इस मंदिर का कलश हैं ख़ास ,कांच के दरवाजे से होते हैं शिवलिंग के दर्शन

अध्यात्म की अगर हम बात करे तो स्वयं के चैतन्य को जानना ,उसका चिंतन करना हैं. दूसरे अर्थो में कहे तो अध्यात्म का अर्थ स्वयं का आत्मचिंतन करना ही अध्यात्म हैं. अध्यात्म की दुनिया का विज्ञान से कोई सम्बन्ध नहीं.विज्ञान तथ्यों पर आधारित हैं और अध्यात्म चिंतन करना सिखाता हैं. पर अध्यात्म और विज्ञान के भेद को दूर करता हुआ सूरत के पलसाना के ऐना गांव स्थित ऋणमुक्तेश्वर महादेव का मंदिर अपने विज्ञान और अध्यात्म के लिए प्रसिद्द हैं.

इस मंदिर में 18 फ़ीट शिवलिंग के नीचे एक कलश में 4 करोड़ 55 लाख ,7 टन पारा रखा हुआ हैं. इस कलश से एक पाइपलाइन शिवलिंग के ऊपर तक लायी गयी हैं , जिससे मंदिर में ॐ का उच्चारण करने पर जो प्रतिध्वनि होती हैं उससे पारे में कम्पन पैदा होती हैं ,और भक्तो में ऊर्जा का संचार होता हैं.

 

100 वर्ष पुराने इस शिव मंदिर को एक एनआरआई ने 7 करोड़ की लागत से इसका पुनर्निर्माण कराया.18 फ़ीट उच्चे इस शिवलिंग का वजन 60 टन हैं और इस शिवलिंग पर 1008 छोटे छोटे शिवलिंग बने हुए हैं .एक कांच के दरवाजे से भक्तो को शिवलिंग के दर्शन कराये जाते हैं .कालेग्रेनाइट से इस शिवलिंग का निर्माण किया हुआ हैं .कलश से कॉपर की पाइपलाइन जो शिवलिंग के ऊपर हिस्से तक आती हैं और इसी पाइपलाइन से ॐ का उच्चारण जो पारे तक पहुँचता हैं, और फिर पूरा मंदिर ॐ की ध्वनि से गूंजता हैं.अध्यात्म और विज्ञान का ऐसा भव्य संगम शायद ही कही देखने को मिले.