सच्चे मन से भगवान को याद करने के लिए किसी भी प्रकार की मुद्रा या वस्त्र धारण करने की आवश्यकता नहीं होती। इसके लिए तो केवल हाथ जोड़कर, श्रद्धा सहित भगवान के सामने प्रार्थना करना ही काफी है। इससे भक्त और भगवान के बीच एक गहरा संबंध स्थापित होता है साथ ही मन तथा मस्तिष्क को अत्यंत शांति भी मिलती है।

लेकिन हिन्दू शास्त्रों के अनुसार आज भी पूर्ण विधि-विधान के साथ पूजा करने को महत्व दिया जाता है। पूजा के लिए सही सामग्री, स्पष्ट रूप से मंत्रों का उच्चारण एवं रीति अनुसार पूजा में सदस्यों का बैठना, हर प्रकार से पूजा को विधिपूर्वक बनाने की कोशिश की जाती है।

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