पवित्रता किसी भी रूप में मौजूद हो वह मन को ऊर्जा व ताजगी देती है। बस, यही ऊर्जा अलग-अलग तरह की गुण व शक्तियों में तब्दील हो सुख-संपन्नता पाने में मदद करती है। इसे हीधार्मिक आस्था से देवी लक्ष्मी की कृपा भी कहा जाता है।
इस तरह जाहिर है कि जहां तन, मन, विचार व वातावरण में पवित्रता हो वहां लक्ष्मी बसती है।

सांसारिक जीवन में ऐसी ही पवित्रता का प्रतीक व लक्ष्मी का साक्षात् स्वरूप माना जाता है-तुलसी का पौधा।
इसलिए शास्त्रों में तुलसी पौधा घर में लगाने का शुभ फल लक्ष्मी की असीम कृपा बताया गया है।पौराणिक मान्यताओं में भी इसे तुलसी व वृंदा के नाम से विष्णु प्रिया या लक्ष्मी का ही रूपबताया गया है। इसीलिए शालिग्राम-तुलसी विवाह की परंपरा व पूजा भी सुख-समृद्ध करने वाली मानी गई है।

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