भारत में सभी प्रकार के मांगलिक कार्य करने से पूर्व भगवान श्री गणेश जी का पूजन कार्य के विध्नों को दूर करने के लिए किया जाता है। हमारे शास्त्र साक्षी हैं कि अमंगल को हरने वाले एवं मंगल करने वाले भगवान श्री गणेश जी के पूजन के बिना कोई कार्य शुरू ही नहीं किया जाता।

श्री गणेश जी को मंगल का प्रतीक माना जाता है, इसी कारण जहां श्रीगणेश विराजमान होते हैं वहां किसी प्रकार की विघ्नबाधाएं, समस्या और दोष नहीं रहते। जिस घर में श्रीगणेश जी की पूजा नियमित रूप से होती है वहां सुख-समृद्धि बरसती है तथा हर क्षेत्र में जहां लाभ पहुंचता है वहीं किसी प्रकार का कोई अभाव नहीं रहता। वास्तुशास्त्र के दोषों का निवारण भी श्रीगणेश जी की प्रतिमा की स्थापना से मिटाया जा सकता है।

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