आज शनिवार के दिन यानि 19 अगस्त को भाद्रपद शनि प्रदोष पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार हर माह के कृष्ण व शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी अर्थात तेरस तिथि परमेश्वर शिव को समर्पित है। त्रयोदशी को आम भाषा में प्रदोष भी कहते है।

शास्त्रनुसार शनि प्रदोष व्रत व पूजन शनि के अशुभ प्रभाव से बचाव के लिए सर्वोत्तम माना गया है।मान्यता अनुसार प्रदोष का पालन करने से सभी प्रकार के दोषों का नाश होता है।

शनि प्रदोष पर राजा दशरथ द्वारा रचित शनि स्तोत्र का पाठ करने से जीवन की सभी समस्याएं समाप्त होती हैं। शनि प्रदोष पूजन में काले शिवलिंग और शनिदेव के पूजन का बहुत बड़ा महत्व है।

विशेष पूजन: शनिदेव के चित्र का विधिवत पंचोपचार पूजन करें। तेल का दीपक करें, लोहबान धूप करें, सुरमा चढ़ाएं, शमीपत्र चढ़ाएं, रेवड़ी का भोग लगाएं। इस विशिष्ट मंत्र का 108 बार जाप करके नीचे लिखे हुए दशरथ कृत शनि स्तोत्र का 11 बार पाठ करें।

पूजन उपरांत रेवड़ियां गरीबों में बांट दें। प्रत्येक शनिवार को काले तिल, आटा, शक्कर लेकर इन तीनों चीजों को मिला लें। उसके बाद ये मिश्रण चींटियों को खाने के लिए डाल दें।

शनि से संबंधित बाधाअों से मुक्ति पाने के लिए काले घोड़े की नाल या नाव की कील से अंगूठी बनाकर अपनी मध्यमा उंगली में शनिवार के दिन सूर्यास्त के समय धारण करें।

तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें काले तिल डालें। उसके बाद ये जल शिवलिंग पर अर्पित करें। ऐसा करने से व्यक्ति को सभी रोगों से मुक्ति मिलेगी अौर भोलेनाथ की कृपा से आर्थिक तंगी दूर होगी।

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