नौ ग्रहों में शनि एकमात्र ऐसा ग्रह है, जिसे सबसे क्रूर माना जाता है। शनिदेव की साढ़े साती या शनि की ढैया का नाम सुनकर अच्छे-भले जातकों पर भी प्रतिकूल मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है।

यह सही है कि अगर शनि ग्रह मारकेश या अष्टमेश में हो जाए तो जातक के जीवन में अनिष्ट या अशुभ फल देखने को मिलते हैं। परन्तु शनि के शुभ ग्रह से युत या दृष्ट होने से शनि की साढ़े साती या ढैया जातक पर कम कुप्रभाव डालती है। कई बार जातको को फायदा भी मिलता है।

शनिदेव को ऐसे करें खुश-

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक शनि ग्रह मकर और कुम्भ राशियों का स्वामी है। पुष्य, अनुराधा और उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र शनि के हैं। तुला राशि में 20 अंश पर शनि उच्च का और मेष राशि में 20 अंश पर परम नीच का होता है।

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