21 अगस्त सोमवार के दिन भाद्रपद अमावस्या अर्थात सोमवती अमावस्या हे इस दिन सूर्य ग्रहण भी पड़ रहा है। हालांकि सोमवार को पड़ने वाला यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा और इसी लिहाज से इसका सूतक और विर्जनाए भी अवैधानिक होंगी परंतु सोमवती अमावस्या पड़ने से इस सूर्य ग्रहण का धार्मिक, आध्यात्मिक व ज्योतिषीय महत्व बढ़ गया है।

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सोमवार को पड़ने वाला सूर्यग्रहण सूर्य की स्वयंराशि सिंह में केतू के नक्षत्र मघा में पड़ेगा।
प्रातः काल नित्यकर्म से निवृत होकर किसी ऐसे शिवालय में जाएं जहां शिव परिवार संग पीपल का पेड़ लगा हो। सर्वप्रथम गणपती का विधिवत पूजन करने के बाद पीपल के निमित तिल के तेल का दीपक जलाएं,

सुगंधित धूप करें, पीपल पर हल्दी से तिलक करें, सफ़ेद फूल चढ़ाएं, बर्फी का भोग लगाएं। इसके बाद पीपल की जड़ में जल, खंड मिश्रित कच्ची दही की लस्सी और पंचामृत चढ़ाएं।

 

इसके बाद हल्दी से रंगे कच्चे सूत की गांठ पीपल पर लगाकर दूसरे हाथ में धान, धनिया, पान, हल्दी, सिंदूर व साबुत सुपारी लेकर 108 बार सूत लपेटते हुए पीपल की परिक्रमा करें।

परिक्रमा के बाद सारी सामाग्री पीपल पर चढ़ा दें अथवा किसी धोबन को भेंट करें। इसके बाद मंदिर में गौरी-शंकर का पूजन करके अखंड सौभाग्य का वरदान मांगे।

 

अमावस्या के समय जब तक सूर्य चन्द्र एक राषि में रहे, तब तब कोई भी सांसरिक कार्य जैसे-हल चलाना, कसी चलाना, दांती, गंडासी, लुनाई, जोताई, आदि तथा इसी प्रकार से गृह कार्य भी नहीं करने चाहिए।

अमावस्या को केवल श्री हरि विष्णु का भजन र्कीतन ही करना चाहिए। अमावस्या व्रत का फल भी शास्त्रों में बहुत ही ऊंचा बतलाया है।

पीपल के पेड़ को शास्त्रों में अश्वत्थ कहा गया है और इसे श्री हरि विष्णु का स्वरूप माना जाता है। जब पिप्पलाद मुनि ने पीपल के पेड़ के नीचे तपस्या करके शनि देव को प्रसन्न किया तत्पश्चात इस पेड़ का नाम पीपल पड़ा।

शास्त्रों में वर्णित है कि इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने से पति की उम्र लम्बी होती है और उन पर आने वाले कष्ट टलते हैं। कोर्ट कचहरी और मुकदमें में विजय प्राप्त होती है, धन से संबंधित परेशानियों से राहत मिलती है

एवं व्यावसायिक परेशानियों से छुटकारा मिलता है। इसके अतिरिक्त आज आपकी सभी समस्याओं का समाधान करेगा निम्न लिखा एक उपाय आज सोमावती अमावस्या के पवित्र पर्व पर पीपल के पेड़ पर तिल के तेल का दीपक जलाएं और ‘ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का पेड़ के नीचे ही बैठ कर 108 बार जाप करें तो उपरोक्त लिखी सभी समस्याओं का अंत होगा।

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