विद्वानों का मानना है की हर व्यक्ति के जीवन में ढाई सुख अत्यधिक महत्व रखते हैं। पहला सुख निरोगी काया, दूसरा गहरी नींद और आधा सुख है धन। इसे त्रासदी ही कहा जाएगा कि व्यक्ति आधे सुख धन की खातिर अपने स्वास्थ्य और नींद को नजरअंदाज कर रहा है।

शास्त्रों के अनुसार रात को सोने से पहले याद रखेंगे ये चीजें तो सुहानी रात के बाद आगाज होगा उज्जवल सवेरे का, सर्वप्रथम मनुष्य को दिन व्यतीत हो जाने के बाद यह चिंतन अवश्य करना चाहिए कि आज का मेरा पूरा दिन पशुवत गुजरा या सत्कर्म करते हुए। बिना समाज सेवा, परोपकार आदि के तो पशु भी अपना गुजारा प्रतिदिन करते हैं जबकि देव दुर्लभ मनुष्य देह का कर्त्तव्य तो अपने जीवन को सार्थक करना है।

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