गलती से भी रात को ना करे ये 3 काम वरना जो होगा सपने में भी नहीं सोचा होगा

बिस्तर पर बैठकर खाना क्यों नहीं खाना चाहिए?

आजकल तेजी से बढ़ती महानगरीय संस्कृति के कारण हमारी रोजमर्रा के जिंदगी में बहुत तेजी से कई परिवर्तन हुए हैं। कुछ आदते ऐसी है जो अब हमारी लाइफ का एक हिस्सा बनती जा रही हैं जैसे सुबह देर से उठना रात को देर से सोना, बेड पर चाय और खाना लेना आदि। ये आदते ऐसी हैं जो हमारे शरीर को प्रभावित करती हैं। आपने अक्सर बड़े-बुजूर्गों को कहते हुए सुना होगा कि बिस्तर पर खाना नहीं खाना चाहिए।

आजकल अधिकतर लोग ऐसी बातों को अंधविश्वास मानकर उन पर भरोसा नहीं करते हैं लेकिन यह कोई अंधविश्वास नहीं है बल्कि इसके पीछे स्वास्थ्य से जुड़ा कारण भी है। हमारी भारतीय संस्कृति में बिस्तर पर खाना-पीना निषेध है क्योंकि शास्त्रों के अनुसार ऐसी मान्यता है कि बिस्तर पर बैठकर खाने -पीने से घर में अलक्ष्मी का निवास होता है यानी घर में दरिद्रता आती है।

साथ ही बिस्तर पर खाने -पीने से स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है क्योंकि जब हमें कोई बीमारी होती है या हम अस्वस्थ्य होते है तब भी उसी बिस्तर पर आराम करते हैं साथ ही धुल व अन्य कई तरह की गंदगी रहती है। जिसके कारण बिस्तर में कई तरह के छोटे छोटे सुक्ष्मजीव रहते हैं। और जब हम बिस्तर पर बैठकर भोजन करते हैं तो ये सुक्ष्मजीव हमारे शरीर में भोजन के माध्यम से प्रवेश कर जाते हैं।जिसके कारण बिस्तर पर खाना खाने पर हमे एसिडिटी और पेट की कई बीमारियां पैदा होती हैं।

बिस्तर पर बैठकर खाना क्यों नहीं खाना चाहिए?

आजकल तेजी से बढ़ती महानगरीय संस्कृति के कारण हमारी रोजमर्रा के जिंदगी में बहुत तेजी से कई परिवर्तन हुए हैं। कुछ आदते ऐसी है जो अब हमारी लाइफ का एक हिस्सा बनती जा रही हैं जैसे सुबह देर से उठना रात को देर से सोना, बेड पर चाय और खाना लेना आदि। ये आदते ऐसी हैं जो हमारे शरीर को प्रभावित करती हैं। आपने अक्सर बड़े-बुजूर्गों को कहते हुए सुना होगा कि बिस्तर पर खाना नहीं खाना चाहिए।

आजकल अधिकतर लोग ऐसी बातों को अंधविश्वास मानकर उन पर भरोसा नहीं करते हैं लेकिन यह कोई अंधविश्वास नहीं है बल्कि इसके पीछे स्वास्थ्य से जुड़ा कारण भी है। हमारी भारतीय संस्कृति में बिस्तर पर खाना-पीना निषेध है क्योंकि शास्त्रों के अनुसार ऐसी मान्यता है कि बिस्तर पर बैठकर खाने -पीने से घर में अलक्ष्मी का निवास होता है यानी घर में दरिद्रता आती है।

साथ ही बिस्तर पर खाने -पीने से स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है क्योंकि जब हमें कोई बीमारी होती है या हम अस्वस्थ्य होते है तब भी उसी बिस्तर पर आराम करते हैं साथ ही धुल व अन्य कई तरह की गंदगी रहती है। जिसके कारण बिस्तर में कई तरह के छोटे छोटे सुक्ष्मजीव रहते हैं। और जब हम बिस्तर पर बैठकर भोजन करते हैं तो ये सुक्ष्मजीव हमारे शरीर में भोजन के माध्यम से प्रवेश कर जाते हैं।जिसके कारण बिस्तर पर खाना खाने पर हमे एसिडिटी और पेट की कई बीमारियां पैदा होती हैं।

टूटी -फूटी क्रॉकरी घर में नहीं रखना चाहिए क्योंकि…

आपके घर में क्रॉकरी बता देती है कि आप किस स्तर का जीवन व्यापन कर रहे हैं। इसी वजह से आजकल डिजाइनर क्राकरी का क्रेज बढ़ रहा है। इसी क्रेज के चलते कई घरों में पुराने या टूटी -फूटी क्रॉकरी में संभालकर अलग रख दी जाती हैं, जो कि अशुभ माना जाता है। इससे घर में दरिद्रता बढ़ती है और कई तरह की हानि उठाना पड़ती है।

हमेशा से ही इस बात पर जोर दिया जाता है कि घरों में टूटी -फूटी क्रॉकरी नहीं रखनी चाहिए, ना ही कभी ऐसी क्राकरी में चाय नहीं पीनी चाहिए या खाना नहीं खाना चाहिए। इस संबंध में धार्मिक तथ्य यह है कि ऐसा करने से ईश्वर की कृपा प्राप्त नहीं होती। जो व्यक्ति टूटी -फूटी क्रॉकरीज में चाय या कॉफी पीने से या भोजन करने से उससे लक्ष्मी रूठ जाती है और उसके घर में दरिद्रता पैर पसार लेती है। ऐसा होने पर कई प्रकार के आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ता है।

ऐसी क्रॉकरी को वास्तुशास्त्र में भी अशुभ माना गया है। जिस घर में ऐसी क्राकरी रखी जाती है वहां वास्तुदोष रहता है। ऐसे में वास्तुदोष दूर करने के लिए बहुत से अन्य उपाय करने के बाद भी यह दोष दूर नहीं होता है। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा सक्रीय हो जाती है। घर से सभी टूटी -फूटी, बेकार क्रॉकरी को दूर कर देना चाहिए। इससे वास्तु दोष समाप्त होता है और घर में सब अच्छा होने लगता है।

बेकार क्रॉकरी में चाय या कॉफी लेने से या नाश्ता करने से हमारे विचार नकारात्मक बनते हैं। जैसे क्रॉकरी में हम चाय या कॉफी हैं हमारा स्वभाव भी वैसा ही बन जाता है। इसी वजह से अच्छे और साफ क्रॉकरी में चाय या कॉफी पीए या खाना खाएं। इससे आपके विचार भी शुद्ध होंगे और सकारात्मक ऊर्जा का शुभ प्रभाव आप पर पड़ेगा।

टूटी -फूटी क्रॉकरी घर में नहीं रखना चाहिए क्योंकि…

आपके घर में क्रॉकरी बता देती है कि आप किस स्तर का जीवन व्यापन कर रहे हैं। इसी वजह से आजकल डिजाइनर क्राकरी का क्रेज बढ़ रहा है। इसी क्रेज के चलते कई घरों में पुराने या टूटी -फूटी क्रॉकरी में संभालकर अलग रख दी जाती हैं, जो कि अशुभ माना जाता है। इससे घर में दरिद्रता बढ़ती है और कई तरह की हानि उठाना पड़ती है।

हमेशा से ही इस बात पर जोर दिया जाता है कि घरों में टूटी -फूटी क्रॉकरी नहीं रखनी चाहिए, ना ही कभी ऐसी क्राकरी में चाय नहीं पीनी चाहिए या खाना नहीं खाना चाहिए। इस संबंध में धार्मिक तथ्य यह है कि ऐसा करने से ईश्वर की कृपा प्राप्त नहीं होती। जो व्यक्ति टूटी -फूटी क्रॉकरीज में चाय या कॉफी पीने से या भोजन करने से उससे लक्ष्मी रूठ जाती है और उसके घर में दरिद्रता पैर पसार लेती है। ऐसा होने पर कई प्रकार के आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ता है।

ऐसी क्रॉकरी को वास्तुशास्त्र में भी अशुभ माना गया है। जिस घर में ऐसी क्राकरी रखी जाती है वहां वास्तुदोष रहता है। ऐसे में वास्तुदोष दूर करने के लिए बहुत से अन्य उपाय करने के बाद भी यह दोष दूर नहीं होता है। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा सक्रीय हो जाती है। घर से सभी टूटी -फूटी, बेकार क्रॉकरी को दूर कर देना चाहिए। इससे वास्तु दोष समाप्त होता है और घर में सब अच्छा होने लगता है।

बेकार क्रॉकरी में चाय या कॉफी लेने से या नाश्ता करने से हमारे विचार नकारात्मक बनते हैं। जैसे क्रॉकरी में हम चाय या कॉफी हैं हमारा स्वभाव भी वैसा ही बन जाता है। इसी वजह से अच्छे और साफ क्रॉकरी में चाय या कॉफी पीए या खाना खाएं। इससे आपके विचार भी शुद्ध होंगे और सकारात्मक ऊर्जा का शुभ प्रभाव आप पर पड़ेगा।

इस दिशा में लगाए वाटर फॉल घर में आएगी तरक्की

फेंगशुई से हम सभी परिचित ही हैं फेंगसुई चीन का वास्तुशास्त्र हैं, पर भारत में भी अब यह लोकप्रिय होता जा रहा हैं .जिसका प्रमुख कारण हैं इसके आसान से उपाय , ये उपाय इतने सरल हैं की कोई भी आसानी से इसे अपने घर में घर में कर सकता हैं.

 

कई बार आर्थिक स्थिति ख़राब हो जाती हैं ,हमें पैसो की तंगी का सामना करना पड़ता हैं ,आज हम आपको बताएँगे की फेंगसुई के अनुसार पानी का सही स्थान क्या हैं, जिससे घर के लोगो की तरक्की हो और पैसे की कमी न हो और बरकत बनी रहे.

पानी से जुड़े शो पीस या पानी से सम्बंधित तस्वीरें को घर में ड्राइंग रूम में न लगाए इसे घर की बालकनी में लगाए जिससे घर में सुख समृद्धि बनी रहे और नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश न कर सके.


पानी से भरे बर्तन को घर के उत्तर और पूर्व में रखना चाहिए ,इससे घर के लोगो को हर कार्य में सफलता मिलती हैं.
पानी से सम्बंधित चीजे किचेन में रखने से घर के लोगो की आय प्रभावित होती हैं.घर में नकारात्मक शक्तिया प्रवेश कर जाती हैं.


अगर आपके घर में गार्डन हैं और आप वाटर फॉल लगाना चाह रहे हैं या वाटर फॉल लगा हुआ हैं तो वॉटरफॉल घर की दिशा में होना चाहिए.इससे घर में सुख समृद्धि बनी रहेगी ,ध्यान रहे वाटर फॉल की दिशा घर के बाहर की तरफ नहीं होना चाहिए.

रविवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे जलाये एक दीपक सुख समृद्धि आएगी आपके घर

 

 

रविवार का दिन सूर्य देवता का प्रतीक हैं. सूर्य देव ऊर्जा का स्रोत हैं.सूर्य देव इस समस्त चराचर जगत की आत्मा हैं.सूर्य देव से ही इस जगत में जीवन और प्रकाश हैं. सूर्य इस जगत के साकार ईश्वर हैं. वेदो में सूर्य को भगवन का तीसरा नेत्र माना हैं.

 

रविवार का व्रत करने वालो को नौकरी में उच्च पद और प्रतिष्ठा प्राप्त होती हैं.रविवार को व्रत करने से त्वचा और नेत्र सम्बंधित रोगो से मुक्ति मिलती हैं.

रविवार को धन प्राप्ति का दिन भी माना गया हैं ,इस दिन सोने से पूर्व अपने सिरहाने पर दूध का गिलास रखें. और अगले दिन स्नान आदि करने के बाद किसी बबूल के पेड़ में उस दूध को चढ़ा दे ऐसा लगातार ११ रविवार तक करें . इससे घर में सुख समृद्धि बनी रहती हैं.

रविवार के दिन तेल से बने बने किसी खाद्य पदार्थ को किसी गरीब व्यक्ति को खिलाने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं.इसके अलावा काली गाय और काले कुत्ते को रोटी खिलाना भी शुभ माना गया हैं.

किसी भी चीज के बुरे फल को दूर करने के लिए ,आप रविवार को आप काले चने की दाल, काले तिल ,काले उड़द की दाल का दान कर सकते हैं,ऐसा करके आपके ऊपर शनिदेव की कृपा बनी रहेगीं .

 

रविवार के दिन सायंकाल में पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने से सुख समृद्धि और ऎश्वर्य में वृद्धि होती हैं.और आपके कार्यक्षेत्र में भी आपकी स्थिति मजबूत होती है.

यदि विवाह में हो रही हैं देरी तो कुंडली से जाने ऐसा क्यों

भारतीय संस्कृति में विवाह  एक बहुत बड़ा संस्कार है.अपनी यह कोई साधारण सम्बन्ध नही है,एक उत्तरदायित्व, सहयोग ,प्रेम एवं आपसी सामंजस्य का गठबंधन है.हमारी संस्कृति में विवाह का उद्देश्य वंश वृद्धि भी है.आजकल वर्तमान समय में  व्यक्ति की विवशता अपने कार्य की वजह से इतनी बढ़ गई है,कि विवाह के लिये  सोच पाना मुश्किल हो जाता है , तो विवाह में देरी देरी हो जाती है,पर इसके अलावा भी कुंडली में कुछ ऐसे कारक है जिनके  वजह से विवाह में देरी हो जाती है,आइये जानते है उन कारणों के बारे में जिनकी वजह से विवाह में देरी हो जाती है
सभी तरह से सुयोग्य होने पर कई बार विवाह देरी से होता हैं कई लोग ऐसी स्थिति में भाग्य को दोष देने लगते हैं, पर वास्तव में ऐसी स्थिति में कौन से कारक उत्तरदायी हैं जिसकी वजह से विवाह में देरी होती हैं ,इसके लिए  कुंडली में ग्रहो की स्थिति  का सही घर में बैठा होना भी अनिवार्य हैं.
1- बुद्ध और शुक्र :यदि सातवे घर में बुद्ध और शुक्र एक साथ विराजमान हो तो भी विवाह में देरी हो जाती हैं .
2-विवाह में अरुचि: जिन लोगो की कुंडली के चौथे भाव में या लग्न में मंगल हो और सातवे भाव में शनि हो तो  ऐसे लोगो की विवाह में अरुचि होती हैं.
3– जिन महिलाओ की कुंडली में में सातवे भाव का स्वामी शनि हो ऐसी लड़कियों का विवाह देरी से होता हैं.
4-जिन जातको के लग्न और बारहवे भाग में गुरु विराजमान हो और साथ में कोई शुभ गृह का योग भी नहीं बन रहा हो,ऐसे जातको के  विवाह में  भी देरी होती हैं.
5-जिन लोगो की कुंडली के लग्न में बुध ,मंगल ,सूर्य विराजमान हो, और बारहवे में गुरु हो ऐसे व्यक्ति बहुत आध्यात्मिक होते हैं,जिस वजह से उनका विवाह देरी से होता हैं .

लक्ष्मी के आने का राज छुपा हैं गृहस्वामी के मूलांक में

ज्योतिष शास्त्र में चाहे हस्त रेखा ज्ञान हो या अंको का गणित दोनों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हैं. कई लोग अंको को इतनी महत्ता देते हैं कि अपना हर कार्य अपने पसंदीदा अंक या भाग्यशाली अंक वाली तारीख से शुरू करते हैं.कई लोग अपनी कार का नेम प्लेट नंबर भी अपनी पसंद के हिसाब से लेते हैं.आजकल बैंक में अकाउंट नंबर भी अपनी पसंद से रखने का रिवाज चल पड़ा हैं. तो आप समझ ही गए होंगे कि अंको कि भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो गयी हैं .

 

आज यहाँ हम बताएँगे कि घर के मालिक यानि गृहस्वामी के मूलांक के आधार पर घर में किस दिशा से धनागमन होगा.सबसे पहले यह जानना जरुरी हैं कि मूलांक क्या होता हैं, मूलांक अर्थात आपके जन्म तारीख का जोड़ मूलांक जैसे आपकी जन्म तारीख 25 हैं तो आपके मूलांक 7 हुआ.

 

घर के मालिक का मूलांक 1 हैं तो उनके धनागमन कि दिशा होगी उत्तर पूर्व ,ऐसे लोगो को घर कि दक्षिण पूर्व दिशा पर सफ़ेद कपड़े पर 1 अंक लिखकर टांगना चाहिए.

यदि गृहस्वामी का मूलांक 2 हैं,उन लोगो के भाग्य कि दिशा उत्तर पूर्व हैं, आपको किसी रेशमी वस्त्र पर सितारे लगाकर अपने पास रखना चाहिए.

 

जिन लोगो का मूलांक 3 हैं उनके गृहस्वामियों के भाग्य कि दिशा दक्षिण पश्चिम हैं ,पीले रंग के वस्त्र में चाँदी के चौकोर टुकड़े को बाँध कर अपने पास रखें.

 

4 मूलांक वाले गृहस्वामियों के लिए भूरे रंग के रेशमी वस्त्र में 7 काली मिर्च के दाने रखकर अपने पर्स में रखने चाहिए. ऐसे व्यक्तियों के लिए दक्षिण दिशा शुभ होती हैं.

 

जिन ग्रह स्वामियों का मूलांक 5 हैं,उनके लिए उत्तर पूर्व दिशा भाग्यवर्धक होती हैं ऐसे लोगो को हरे रंग के कपड़े में ताँबे का चमकदार सिक्का बांधकर अपने पास रखना चाहिए.

 

जिन लोगो के गृहस्वामी का मूलांक 6 होता हैं उन्हें पश्चिम दिशा उत्तर पश्चिम दिशा शुभ होती हैं. 6 मूलांक वालो को गुलाबी रंग के कपड़े में 6 का अंक लिखकर अपने पास रख देना चाहिए.

 

7 मूलांक वाले गृहस्वामियों के लिए पश्चिम दिशा शुभ फल दायक होती हैं. ऐसे लोगो को सुनहरे पीले रंग के कपड़े में सरसो बांधकर अपने पास रखनी चाहिए.

 

जिन ग्रह स्वामियों का मूलांक 8 होता हैं,उनके लिए दक्षिण पश्चिम दिशा शुभ कारक होती हैं ,आप लोगो को पीले रंग के वस्त्र में चावल के 21 दाने बांधकर रखने चाहिए.

पूर्वी दिशा 9 मूलांक वाले गृहस्वामी के लिए सर्वोत्तम होती हैं ,आपको मंगलवार के दिन लाल रुमाल को अपने पर्स में रखना चाहिए.

हथेली पर हैं ये निशान तो आप हैं भाग्यशाली

मनुष्य  अपने कर्म और अपने प्रयासों से ही जीवन में आगे बढ़ता हैं,पर यदि कर्म के साथ भाग्य का भी साथ हो तो,कोई भी बाधा आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती. आज हम बात कर रहे हैं मनुष्य के हाथो के लकीरो की,मनुष्य के हाथो की लकीरे कुछ सीधी होती हैं ,कुछ तिरछी ,कुछ टेढ़ी. पर इन लकीरो से मिलकर कुछ निशान भी बनते हैं.ये निशान शुभ भी होते हैं अशुभ भी.
आज हम बताएँगे त्रिकोण निशान के बारे में , त्रिकोण निशान अगर आपकी हथेली में हैं तो यह शुभ होने का संकेत हैं. त्रिकोण निशान बताता हैं की आपके  जीवन में कोई तनाव नहीं हैं, सब कुछ आनंदमय हैं.
त्रिकोण निशान हथेली  में किस स्थान पर हैं, यह बात भी बहुत महत्वपूर्ण हैं क्युकि हथेली में जिस पर्वत में यह निशान होगा उस पर्वत से जुड़े ग्रह की अनुकूलता भी इसे मिलेगी और उस ग्रह से सम्बंधित गुण भी व्यक्ति के अंदर आएंगे.
अगर  व्यक्ति के गुरु पर्वत पर त्रिकोण का निशान हैं तो यह व्यक्ति को प्रबंध में कुशल बनाता हैं, ऐसा व्यक्ति किसी भी संस्था को चलाने में सफल होता हैं.
बुद्ध पर्वत पर त्रिकोण का निशान होना व्यक्ति के आर्थिक रूप से मजबूत होने की ओर संकेत करता हैं,ऐसे व्यक्ति की आर्थिक स्थिति अच्छी और मजबूत होती हैं ,ये लोग अपनी कार्य कुशलता से पैसा कमाने में सफल होते हैं.
मंगल पर्वत पर त्रिकोण का निशान  संकेत देता हैं की ऐसी व्यक्ति संघर्षो से दूर रहेंगे ,और यदि कभी ऐसी स्थिति आ गयी तो अपनी चतुराई से स्थितियों को अपनी ओर कर लेंगे, ये लोग कठिन से कठिन परिस्थितियों में घबराते नहीं हैं.
शनि पर्वत पर त्रिकोण का निशान व्यक्ति के गुप्त विद्याओ में रूचि का संकेत देता हैं.ये लोग तंत्र मंत्र ,आदि में रूचि रखते हैं.ओर लोगो को चकित करने की चाहत रखना चाहते है.

पीला रंग पसंद करते हैं तो कुछ ख़ास हैं आपकी बात

 

 

 

प्रकृति में हर तरह के रंग हैं, कुछ रंग चमकीले कुछ रंग सादे ,वैसे तो हर रंग खूबसूरत हैं, पर कुछ रंग हमारे पसंदीदा बन जाते हैं. हर रंग अपने में कोई न कोई विशेषता लिए हुए होता हैं. आज हम जानेंगे उन लोगो के व्यक्तित्व के बारे में जिन्हे पीला रंग पसंद हैं.

 

 

पीला रंग सूर्य का प्रतीक हैं सूर्य अर्थात ऊर्जा एवं शक्ति का स्रोत.पीला रंग अपने में ऊर्जा लिए हुए हैं ,पर एक बात ध्यान देने योग्य हैं कि हल्का पीला रंग व्यक्ति को औसत बुद्धि का बनाता हैं.और चमकीला पीला रंग इन्हे ऊर्जावान बनाता हैं, जिससे इनका मनोबल मजबूत होता हैं.

 

 

पीला रंग का सम्बन्ध भगवन विष्णु और देवताओ के गुरु बृहस्पति से भी हैं .इसलिए यह विद्द्या का भी प्रतीक हैं.ऐसे लोग स्वस्थ विचारधारा के होते हैं .जो लोग अन्य रंगों के मुकाबले पीला रंग अधिक पसंद करते हैं,या अधिक प्रयोग करते हैं,ऐसे लोगो के बारे में यह कहा जा सकता हैं कि जोखिम के समय घबरा जाते हैं.

 

ये लोग कितने ऊर्जावान हो पर विपरीत परिस्थितियों के सामने अपना रास्ता बदल देते हैं.एक बात और हैं कि ये लोगो कि विचारधारा थोड़ा अलग होती हैं.इनके आस पास के लोग इनके बारे में क्या सोच रखते हैं ,इस बात से इनके व्यक्तित्व में कोई प्रभाव नहीं पड़ता हैं.

 

पीला रंग पसंद करने वाले व्यक्तियों की एक ख़ास विशेषता ये भी हैं कि ये लोग कलात्मक प्रवृति के होते हैं,ये रचनातमक सोच वाले होते हैं.पीला रंग पांच तत्वों में धरा को दर्शाता हैं,इसलिए यह रंग स्थायित्व का भी प्रतीक हैं.ऐसे लोगो के व्यक्तित्व में ठहराव होता हैं.

सूर्य ग्रहण: 5 राशियों को आर्थिक लाभ के साथ विदेश यात्रा का योग

 

 

15 और 16 फरवरी को होने वाला सूर्य ग्रहण साल का दूसरा ग्रहण हैं. 31 जनवरी 2018 को चंद्र ग्रहण के पश्च्यात 15 दिनों के अंतराल में होने वाला ये साल का दूसरा ग्रहण हैं. वैसे तो यह ग्रहण आंशिक है, और भारत में यह देखा भी नहीं जा सकेगा.इसके बाद अगला सूर्य ग्रहण भी इसी साल 11 अगस्त को पड़ेगा , वो सूर्य ग्रहण भी भारत में नहीं देखा जा सकेगा. फिर भी कुछ राशियों पर इसका प्रभाव देखने को मिलेगा.आइये जानते हैं की कौन सी राशि पर सूर्य ग्रहण का क्या प्रभाव पड़ेगा.

मेष राषि : मेष राशि के लिए सूर्य ग्रहण अच्छा रहेगा ,धन लाभ के मौके आएंगे और परिवार में सुख समृद्धि बनी रहेगी.


वृष राशि :आर्थिक लाभ मिलेगा.नौकरी में आयी परेशानी दूर होंगी.


मिथुन राशि:सूर्य के प्रभाव से विदेश यात्रा का योग , धार्मिक कार्यो में रूचि बढ़ेगी.


कर्क राशि:आर्थिक परेशानी का सामना , खर्चो पर नियंत्रण रखे.


सिंह राशि:कार्यक्षेत्र में किसी विवाद में फसने की सम्भावना हैं, सावधानी बरते.


कन्या राशि:कठिन श्रम के बाद ही फल मिलेगा ,रुका हुआ कार्य पूर्ण होगा ,स्वास्थ्य में ध्यान दे.


तुला राशि:आर्थिक लाभ मिलने की सम्भावना है.नौकरी में तरक्की होगी.


वृश्चिक राशि:सामाजिक कार्यो में रूचि रहेगी,समाज में नयी पहचान होगी.


धनु राशि :सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी,रुका हुआ पैसा मिलेगा.


मकर राशि:आर्थिक रूप से स्थिति मजबूत होगी, किसी सौदे में लाभ मिलने की सम्भावना हैं


कुम्भ राशि:शुभ फल की प्राप्ति होगी,नौकरी में आयी परेशानी दूर होंगी.


मीन राशि:नौकरी में तरक्की होने की प्रबल सम्भावना हैं,संतान से प्रेम और सम्म्मान मिलेगा.

16 फरवरी साल का पहला सूर्य ग्रहण 7 राशियों के लिए खुशखबरी जल्द आने वाला है पास जमकर पैसा

३१ जनवरी को हुए चंद्र ग्रहण के लगभग १५ दिनों के बाद साल का दूसरा ग्रहण सूर्य ग्रहण देखने को मिलेगा,वैसे इस वर्ष तीन बार सूर्य ग्रहण होंगें, पहला सूर्य ग्रहण 16 फरवरी को होगा. हालांकि भारत में ये ग्रहण नहीं दिखाई देगा ,भारतीय समयानुसार यह दिन के १२ बजकर २५ मिनट से शुरू होगा .ग्रहण जहाँ वातावरण में उथल पुथल पैदा करते हैं, वही ये राशियों पर नकारात्मक और सकारात्मक प्रभाव भी डालते हैं.आइये जानते हैं किन राशियों की सूर्य ग्रहण से चमकेगी किस्मत और किन राशियों को होगा नुक्सान .
मेष :कार्य क्षेत्र में सम्मान और आर्थिक लाभ होने की सम्भावना हैं.
वृष:धन लाभ होने की सम्भावना .धन कमाने के कई अवसर मिलेंगे और व्यसाय में वृद्धि.
मिथुन:स्वास्थ्य का ध्यान रखें,परिवार के लोगो से विवाद होने की सम्भावना,परेशानी बढ़ सकती हैं.
कर्क:शुभ समाचार मिलेगा ,धन लाभ के अवसर मिलेंगे
सिंह:स्वास्थ्य का ध्यान रखें ,व्यवसाय में लाभ होने की संभावना कम हैं.
कन्या: कन्या राशि के लिए समय अनुकूल हैं, आपका फंसा हुआ धन आपको प्राप्त होगा,विदेश यात्रा होने की सम्भावना हैं.
तुला :मन तनावग्रस्त रहेगा ,परेशानी बढ़ सकती हैं.सावधानी बनाये रखें,धन सम्बन्धी परेशानी रहेगी
वृश्चिक: धर्म अध्यात्म में रूचि बढ़ेगी ,व्यवसाय में लाभ मिलेगा
धनु: समय अनुकूल हैं,घर में शांति रहेगी,निर्णय सोचकर ले.
मकर:कार्य क्षेत्र में नया पदलाभ मिलेगा,स्थिति और मजबूत होगी.धैर्य बनाये रखें.
कुम्भ:धैर्य बनाये रखें,व्यवसाय में धन लाभ होगा
मीन:नौकरी में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे, धन लाभ होने की सम्भावना हैं.

आज कार्तिक पूर्णिमा की शाम इस पेड की पूजा से सभी सुख आएंगे झोली में

शनिवार को कार्तिक महीने की पूर्णिमा है. कार्तिक का महीना बहुत ही पवित्र माना जाता है. विशेषकर कार्तिक पूर्णिमा का दिन बेहद शुभ माना जाता है. इ्स दिन स्नान और दान का बड़ा महत्व है. इस दिन गंगा में स्नान करने से सभी जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है.

इस विशेष दिवस पर विधि-विधान से पूजा अर्चना करना ना केवल पवित्र माना जाता है बल्कि इससे समृद्धि भी आती है और इससे सभी कष्ट दूर हो सकते हैं. इस दिन पूजा करने से कुंडली, धन और शनि दोनों के ही दोष दूर हो जाते हैं.
तीर्थस्थलों पर तो यह बेहद धूम-धाम से मनाया जाता है.

इस दिन श्रद्धालु गंगा स्नान कर दीप दान करते हैं. इलाहाबाद, वाराणसी, अयोध्या जैसे शहरों में यह बेहद जोर-शोर से मनाया जाता है. इस दिन उपवास करने से हजार अश्वमेध और सौ राजसूय यज्ञ के बराबर फल प्राप्त होता है.