विनायक चतुर्थी- विनायकी चतुर्थी : बप्पा के पूजन की आसान विधि, शीघ्र होंगे प्रसन्न

हिन्दू पंचांग में हर एक चन्द्र महीने में दो चतुर्थी तिथि होती है। पूर्णिमा के बाद कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है तथा अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष में आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। भारत के उत्तरी एवं दक्षिणी राज्यों में संकष्टी चतुर्थी का त्यौहार मनाया जाता है। संकष्टी शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है जिसका मतलब होता है ‘कठिन समय से मुक्ति पाना’ ।

साल 2018 के लिए विनायक चतुर्थी की सूची
21 जनवरी (रविवार) विनायक चतुर्थी
19 फरवरी (सोमवार) विनायक चतुर्थी
21 मार्च (बुधवार) विनायक चतुर्थी
19 अप्रैल (गुरुवार) विनायक चतुर्थी
18 मई (शुक्रवार) विनायक चतुर्थी
17 जून (रविवार) विनायक चतुर्थी
16 जुलाई (सोमवार) विनायक चतुर्थी
14 अगस्त (मंगलवार) विनायक चतुर्थी
हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश को सभी देवताओं में प्रथम पूजनीय माना जाता है। मान्यता है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले भगवान गणेश का पूजन करने से सभी परेशानियां खत्म हो जाती है, इसी कारण से उन्हें संकटमोचन और विघ्नहर्ता कहा जाता है। मान्यता है कि चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा और व्रत फलदायी होता है। हिंदू पंचाग के अनुसार हर माह में दो बार चतुर्थी का व्रत आता है और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश के पूजन से विशेष लाभ की प्राप्ति होती है।


विनायक चतुर्थी को वरद चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। वरद का अर्थ होता है भगवान से किसी भी इच्छा को पूरा करने के लिए प्रार्थना करना। माना जाता है कि जो इस दिन उपवास का पालन करते हैं उन भक्तों को भगवान गणेश ज्ञान और धैर्य के साथ आशीर्वाद देते हैं। बुद्धि और धैर्य दो ऐसे गुण हैं जिनके महत्व को मानव जाति युगों से पहचान बनाए हुए है। जो इन गुणों को पाने की चाहत रखते हैं वो जीवन में प्रगति करता है। विनायक चतुर्थी का पूजन दिन के मध्य में किया जाता है जिसे हिंदू पंचाग के अनुसार मध्यान्ह कहा जाता है। इस दिन संतान की इच्छा रखने वाली महिलाएं व्रत करती हैं।
13 सितम्बर (गुरुवार) विनायक चतुर्थी
12 अक्तूबर (शुक्रवार) विनायक चतुर्थी
11 नवम्बर (रविवार) विनायक चतुर्थी
11 दिसम्बर (मंगलवार) विनायक चतुर्थी
गणेश पूजा के लिए वैसे तो हर दिन ही उत्तम एवं शुभ माना जाता है, किंतु यदि आप लंबे समय से किसी समस्या से पीड़ित हैं तो विनायकी चतुर्थी का व्रत सबसे उत्तम माना गया है। इसे संकटा एवं विनायकी चतुर्थी भी कृष्ण एवं शुक्ल पक्ष के अनुसार कहा जाता है। इस माह विनायकी चतुर्थी व्रत सोमवार 19 फरवरी 2018 को है।

महाराष्ट्र और तमिल नाडु में व्रत अधिक प्रचलित

पश्चिमी और दक्षिणी भारत में और विशेष रूप से महाराष्ट्र और तमिल नाडु में संकष्टी चतुर्थी का व्रत अधिक प्रचलित है।प्रत्येक चन्द्र मास में दो चतुर्थी होती हैं। पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं और अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी।

बेहद कठोर होता है यह व्रत

विनायकी, संकष्टी चतुर्थी का यह व्रत बेहद कठोर होता है इस व्रत में केवल फलों एवं जड़ों अर्थात जमीन के अन्दर पौधों का भाग सहित वनस्पति और उत्पादों आदि का ही सेवन किया जाता है बप्पा के इस व्रत के दौरान साबूदाना खिचड़ी के अलावा आलू, मूंगफली का मुख्य रूप से सेवन किया जाता है। इस व्रत की खासियत यह है कि श्रद्धालु चन्द्रमा दर्शन करने के उपरांत ही उपवास खोलते हैं।

भक्ताें को सद्मार्ग की आेर ले जाते हैं बप्पा

ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त पूरे विधि-विधान एवं निष्ठा से इस व्रत को धारण करते हैं उसकी मनोकामनाएं अवश्य ही पूर्ण होती हैं। जीवन के अनेक कष्टों से उसे राहत मिलती है साथ ही आने वाले संकट का एहसास भी उसे पूर्व में ही हो जाता है। बप्पा अपने भक्तों पर अवश्य ही कृपा करते हैं और बुद्धिबल में विकास के साथ ही उसे सद्मार्ग की ओर ले जाते हैं। इस व्रत का विधान लगभग पूरे भारत में देखने मिलता है। गणपति को प्रसन्न करने ये बहुत ही उत्तम दिन माना गया है।
विनायक चतुर्थी उपवास

देवी-देवताओं में सर्वप्रथम पूज्‍यनीय भगवान गणेश की पूजा हमेशा ही होती है लेकिन विनायक चतुर्थी का दिन ज्‍यादा शुभ होता है। हिन्दु कैलेण्डर के मुताबिक अमावस्या के बाद की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी और पूर्णिमा के बाद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। विनायक चतुर्थी के दिन उपवास भी रखा जाता है। हालांक‍ि जो लोग पूर दिन व्रत रखने में असमर्थ हैं वह गणेश जी की पूजा के बाद अन्‍न ग्रहण कर सकते हैं।

ऐसे करते हैं गणेश पूजन

विनायक चतुर्थी के दिन दोपहर को मध्याह्न काल में पूजा करना शुभ माना जाता है। इस द‍िन सुबह उठकर स्‍नान आद‍ि करें। इसके बाद गणेश जी के सामने हाथ जोड़कर व‍िनायक चतुर्थी का व्रत करने का संकल्‍प लें। इसके बाद मध्याह्न काल में एक पाटे पर लाल कपड़ा ब‍िछाकर गणेश जी छोटी प्रत‍िमा को स्‍थापित करें। इसके बाद कलश स्‍थाप‍ित कर व‍िध‍िव‍िधान से उनकी पूजा करें व कथा पढ़ें। गणेश जी को मोदक का भोग लगाकर आरती आदि करें।
वरद व‍िनायक चतुर्थी भी कहते:

व‍िध्‍नहरण मंगलकरण यानि‍ क‍ी विघ्नों का नाश करने के लिए लोग गणपति की उपासना करते हैं। वैसे तो गणेश जी की पूजा हर द‍िन और सबसे पहले होती है, लेक‍िन व‍िनायक चतु‍र्थी का द‍िन भक्‍तों के ल‍िए खास होता है। चतुर्थी तिथि भगवान गणेश की तिथि मानी जाती है। हर माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। ऐसे में कल 29 मई सोमवार को व‍िनायक चतुर्थी पर सिद्धि विनायक श्री गणेश जी का व्रत रखा जाएगा। विनायक चतुर्थी को वरद विनायक चतुर्थी भी कहते हैं।

पूजा दोपहर को मध्याह्न काल में:

ह‍िंदू कैलेण्डर के विनायक चतुर्थी के दिन गणेश जी की पूजा दोपहर को मध्याह्न काल में शुभ मानी जाती है। ह‍िंदू शास्‍त्रों के मुताबकि व‍िनायक चतुर्थी का व्रत पूरे द‍िन स्‍वच्‍छ मन से रखना चाह‍िए। हालांक‍ि जो लोग व्रत रखने में असमर्थ हैं वह गणेश जी की पूजा के बाद अन्‍न ग्रहण कर सकते हैं। इस द‍िन सुबह उठकर स्‍नान आद‍ि करें। इसके बाद गण्‍ोश जी के सामने हाथ जोड़कर व‍िनायक चतुर्थी का व्रत करने का संकल्‍प लें। फ‍िर दोपहर को मध्याह्न काल एक पाटे पर लाल कपड़ा ब‍िछाकर उस पर गणेश जी छोटी प्रत‍िमा या फ‍िर कैलेंडर आद‍ि रखें। इसके बाद कलश स्‍थाप‍ित कर व‍िध‍िव‍िधान से उनकी पूजा करें व कथा पढ़ें। आरती कर पूजा समाप्‍त करें।
प्रसाद में मोदक भोग जरूर लगाएं:

गणेश जी के सामने प्रसाद में मोदक का भोग जरूर लगाएं। मान्‍यता है क‍ि अगर गणपति पूजा में मोदक का भोग नहीं लगाया तो वह व्रत व पूजा अधूरे माने जाते हैं। गणेश जी को मोदक बहुत पसंद हैं। व‍िनायक चतुर्थी का व्रत रखने वाले को इस खास द‍िन पर गणेश जी के इन 10 नामों को पढ़ते हुए 21 दुर्वा उन पर चढ़ानी चाहि‍ए। ॐ गणाधिपाय नम, ॐ उमापुत्राय नम, ॐ विघ्ननाशनाय नम, ॐ विनायकाय नम, ॐ ईशपुत्राय नम, ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नम, ॐ एकदंताय नम, ॐ इभवक्ताय नम, ॐ मूषकवाहनाय नम,ॐ कुमारगुरवे नम। इससे गणेश जी अपने भक्‍तों पर प्रसन्‍न उनकी हर बाधा को दूर करते हैं। उनकी हर मनोकामना पूर्ण करते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *