भारतीय प्राचीन ग्रंथों में ‘वास्तु’ एवं जीव संबंधों के बारे में अनेकानेक तथ्यों से शुभाशुभ की जानकारी किसी भी स्थान पर रहने वालों को प्राप्त होती रहती है। प्रकृति को विभिन्न विकिरणों एवं संदेशों को समझने एवं ग्रहण करने की क्षमता मनुष्य से कई गुना अधिक होती है।

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