इन दिनों इंटरनेट पर एक मैसेज जोरों-शोरों से वायरल हो रहा है। इसमें एक जानकारी लोगों तक पहुंचाई जा रही है कि 12 अगस्त की रात को रात नहीं होगी। आधे से ज़्यादा लोगों को चिंता है की अब रात नहीं होगी तो सोयेंगे कैसे. लेकिन सबसे बड़ी चिंता की बात तो ये है कि क्या ऐसा सचमुच होगा।

क्या प्रकृति का नियम उस एक दिन के लिए बदल जाएगा। क्या उस दिन सूरज ही नहीं डूबेगा। वैसे ऐसा होना तो असंभव है कि सूरज डूबे ही न। सोशल मीडिया पर ये दावा किया गया कि उस रात को दिन की तरह उजाला होगा। पूरा अंतरिक्ष उजाले से भरा रहेगा। यहाँ तक की नासा ने भी इस चमत्कार के इतिहास में पहली बार होने का दावा किया है।

आपको बता दें कि उस रात कोई चमत्कार नहीं होने वाला लेकिन ये जरूर होगा कि आपको आम रात से ज़्यादा रोशनी उस रात को देखने को मिले और ऐसा इसलिए की 12 अगस्त की रात को एक खगोलीय घटना होगी जिसे आम भाषा में तारों का टूटना, उल्कापात कहते हैं। वैसे साल में तीन बार होते हैं और 12 अगस्त उसी का एक हिस्सा है।

नासा की वेबसाइट के अनुसार 12 अगस्त की रात को उल्कापात होगा और इस साल गिरने वाले उल्का पिंड की मात्रा पहले के मुकाबले ज्यादा होगी। नासा के मुताबिक इस साल 11-12 अगस्त की मध्यरात्रि में प्रति घंटे 200 उल्का पिंड गिर सकते हैं। जिसके चलते रात में थोड़ा उजाला तो दिखेगा लेकिन इतना ज़्यादा भी नहीं होगा कि दिन वाली फीलिंग आए और वेबसाइट पर कहीं भी इस बात की कोई पुष्टि नहीं है कि ये इतिहास का सबसे ज़्यादा उजाला देने वाला उल्कापात होगा।

इसके अलावा एक अन्य वेबसाइट ऐस्ट्रोनॉमी फिजिक्स डॉट कॉम के मुताबिक 12 अगस्त की रात को उल्कापिंडों की बारिश होगी। इस वेबसाइट का मानना है कि इससे होने वाली रोशनी से उस रात में सबसे ज़्यादा उजाला होगा और ये अब तक की सबसे चमकीली रात होगी क्योंकि इस रात गिरने वाले उल्का पिंडों की संख्या ज़्यादा होगी।

12 अगस्त को लेकर जो भी तथ्य सामने आए है वो सिर्फ इसी बात को बताते हैं कि उस दिन उल्का पिंडों की बारिश होगी जिसके कारण उजाला होगा। इन्हें हम आम भाषा में तारों का टूटना कहते हैं और ये कुछ ज़्यादा मात्रा में होगी जिसके चलते ज़्यादा रोशनी होगी। हम इसे चमत्कार न मानकर एक खगोलीय घटना मान सकते हैं।

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