीज ऐसे होते हैं, वे कभी ना सड़ते हैं और ना ही टूटते हैं। उनकी चमक हमेशा बरकरार रहती है। इससे सीधा-सीधा संदेश मिलता है कि आप जिंदगी भर सदाबहार रहें और जिस प्रकार कमल का फूल कीचड़ में खिलता है, लेकिन वह उससे अलग ही रहता है। इस फूल को पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। कमल से हमें पवित्र रहने की सीख मिलती है।

इसके अलावा बांसुरी, माखन-मिश्री, गाय, मोर पंख शामिल हैं। इन सबके पीछे एक संदेश भी छुपा हुआ है।

गाय- भगवान श्रीकृष्ण को गायों से बहुत ज्यादा प्रेम था, वे उन्हें अपने सखे मानते थे। गाय का मूत्र, गोबर, दूध, दही और घी बहुत ही उपयोगी है। इन पाचों को पंचगव्य कहते हैं। इन्हें शुद्ध माना गाय है। गाय को सभी गुणों से संपन्न माना जाता है।

मिश्री- मिश्री भगवान श्रीकृष्ण को बेहद पसंद है। वे बड़े ही चाव से मिश्री का सेवन करते थे। मिश्री को जब माखन में मिलाया जाता है तो यह उसके हर हिस्से में समा जाती है। मिश्री अच्छे से घुल मिल जाने की सीख देती है।

बांसुरी- भगवान श्री कृष्ण को बांसुरी भी बेहद प्यारी थी। बताया जाता है कि बांसुरी में तीन गुण होते हैं, पहला यह कि इसमें कोई गांठ नहीं होती, जो यह संकेत देती है कि अपने मन में किसी तरह का मैल या गांठ ना रखें। दूसरा यह जब बजती है तो मीठी आवाज निकालती है, जो कि हमें बताता है कि कभी भी कड़वा बोल ना बोलें, हमेशा मधुर वाणी ही बोलें। वहीं तीसरा है कि यह बिना बजाए बजती नहीं है। इसका मतलब हुआ कि जब तक कहा ना जाए, तब तक बोले ना।

मोर पंख से प्रेम- भगवान श्री कृष्ण को मोर पंख भी पसंद था। वे प्रेम में ब्रह्राचर्य की भावना को समाहित करने के लिए प्रतीक के रूप में मोर पंख धारण करते थे।

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