चन्द्रमा आया मकर के करीब इन राशि वालो की किस्मत जल्द है खुलने वाली

मेष

ख़ुद को किसी रचनात्मक काम में लगाएँ। मानसिक शांति के लिए आपकी खाली बैठने की आदत ख़तरनाक साबित हो सकती है। आर्थिक तौर पर सुधार तय है। आपके आकर्षण और व्यक्तित्व के ज़रिए आपको कुछ नए दोस्त मिलेंगे। प्यार-मुहब्बत के मामले में अपनी ज़ुबान पर क़ाबू रखें, नहीं तो परेशानी में पड़ सकते हैं। दफ़्तर में आपको कुछ उबाऊ काम करना पड़ सकता है। आज के दिन आपकी योजनाओं में आख़िरी पल में बदलाव हो सकते हैं। अगर आप अपने जीवनसाथी पर क्रोध ज़ाहिर करेंगे, तो आपको तुरन्त प्रतिक्रिया मिल सकती है। इसलिए ख़ुद पर क़ाबू रखेंगे।

वृष

सेहत से जुड़ी समस्याएँ आपके लिए परेशानी का सबक बन सकती हैं। आज के दिन निवेश करने से बचना चाहिए। ऐसा लगता है कि पारिवारिक-मोर्चे पर आप ज़्यादा ख़ुश नहीं हैं और कुछ अड़चनों का सामना कर रहे हैं। रोमांस दरकिनार हो सकता है क्योंकि कुछ छोटे-मोटे मतभेद अचानक उभरेंगे। योग्य कर्मियों को पदोन्नति या आर्थिक मुनाफ़ा हो सकता है। आज ऐसी कई सारी चीज़ें होंगी – जिनकी तरफ़ तुरन्त ग़ौर करने की आवश्यकता है। आपके साथी का असीम प्यार और समर्थन आपके प्यार के बंधन को और मजबूत करेगा।

मिथुन

आज के दिन आप बिना झंझट विश्राम कर सकेंगे। अपनी मांसपेशियों को आराम देने के लिए तेल से मालिश करें। आज आप आसानी से पैसे इकट्ठा कर सकते हैं- लोगों को दिए पुराने कर्ज़ वापिस मिल सकते हैं- या फिर किसी नयी परियोजना पर लगाने के लिए धन अर्जित कर सकते हैं। रिश्तेदारों की वजह से कुछ तनाव पैदा हो सकता है। हालात पर क़ाबू पाने के लिए अपने ऊपर नियंत्रण रखें। जल्दबाज़ी का कोई भी फ़ैसला आपको उनसे दूर कर सकता है, जो आपके दिल के क़रीब हैं। अस्थिर स्वभाव के चलते अपने प्रिय के साथ आपके मतभेद हो सकते हैं। कार्यक्षेत्र में कोई आपसे दुर्व्यवहार कर सकता है. इसलिए तैयार रहें और प्रतिक्रिया न करें। आज कुछ नया और सृजनात्मक करने के लिए अच्छा दिन है। वैवाहिक जीवन के ख़राब क्षणों का चरम आज आपको देखने को मिल सकता है।

कर्क

मानसिक और नैतिक शिक्षा के साथ शारीरिक शिक्षा भी लें, केवल तभी विकास संभव है। याद रखें कि एक स्वस्थ शरीर में ही एक स्वस्थ दिमाग़ निवास करता है। हर निवेश को सावधानीपूर्वक अंजाम दें और ग़ैर-ज़रूरी नुक़सान से बचने के लिए उचित सलाह लेने में न हिचकिचाएँ। घर में उल्लास का माहौल आपके तनावों को कम कर देगा। आप भी इसमें पूरी सहभागिता करें और महज़ मूक दर्शक न बने रहें। आज आप ख़ुद को अपने प्रिय के प्यार से सराबोर महसूस करेंगे। इस लिहाज़ से आज का दिन बहुत ख़ूबसूरत रहेगा। कामकाज में आपको काफ़ी फ़ायदा हो सकता है। अगर आप अपनी चीज़ों का ध्यान नहीं रखेंगे, तो उनके खोने या चोरी होने की संभावना है। मतभेदों की एक लम्बी श्रृंखला के पनपने के कारण आपको सामंजस्य बिठाने कें मुश्किल आएगी।

सिंह

सेहत पर ग़ौर करने की ज़रूरत है। लम्बे समय से अटके मुआवज़े और कर्ज़ आदि आख़िरकार आपको मिल जाएंगे। बच्चों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए थोड़ा समय अलग से निकालें। आप प्रेम की आग में धीरे-धीरे ही सही, लेकिन लगातार जलते रहेंगे। आपके काम की गुणवत्ता देखकर आपके वरिष्ठ आपसे प्रभावित होंगे। अपने काम और शब्दों पर ग़ौर करें क्योंकि आधिकारिक आंकड़े समझने में मुश्किल होंगे, अगर आप कुछ गड़बड़ करते हैं तो। दिन में जीवनसाथी के साथ बहस के बाद एक बेहतरीन शाम गुज़रेगी।

कन्या

किसी दोस्त की ज्योतिषीय सलाह आपकी सेहत के लिए काफ़ी उपयोगी रहेगी। प्राप्त हुआ धन आपकी उम्मीद के मुताबिक़ नहीं होगा। दिन के उत्तरार्ध में अचानक आई कोई अच्छी ख़बर पूरे परिवार को ख़ुशी देगी। आज प्यार की कमी महसूस हो सकती है। कामकाज के मोर्च पर चीज़ें काफ़ी कठिन नज़र आ रही हैं। दुश्मन षड्यंत्र करके आपको हानि पहुँचा सकते हैं। सुनी-सुनाई बातों पर आँखें मूंदकर यक़ीन न करें और उनकी सच्चाई को भली-भांति परख लें। आपके जीवनसाथी की ओर से मिला कोई ख़ास तोहफ़ा आपके खिन्न मन को ख़ुश करने में काफ़ी मददगार साबित होगा।

तुला

परिवार के कुछ सदस्य अपने ईर्ष्यालु स्वभाव से आपके लिए झुंझलाहट की वजह बन सकते हैं। लेकिन अपना आपा खोने की ज़रूरत नहीं है, नहीं तो हालात बेक़ाबू हो सकते हैं। याद रखें, जिसे सुधारा नहीं जा सकता, उसे स्वीकार करने में ही भलाई है। आज निवेश के जो नए अवसर आपकी ओर आएँ, उनपर विचार करें। लेकिन धन तभी लगाएँ जब आप उन योजनाओं का भली-भांति अध्ययन कर लें। अपने परिवार के साथ रुखा व्यवहार न करें। यह पारिवारिक शान्ति को भंग कर सकता है। संभव है आज आप अपने प्रिय को टॉफ़ी और कॉकलेट वग़ैरह दें। जो कला और रंगमंच आदि से जुड़े हैं, उन्हें आज अपना कौशल दिखाने के लिए कई नए मौक़े मिलेंगे। अगर आप किसी विवाद में उलझ जाएँ तो तल्ख़ टिप्पणी करने से बचिए। आज आप एक बार फिर समय में पीछे जाकर शादी के शुरुआती दिनों के प्यार और रुमानियत को महसूस कर सकते हैं।

वृश्चिक

दिन के कामों को सेहत बाधित कर सकती है। आज किया गया निवेश आपकी समृद्धि और आर्थिक सुरक्षा में इज़ाफ़ा करेगा। परिवार के सदस्यों का आपके जीवन में विशेष महत्व होगा। आपको अपने प्रिय के साथ समय बिताने की ज़रूरत है, ताकि आप दोनों एक-दूसरे को अच्छी तरह से जान व समझ सकें। पेशेवर तौर पर अपने अच्छे काम की पहचान आपको मिल सकती है। अगर आप ख़रीदारी पर जाएँ तो ज़रूरत से ज़्यादा जेब ढीली करने से बचें। शादी के ठीक पहले के ख़ूबसूरत दिनों की याद ताज़ा हो सकती है – वही छेड़छाड़, आगे-पीछे घूमना और इज़हार गर्माहट पैदा करेंगे।

धनु

चोट से बचने के लिए सावधानी से बैठें। साथ ही सही तरीक़े से कमर सीधी करके बैठना न केवल व्यक्तित्वमें सुधार लाता है, बल्कि सेहत और आत्म-विश्वास के स्तर को भी ऊपर ले जाता है। दिन चढ़ने पर वित्तीय तौर पर सुधार आएगा। आज आपका ऊर्जा से भरपूर, ज़िंदादिल और गर्मजोशी से भरा व्यवहार आपके आस-पास के लोगों को ख़ुश कर देगा। जो भी बोलें, सोच-समझकर बोलें। क्योंकि कड़वे शब्द शांति को नष्ट करके आपके और आपके प्रिय के बीच दरार पैदा कर सकते हैं। अगर आपको एक दिन की छुट्टी पर जाना है तो चिंता न करें, आपकी ग़ैरहाज़िरी में सभी काम ठीक से चलते रहेंगे। और अगर किसी ख़ास वजह से कोई परेशानी खड़ी भी हो जाए, तो आप लौटने पर उसे आसानी से हल कर लेंगे। तनाव से भरा दिन, जब नज़दीकी लोगों से कई मतभेद उभर सकते हैं। जीवनसाथी द्वारा परिवार और मित्रों के बीच नकारात्मक तरीक़े से आपके वैवाहिक जीवन की निजी बातें उजागर हो सकती हैं।

मकर

किसी भी तरह के द्वन्द्व या विरोध से बचें, क्योंकि आपकी सेहत पर इसका बुरा असर होगा। पुराने निवेशों के चलते आय में बढ़ोत्तरी नज़र आ रही है। अपने जीवनसाथी के मामलों में ज़रूरत से ज़्यादा दखल देना उसकी झुंझलाहट का कारण बन सकता है। ग़ुस्से को फिर से भड़कने से रोकने के लिए उसकी इजाज़त लें, तो आसानी से इस परेशानी को हल किया जा सकता है। आपको अपने प्रिय को ख़ुद के हालात समझाने में दिक़्क़त महसूस होगी। अगर आप दफ़्तर में सोशल मीडिआ का ज़्यादा उपयोग करेंगे, तो आज पकड़े भी जा सकते हैं। सामाजिक और धार्मिक समारोह के लिए बेहतरीन दिन है। रिश्तेदारों के चलते जीवनसाथी से वाद-विवाद हो सकता है, लेकिन आखिर में सब ठीक हो जाएगा।

कुंभ

आज आप ऊर्जा से भरे होंगे- आप जो भी करेंगे उसे आप उससे आधे वक़्त में ही कर देंगे, जितना वक़्त आप अक्सर लेते हैं। आपके मन में जल्दी पैसे कमाने की तीव्र इच्छा पैसा होगी। घरेलू मामलों पर तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है। प्यार का जज़्बा अनुभव के परे है, लेकिन आज आप प्यार की इस मदहोशी की कुछ झलक पा सकेंगे। दफ़्तर में आपको कुछ उबाऊ काम करना पड़ सकता है। कुछ लोगों के लिए आकस्मिक यात्रा दौड़-भाग भरी और तनावपूर्ण रहेगी। आप दुनिया में ख़ुद को सबसे रईस महसूस करेंगे, क्योंकि आपके जीवनसाथी का व्यवहार आपको ऐसा महसूस कराएगा।

मीन

अपने विचार और ऊर्जा को उन कामों में लगाएँ, जिनसे आपके सपने हक़ीक़त का रूप ले सकते हैं। सिर्फ़ ख़याली पुलाव पकाने से कुछ नहीं होता है। अभी तक आपके साथ समस्या यह है कि आप कोशिश करने की बजाय केवल इच्छा करते हैं। अनुमान नुक़सानदेह साबित हो सकता है – इसलिए हर तरह का निवेश करते वक़्त पूरी सावधानी बरतें। पारिवारिक तनावों को गम्भीरता से लें, लेकिन बेकार की चिंता सिर्फ़ मानसिक दबाव में ही इज़ाफ़ा करेगी। मामले को परिवार के दूसरे सदस्यों की मदद जल्द-से-जल्द निपटाने की कोशिश करें और ख़ुद को तनाव का सामना करने के लिए तैयार रखें। आप अपने काम पर ध्यान एकाग्र करें, तो आप अपनी उत्पादकता दोगुनी कर सकते हैं। टैक्स और बीमे से जुड़े विषयों पर ग़ौर करने की ज़रूरत है। यह शादीशुदा ज़िन्दगी के सबसे ख़ास दिनों में से एक है।

सिर्फ 6 दिन 2 इलायची ऐसी खुलेगी किस्मत खुद आप भी होंगे हैरान

नमस्कार दोस्तों, क्या आपने अपनी जिंदगी में कभी सोचा है एक इलायची बहुत कुछ कर सकती है। जी हां दोस्तों सिर्फ 6 दिन सोते वक्त दो इलायची खाने से ऐसा चमत्कार होता है जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। हम आपको इसके प्रति पूरी जानकारी देंगे कृपया इस खबर को पूरा पढ़िए ताकि आपको जानकारी मिल जाए।

इलायची का आयुर्वेद में बेहद महत्वपूर्ण स्थान है। प्राचीन काल से ही इलाइची का इस्तेमाल औषधि के रूप में किया जाता रहा है। इलाइची के इस्तेमाल ना सिर्फ भोजन और व्यंजनों को और स्वादिष्ट बनाया जाता है बल्कि इसके इस्तेमाल से आपको कई स्वस्थ लाभ भी होते हैं।

आज कि पोस्ट में हम आपको इलाइची से होने वाले स्वस्थ लाभ के बारे में बताएंगे कि कैसे रात में सोने से पहले इलाइची खाना आपकी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। मुझे उम्मीद है आप को मेरी बात अच्छी तरह समझ में आ गई होगी।

हाजमे को दुरुस्त रखता है
अक्सर देखा गया है कि लोगो में खान पान को लेकर चाव होने के बावजूद वे खाने से परहेज़ करते हैं। ऐसा करने कि मुख्या वजह है उनका हाजमा दुरुस्त ना होना। ऐसे में अगर व्यक्ति लगातार इलायची का प्रयोग करता है तो उसका हाजमा दुरुस्त हो जायेगा। एक शोध में ऐसा पाया गया है कि इलाइची पाचन तंत्र को सुधरने में बेहद कारगर है।

पेशाब का इंफेक्शन खत्म करता है
अगर आपको पेशाब एक संक्रमण है तो आपको इलायची का इस्तेमाल अवश्य करना चाहिए। इसके निरंतर इस्तेमाल से पेशाब का इन्फेक्शन भी ठीक हो जाता है।

वजन बढ़ाने में मदद करता है
अगर आपका वजन नहीं बढ़ रहा है तो इलायची का प्रयोग आपके लिए नए दरवाज़े खोल सकता है। एक शोध में पाया गया कि इलायची का प्रयोग आपकी भूख को बढ़ाता है। इलाइची खाने से आपकी भूख भी बढ़ेगी और आपका पाचन तंत्र भी दुरुस्त होगा जिससे आप भोजन को बेहतर तरीके से पचा सकेंगे।

जीवन में चाहते हैं ख़ुशी तो घर से कभी ना जाने दें ये 4 खली हाथ

क्या यह देखकर आपको ताज्जुब नहीं होता कि एक तरफ जहाँ लोग इस डर में जी रहे हैं कि वे कभी-भी अपनी नौकरी, घर या पेंशन गवाँ सकते हैं, वहीं ऐसे लोग भी हैं जिन पर हर चीज़ खरीदने का जुनून सवार रहता है। वे पैसे से हर वह चीज़ खरीदना चाहते हैं, जो उन्हें दिखायी देती है।

इस तरह के लोग बड़ी आसानी से विज्ञापनों के शिकार हो जाते हैं। विज्ञापन जगत का मकसद ही लोगों को लुभाना है, वे हमेशा इस फिराक में रहते हैं कि लोगों को कैसे फँसाया जाए। उनका कहना है कि बड़ा घर, बढ़िया गाड़ी और नए-नए ब्रैंड के कपड़े ही आपकी पहचान हैं, ये नहीं तो कुछ नहीं। नकद नहीं? तो कोई बात नहीं, उधार खरीद लो! कई लोगों का लक्ष्य है, दूसरों से हटकर दिखना, फिर चाहे वे कर्ज़ में ही क्यों न डूब जाएँ।

कल सुबह तुलसी को जल देते समय 2 शब्द का मंत्र आँखों के समाने चमत्कार

सभी जानते है कि मंगलवार का दिन हनुमान जी का होता है। मंगलवार को हनुमान जी की पूजा की जाती है। साथ ही मंगलवार, भूमि पुत्र मंगल की आराधना के लिए भी जाना जाता है। कहा जाता है कि श्री हनुमान जी की आराधना से मंगल दोष की पीड़ा दूर होती है।

दूसरी ओर मंगलनाथ भगवान के पूजन से श्रद्धालुओं को मंगल दोष से मुक्ति मिलती है। मंगलवार को उज्जैन स्थित श्री मंगलनाथ मंदिर में पूजन करने और भात पूजन करने से विशेष लाभ मिलता है। मंगल वार के दिन लाल वस्त्र दान करने से उत्तम फल की प्राप्ति होती है।

मंगलवार का व्रत करने और उपासना के बाद लाल रंग की खाद्य सामग्री बनाकर उसका दान करना भी शुभ फलदायी होता है। मंगल एक उग्र ग्रह है। इसका रंग लाल होता है। लाल ग्रह की आराधना और शांति के लिए लाल रंग का विशेष महत्व है।

ऐसे में श्री मंगल यंत्र की विधिवत स्थापना और पूजन करना शुभ फलदायी होता है। मंगलनाथ के दर्शन और साथ ही मंगलयंत्र पर लाल पुष्प अर्पित करना शुभ फलदायी होता है।

मंगल को सेनापति भी कहा जाता है। ऐसे में ये सैन्य बल और पराक्रम प्रदान करते हैं। ऐसे में मंगल की कृपा से जातक सेना, पुलिस में अधिकारी बनता है। अशुभ प्रभाव होने पर जातक बदमाश होता है। परन्तु मंगल देव के पूजन से यह सब शांत किया जा सकता है। मंगल देव को प्रसन्न करने के लिए ऊं भौमाय नमः का मंत्र जाप बहुत ही उत्तम होता है।

घर है तुलसी तो आज रात करे ये काम वरना तुलसी का घर में होना आपको लाएगा संकट


देवउठनी एकादशी पर 20 बातों का रखें ध्यान

देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह और विष्णु पूजन का विशेष महत्व है। आइए जानें कैसे करें तुलसी पूजन, पढ़ें विशेष मंत्र :

1 -तुलसी के पौधे के चारों तरफ स्तंभ बनाएं।

2 -फिर उस पर तोरण सजाएं।

3 -रंगोली से अष्टदल कमल बनाएं।

4 -शंख,चक्र और गाय के पैर बनाएं।

5 -तुलसी के साथ आंवले का गमला लगाएं।

6 -तुलसी का पंचोपचार सर्वांग पूजा करें।

7 -दशाक्षरी मंत्र से तुलसी का आवाहन करें।

8 -तुलसी का दशाक्षरी मंत्र-श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वृन्दावन्यै स्वाहा।

9 -घी का दीप और धूप दिखाएं।

10-सिंदूर,रोली,चंदन और नैवेद्य चढ़ाएं।

11-तुलसी को वस्त्र अंलकार से सुशोभित करें।

12 -फिर लक्ष्मी अष्टोत्र या दामोदर अष्टोत्र पढ़ें।

13 -तुलसी के चारों ओर दीपदान करें।

14-एकादशी के दिन श्रीहरि को तुलसी चढ़ाने का फल दस हज़ार गोदान के बराबर है।

आज है साल की सबसे बड़ी एकादशी धन दौलत सब होगा पास करे इस मंत्र का जप

एकादशी व्रत में भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। एकादशी के दिन एक भूल भी शुभ फल से वंचित कर सकती है। इस दिन कुछ ऐसी चीजें हैं, जिनका सेवन करना नुकसानदेय माना जाता है। एकादशी में भूलकर भी इन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। एकादशी के दिन लहसुन, प्याज का सेवन करना भी वर्जित है। इसे गंध युक्त और मन में काम भाव बढ़ाने की क्षमता के कारण अशुद्ध माना गया है।

इसी प्रकार एकादशी और द्वादशी को बैंगन, सेम, मांस और मदिरा का सेवन खाना अशुभ होता है। अंडा नहीं खाएं और झूठ, ठगी आदि का त्याग कर दें। कहते हैं कि एकादशी के दिन सेम का सेवन करना संतान के लिए हानिकारक हो सकता है। वहीं, मांस-मदिरा का सेवन करने वाले को नर्क की यातनाएं झेलनी पड़ती हैं।

यह है पौराणिक कथा

एक कथा के अनुसार माता के क्रोध से रक्षा के लिए महर्षि मेधा ने देह त्याग दी थी। उनके शरीर का अंश भूमि में समा गया। कालांतर में वही अंश जौ एवं चावल के रूप में भूमि से उत्पन्न हुआ। कहा जाता है कि जब महर्षि की देह भूमि में समाई, उस दिन एकादशी थी। अत: प्राचीन काल से ही यह परंपरा शुरू हो गई कि एकादशी के दिन चावल एवं जौ से बने भोज्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। इसलिए एकादशी के दिन इन पदार्थों का सेवन महर्षि की देह के सेवन के समान माना गया है।

एकादशी के दिन शरीर में जल की मात्र जितनी कम रहेगी, व्रत पूर्ण करने में उतनी ही अधिक सात्विकता रहेगी। आदिकाल में देवर्षि नारद ने एक हजार साल तक एकादशी का निर्जल व्रत करके नारायण भक्ति प्राप्त की थी। वैष्णव के लिए यह सर्वश्रेष्ठ व्रत है। चंद्रमा मन को अधिक चलायमान न कर पाएं, इसीलिए व्रती इस दिन चावल खाने से परहेज करते हैं।

ज्योतिष विज्ञान के अनुसार यह है तर्क

विज्ञान के अनुसार चावल में जल तत्व की मात्रा अधिक होती है। ज्योतिष शास्‍त्र की मानें, तो जल तत्व की अधिकता मन को विचलित कर सकती है, क्योंकि जल और चंद्रमा में परस्पर आकर्षण होता है। चंद्रमा के कारण समुद्र में ज्वार आता है।

इस प्रकार चावल का अधिक सेवन करने पर यदि शरीर में जल तत्व की मात्रा अधिक होगी, तो मन अशांत महसूस करता है। अशांत मन से व्रत का पालन नहीं हो पाएगा। चूंकि एकादशी व्रत, संयम और साधना का दिन है इसलिए मन को विचलित करने वाली चीजों से दूर रहने को कहा जाता है।

मंगलवार की सबसे बड़ी एकादशी आज रात यहां चुपचाप रखे 1 रूपये का सिक्का 30 सेकंड में चमत्कार

आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की ग्यारस को देवशयनी और कार्तिक शुक्ल पक्ष की ग्यारस को देवउठनी एकादशी कहते हैं। देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक यानी चार महीने भगवान विष्णु शयनकाल की अवस्था में होते हैं। इस दौरान कोई शुभ कार्य शादी, गृह प्रवेश या अन्य कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है।

मंगलवार (31 अक्टूबर) को देवउठनी एकादशी है। यहां से शुभ कार्य शुरू हो जाएंगे। यह एकादशी दिवाली के 11 दिन बाद आती है। इस दिन विष्णुजी का विवाह तुलसी के पौधे से होता है। इसे देवोत्थान एकादशी, देवउठनी ग्यारस, प्रबोधिनी एकादशी आदि नामों से भी जाना जाता है।

व्रत करने वाली महिलाएं सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर आंगन में चौक बनाएं। भगवान विष्णु के चरणों को कलात्मक रूप से अंकित करें और इसे तेज धूप में ढंक दें। इसके अलावा रात में सुभाषित स्त्रोत पाठ, भगवत कथा और पुराणादि का श्रवण और भजन आदि का गायन करें। घंटा, शंख, मृदंग, नगाड़े और वीणा बजाएं। पूजन के लिए भगवान के मंदिर या सिंहासन को विभिन्न प्रकार के लता पत्र, फल, पुष्प और वंदनबार आदि से सजाएं।

आंगन में देवोत्थान का चित्र बनाएं, तत्पश्चात फल, पकवान, सिंघाड़े, गन्ने आदि चढ़ाकर डलिया से ढंक दें तथा दीपक जलाएं। श्रद्धापूर्वक पूजन तथा दीपक, कपूर आदि से आरती करें। बाद में एक रथ में भगवान को विराजमान कर उसे खींचें तथा नगर, ग्राम या गलियों में भ्रमण कराएं। अंत में कथा श्रवण कर प्रसाद का वितरण करें।

आज इन राशि वालों की पुरानी समस्याओं का अंत होगा, जानें अपना राशिफल

ग्रहों का प्रभाव हमारे जीवन में हमेशा रहता है। हर दिन बदलते हुए ग्रहों की चाल से कभी दिन अच्छा रहता है तो कभी खराब। जानिए आज का दिन सभी राशियों के लिए क्या लेकर आया है। जानिये कैसा रहेगा आपका दिन

आपके पारिवारिक क्षेत्र में कुछ परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं। आप सोचते हैं कि आपके परिवार वाले आपके साथी के चुनाव से सहमत नहीं है। वे अपनी सोच के अनुसार आपका भला चाहते हैं। शांति से उनकी बात सुनें व अपनी बात समझाने का प्रयास करें।यदि आप पूंजी निवेश के लिए अपने इलाके में अचल सम्पत्ति खरीदना चाहते हैं तो आज ही उसका निर्णय कर लें।

पर्स में रखी ये 2 चीज़ आपको नहीं बनने देती धनवान

एकादशी का पर्व श्रीहरि विष्णु और उनके अवतारों के पूजन का पर्व है. श्रीहरि की उपासना की सबसे अद्भुत एकादशी कार्तिक महीने की एकादशी होती है जब श्रीहरि जागते हैं. इसी दिन वह अपनी प्रिय तुलसी से विवाह करते हैं. आइए जानते हैं उसी दिव्य एकादशी की महिमा.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली के बाद आने वाली एकादशी को पूरे चार महीने बाद भगवान विष्णु जागते हैं इसीलिए इसे देवोत्थान एकादशी कहते हैं.

जिन चार महीनों में श्रीहरि सोते हैं उन महीनों में विवाह और उपनयन जैसे कोई भी मंगल कर्म नहीं किए जाते हैं. देवोत्थान एकादशी को तुलसी विवाह भी होता है और इसी के बाद शुभ कार्यों की शुरूआत हो जाती है.

देवोत्थान एकादशी और इसका महत्व

मान्यता है कि भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल एकादशी को चार माह के लिए सो जाते हैं. फिर श्री हरि विष्णु कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं.

इन चार महीनो में श्री हरि के सोने के कारण कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है. जब भगवान विष्णु जागते हैं तभी मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है. देव जागरण होने के कारण इस दिन को देवोत्थान एकादशी कहते हैं.

देवोत्थान एकादशी के दिन उपवास रखने का विशेष महत्व है. कहते हैं कि इस दिन उपवास रखने से मोक्ष मिलता है.

यदि आपको भी दे कोई गिफ्ट में ये चीज़ भूल से ना ले सारी दरिद्रता होगी आपके घर

कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी कहा जाता है। इसे देवोत्थान एकादशी, देवउठनी ग्यारस, प्रबोधिनी एकादशी आदि नामों से भी जाना जाता है।
देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार महीनें बाद पुनः जागते है। यह एकादशी कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को आती है आज मै आपको बताऊंगी देवउठनी एकादशी व्रत विधि।
हमारे हिन्दू समाज में हर दिन भगवान की पूजा की जाती है। पूजा पाठ हमारे भारत की मूल संस्कृति है। कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी कहा जाता है। इसे देवोत्थान एकादशी, देवउठनी ग्यारस, प्रबोधिनी एकादशी आदि नामों से भी जाना जाता है। आइए जानते है देवउठनी एकादशी की कथा-
एक राजा के राज्य में सभी लोग एकादशी का व्रत रखते थे। प्रजा तथा नौकर-चाकरों से लेकर पशुओं तक को एकादशी के दिन अन्न नहीं दिया जाता था। एक दिन किसी दूसरे राज्य का एक व्यक्ति राजा के पास आकर बोला- महाराज कृपा करके मुझे नौकरी पर रख लें। तब राजा ने उसके सामने एक शर्त रखी कि ठीक है, रख लेते हैं। किन्तु रोज तो तुम्हें खाने को सब कुछ मिलेगा, पर एकादशी को अन्न नहीं मिलेगा।
उस व्यक्ति ने उस समय ‘हाँ’ कर ली, पर एकादशी के दिन जब उसे फलाहार का सामान दिया गया तो वह राजा के सामने जाकर गिड़गिड़ाने लगा- महाराज इससे मेरा पेट नहीं भरेगा। मैं भूखा ही मर जाऊँगा। मुझे अन्न दे दो। राजा ने उसे शर्त की बात याद दिलाई, पर वह अन्न छोड़ने को राजी नहीं हुआ, तब राजा ने उसे आटा-दाल-चावल आदि दिए। वह नित्य की तरह नदी पर पहुँचा और स्नान कर भोजन पकाने लगा। जब भोजन बन गया तो वह भगवान को बुलाने लगा- आओ भगवान भोजन तैयार है।
बुलाने पर पीताम्बर धारण किए भगवान चतुर्भुज रूप में आ पहुँचे तथा प्रेम से उसके साथ भोजन करने लगे। भोजनादि करके भगवान अंतर्धान हो गए तथा वह अपने काम पर चला गया। पंद्रह दिन बाद अगली एकादशी को वह राजा से कहने लगा कि महाराज, मुझे दुगुना सामान दीजिए। उस दिन तो मैं भूखा ही रह गया। राजा ने कारण पूछा तो उसने बताया कि हमारे साथ भगवान भी खाते हैं। इसीलिए हम दोनों के लिए ये सामान पूरा नहीं होता।
यह सुनकर राजा को बड़ा आश्चर्य हुआ। वह बोला- मैं नहीं मान सकता कि भगवान तुम्हारे साथ खाते हैं। मैं तो इतना व्रत रखता हूँ, पूजा करता हूँ, पर भगवान ने मुझे कभी दर्शन नहीं दिए। राजा की बात सुनकर वह बोला- महाराज यदि विश्वास न हो तो साथ चलकर देख लें। राजा एक पेड़ के पीछे छिपकर बैठ गया। उस व्यक्ति ने भोजन बनाया तथा भगवान को शाम तक पुकारता रहा, परंतु भगवान न आए। अंत में उसने कहा- हे भगवान यदि आप नहीं आए तो मैं नदी में कूदकर प्राण त्याग दूँगा।
लेकिन भगवान नहीं आए, तब वह प्राण त्यागने के उद्देश्य से नदी की तरफ बढ़ा। प्राण त्यागने का उसका दृढ़ इरादा जान शीघ्र ही भगवान ने प्रकट होकर उसे रोक लिया और साथ बैठकर भोजन करने लगे। खा-पीकर वे उसे अपने विमान में बिठाकर अपने धाम ले गए। यह देख राजा ने सोचा कि व्रत-उपवास से तब तक कोई फायदा नहीं होता, जब तक मन शुद्ध न हो। इससे राजा को ज्ञान मिला। वह भी मन से व्रत-उपवास करने लगा और अंत में स्वर्ग को प्राप्त हुआ।