हिंदू पंचांग के अनुसार माना जाता है कि 22 अक्टूबर को शिरडी के साईं बाबा का निर्वाण दिवस था।

1918 में दशहरा के ही दिन उन्होंने आखिरी सांस ली थी। बाबा ने अपने भक्तों से कहा था कि यह दिन दुनिया से विदा होने के लिए सबसे अच्छा है। इसका संकेत भी उन्होंने कुछ साल पहले ही दे दिया था। बाबा का जन्म कब हुआ किसी को नहीं पता,

इस बारे में बाबा ने भी किसी को कुछ नहीं बताया। लेकिन न जानें शिरडी में ऐसा क्या है कि लोग यहां खिंचे चले आते हैं। यहां आने वालों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। अब बाबा के सबसे प्रिय स्थान शिरडी का स्वरूप बदल गया है।

आज आपसे शिरडी के साईं बाबा की अनदेखी फोटोज साझा कर रहा है।

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