जोगे और भोगे दो भाई थे। जोगे का धनाढ्य लोगों की श्रेणी में उच्चतम स्थान था और भोगे दो वक्त की रोटी का गुजारा भी बड़ी मुश्किल से करता था। उसका जीवन दरिद्रता भरा था। दोनों के निवास स्थान अलग-अलग थे मगर दोनों भाईयों का आपस में घनिष्ठ प्रेम था। जोगे की पत्नी को अपने पति के पद और दौलत-शौहरत का बहुत अभिमान था। भोगे की पत्नी इससे बिल्कुल विपरित थी। वह धर्म का पालन करने वाली समझदार गृहणी थी।

श्राद्ध के दिन आरंभ हुए तो जोगे की पत्नी ने उससे पितरों का श्राद्ध करने के लिए कहा। इस पर जोगे भड़क पड़ा की उसे कोई श्राद्ध कर्म नहीं करना है। उसकी पत्नी बहुत चतुर थी वह श्राद्ध के बहाने से अपने मायके वालों को बुलाकर उन को अपनी शान और शौकत दिखाना चाहती थी। अपने पति को मनुहार करती हुई बोली, ” अगर हम अपने पितरों का श्राद्ध नहीं करेंगे तो समाज में हमारी जग हंसाई होगी।

Loading...
loading...
Loading...