14 जून मिथुना संक्रांति 2 शब्द का मंत्र बोलदे सोने से पहले मांगने से पहले सब कुछ मिल जाएगा

साल में 12 संक्रांति होती है, जिसमें सूर्य अलग-अलग राशि, नक्षत्र पर विराज होता है. इन सभी संक्रांति में दान-दक्षिणा, स्नान, पुन्य का बहुत महत्व रहता है. मिथुना संक्रांति उनमें से ही एक है. मिथुना संक्रांति से सौर मंडल में बहुत बड़ा बदलाव आता है, मतलब इसके बाद से वर्षा ऋतु शुरू हो जाती है. इस दिन सूर्य वृषभ राशी से निकलकर मिथुन राशी में प्रवेश करता है. जिससे सभी राशियों में नक्षत्र की दिशा बदल जाती है. ज्योतिषों के अनुसार सूर्य में आये इस बदलाव को बहुत बड़ा माना जाता है, इसलिए इस दिन उपाय एवं पूजा अर्चना का विशेष महत्व है.

इस दिन किया हर उपाय आपको 1000 गुना फाल दिलाता है. दोस्तों यदि आपको लगता है की आप परेशानियों से घिर चुके है, कोई न कोई परेशानी आपको आ ही जाती है तो आज की रात बस ये एक उपाय कर लीजिये. आपकी हर परेशानी को यह उपाय हमेसा हमेसा के लिए खत्म कर देगा.

दोस्तों आज की संक्रांति की शाम आप अपने घर के मंदिर में सर्वप्रथम भगवान गणेश का ध्यान करे और पूजा आरती कर ले. इसके बाद आप एक कटोरी ले और उसमे 2 लॉन्ग और 2 कपूर साथ जला दे और इस मंत्र को 21 बार बोल दे. दोस्तों मन्त्र है ॐ अविघ्नाय नमः . तथा इस कोटरी को अपने घर के ठीक बिच वाली जगह पर रख दे. और इसका धुँआ घर में फैलने दे. करींब पांच मिनट इसे रहने दे और पांच मिनट होने के बाद इसे हटा ले. दोस्तों आपके घर के अंदर आपके ऊपर, आपके परिवार के ऊपर जितनी भी परेशानिया, नकरात्मक ऊर्जा थी वह सभी हमेसा हमेसा के लिए नष्ट हो जाएँगी.
तथा आपके सभी कार्य बनने लगेंगे और घर में सुख समृद्धि आएगी.

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