क्यों बना सकुनी कुरुवंस के विनाश का कारण

कहानी सकुनी की  : – 

महाभारत युद्ध का सबसे प्रमुख कारण होने के बावजूद शकुनि के पात्र को काम आंका जाता है. इस बात से कोई भी इंकार नहीं कर सकता की यदि महाभारत के पात्र में शकुनि नहीं होता तो शायद महाभारत की सम्पूर्ण कथा ही कुछ और होती.

शकुनि तथा इसके पासो ने कुरु वंशजों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर दिया. वह शकुनि ही था जिसने कौरवों और पांडवों को इस कदर दुश्मन बना दिया कि दोनों ही एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए.

शकुनि को महाभारत का सबसे रहस्यमय पात्र कहा जाना गलत नहीं है. गांधारी के परिवार को समाप्त कर देने वाला शकुनि अपनी इकलौती बहन से बहुत प्रेम करता था लेकिन इसके बावजूद उसने ऐसे कृत्य किए, जिससे कुरुवंश को आघात पहुंचा.

क्या आप जानना नहीं चाहते कि आखिर शकुनि यह सब करने के लिए क्यों बाध्य हुआ? ऐसा क्या राज था शकुनि का जिसके चलते उसने अपनी बहन के पति को ही अपना सबसे बड़ा दुश्मन समझ लिया था?

चौसर, शकुनि का प्रिय खेल था. वह पासे को जो अंक लाने के लिए कहता हैरानी की बात है वही अंक पासे पर दिखाई देता. इस चौसर के खेल से शकुनि ने द्रौपदी का चीरहरण करवाया, पांडवों से उनका राजपाठ छीनकर वनवास के लिए भेज दिया, भरी सभा में उनका असम्मान करवाया.

आखिर क्यों करा रावण ने श्री राम जी की माता कौशल्या का अपहरण

आखिर क्या है यह कहानी चलिए जानते है : –

भगवान श्री राम की माता कौशल्या के सम्बन्ध में आनंद रामायण में एक अनोखी कथा मिलती है. रामायण की कथा में आप रावण द्वारा सीता के हरण की कथा से तो भली भाँति परिचित होंगे की आखिर कैसे अपनी बहन सूपर्णखा की प्रतिशोध का बदला लेने के लिए रावण ने देवी सीता का छल से हरण किया.

लेकिन शायद आप इस कथा से परिचित नहीं होंगे की रावण द्वारा एक बार प्रभु श्री राम की माता कौशल्या का भी हरण किया था. वाल्मीकि रामायण के अनुसार कौशल्या के पात्र का चित्रण एक ऐसी स्त्री के रूप में किया गया है जिसे पुत्र प्राप्ति की इच्छा थी, तथा इस इच्छा की पुत्री के लिए राजा दशरथ ने एक विशाल यज्ञ करवाया था.

कौशल्या कौशल प्रदेश ( छत्तीसगढ़ ) की राजकुमारी थी तथा उनके पिता महाराजा सकोशल व माता रानी अमृतप्रभा थी. कौशल्या के स्वयम्बर के लिए अनेक देश प्रदेश के राजकुमारों को निमंत्रित किया गया था परन्तु इसी बीच एक और अन्य घटना घटित हुई.

वास्तविकता में कौशल प्रदेश के राजा सकोशल की राजा दशरथ से शत्रुता थी, तथा वे उनसे युद्ध चाहते थे परतु उधर दशरथ कौशल राज्य से शांति वार्ता करना चाहते थे.

11 ऐसे स्थान है जहां आपको मिलेंगे 11 वरदान – शिर्डी साईं बाबा !

shirdi sai baba blessings :

शिरडी के साई (shirdi sai baba)मंदिर में देश भर के भक्तों की बड़ी आस्था है। शिरडी में साई बाबा के 11 ऐसे स्थान हैं जहां से भक्तों की मनोकामना पूरी होने का गहरा संबंध है। अगर आप भी शिरडी जाकर साई बाबा से 11 वरदान (shirdi sai baba blessings)पाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको उन 11 स्थानों के बारे में बता रहे हैं जहां आप साई बाबा से वरदान मांग सकते हैं। वहां किये जाने वाले उपाय से नौकरी,धन-संपत्ति,शादी विवाह जैसी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। जानिये कि शिरडी जाकर आपको 11 उपाय कैसे और किस स्थान पर करने हैं। वैसे अगर आप शिरडी न जा पायें तो साई बाबा के किसी मंदिर में भी आप ये उपाय आज़मा सकते हैं।

-शिरडी में सुखी जीवन का वरदान
शिरडी साई मंदिर में गुरुवार और शुक्रवार की शाम को धूप,लोबान,अगरबत्ती जलायें।

शिरडी में मिलेगी धन-संपत्ति
नंदादीप के पास लेंडीबाग में तेल या घी का दीप जलाने से घर में धन-संपत्ति आती है।

शिरडी में मिलेगा प्रमोशन
समाधि दर्शन के बाद ग़रीबों को खाना खिलाने या खाने की चीज़ें बांटने से कार्यक्षेत्र में तरक्की या प्रमोशन मिलेगा।

शिरडी में होगी बीमारी दूर
साई के प्रसादालय में साई से सेहतमंद होने की प्रार्थना कर भोजन करने से सेहत में सुधार होगा।