11 अगस्त शनिश्चरी अमावस्या चुपचाप पीपल के निचे गाड़ दे इसे बन जाओगे रातो रात करोड़पति

दोस्तों श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरियाली अमावस के नाम से भी जानी जाती है। इस बार हरियाली अमावस्या शनिवार के दिन आ रही है, इस वजह से शनिश्चरी कहलाएगी। आमतौर पर अमावस्या का दिन विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि श्रावण मास के अधिपति भगवान शिव हैं और अमावस्या तिथि के अधिपति पितृ देव। शनिवार के स्वामी शनिदेव है, तो क्रमानुसार भगवान शिव, शनि और पितृदेव को प्रसन्न करने का यह दिन है।

शनिश्चरी पर बन रहा विशेष योग

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शनिश्चरी अमावस्या पर विशेष योग बन रहे हैं। शनिवार का दिन, अश्लेषा नक्षत्र, व्यतिपात योग, नागकरण एवं कर्क राशि का चंद्रमा और अमावस्या तिथि का संयोग वर्ष में कम ही बनता है। एक स्थिति यह भी है, कि इसी दिन प्रात:काल 6.35 बजे शुक्र ग्रह का हस्त नक्षत्र में प्रवेश होगा। यह स्थिति अमावस्या के दोष को मुक्त करती है

महिलाएं यह करें

शास्त्रीय मान्यता से देखें तो हरियाली अमावस्या पर पीपल की पूजा का विशेष विधान है, चूंकि पीपल पर सात दिन में अलग-अलग देवताओं का वास माना गया है। साथ ही तिथि, कालखंड में अलग-अलग देवताओं का अलग-अलग वास होता है। चूंकि शनिवार का दिन है, अमावस्या तिथि है, इस दृष्टि से पीपल की पूजन में शनि तथा पितरों का प्रभाव रहेगा। अर्थात इस दिन पीपल का पूजन करने से शनि व पितरों की कृपा होगी। पीपल पर जल, कच्चा दूध चढ़ाएं, सरसों के तेल का दीपक लगाएं, चींटी को नगरा करें।

नारियल के गोले में सेके हुए आटे का खांड भरके पीपल के वृक्ष के आसपास की जमीन में गाड़ दें। यह करने से महिलाओं को परिवार में सुख-शांति के साथ समृद्धि प्राप्ति होगी। साथ ही पारिवारिक क्लेश खत्म होगा।

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