इस एक शिवलिंग में समाहित हैं करोड़ो शिवलिंग

देवादिदेव महादेव के शिवरात्रि के पावन अवसर पर जगह जगह शिव महिमा का गुणगान सभी शिवभक्त अपने अपने तरीके से कर रहे हैं. भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए सभी शिवभक्त पूजन सामग्री भांग ,धतूरा,बेलपत्र,आदि शिव को अर्पित कर रहे हैं.और भोले की कृपा पाने के लिए मंत्रोचार से शिव का अभिषेक कर रहे हैं.

दक्षिण भारत में विशाखापट्टम में भोले बाबा को प्रसन्न करने के लिए वहाँ  एक 1 करोड़ 8 शिवलिंगो से भोले का भव्य शिवलिंग बनाया हैं. यह शिव लिंग अपने आप में एक अनूठा शिवलिंग हैं.इसे देखने के लिए जगह जगह से लोग आ रहे हैं और इस शिवलिंग के साथ सेल्फी ले रहे हैं.

अपने आप यह शिवलिंग विहंगम और मनोरम हैं.जिसे देखकर भक्त लोग आनंदित हैं.भारत में 1 करोड़ 8 शिवलिंग से बना यह शिवलिंग भव्य और अनुपम हैं .

कुल्लू में स्थित हैं अमरनाथ से ऊंचा शिवलिंग

 

देवादिदेव महादेव के मंदिरो का स्वरूप मनोरम हैं , 12 ज्योतिर्लिंग में ज्योतिर्लिंगों की महिमा न्यारी हैं, हर ज्योतिर्लिंग का अपना एक इतिहास एवं विशेषता हैं . इसी क्रम में भोले बाबा का एक मंदिर जो हिमाचल प्रदेश में कुल्लू घाटी में स्थित हैं वहाँ के अंजनी महादेव मंदिर की विशेषता ही कुछ और हैं, इस स्थान विशेष के बारे में कहा जाता हैं की यहाँ माता अंजनी ने पुत्र प्राप्ति के लिए भगवन शिव की आराधना की थी. और महादेव ने प्रसन्न होकर माता अंजनी को दर्शन दिए.

अंजनी महादेव के मंदिर को कुल्लू का छोटा अमरनाथ कहा जाता हैं. इस मंदिर की ख़ास विशेषता यहाँ का हिमशिवलिंग हैं,बर्फ़बारी के समय यह लिंगम 20 से 30 फ़ीट का हो जाता हैं ,अभी इसका आकर 40 फ़ीट का हो गया हैं,जो अमरनाथ से भी ऊंचा हैं.


यहाँ दिसम्बर से लेकर अप्रैल तक पर्यटकों की भीड़ होती हैं. हर साल दिसम्बर से शिवलिंग आकार लेना शुरू करता हैं ,और बर्फ़बारी के साथ इसका आकार बढ़ता जाता हैं.

घर के मंदिर में कभी भी न रखें इन चीजों को, आती है दरिद्रता

घर में बना हुआ मंदिर उस घर में रहने वाले सदस्यों के सकारात्मक ऊर्जा का प्रमुख केन्द्र बिन्दु होता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार पूजा का घर हमेशा ईशान कोण में होना चाहिए। इसके अलावा घर के मंदिर में कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए।

घर के मंदिर में एक ही भगवान की दो तस्वीरें या मूर्तियां नहीं होनी चाहिए। शास्त्रों मे ऐसा होने से शुभ कार्य को करने में परेशानियां आती है,इसलिए जहां तक संभव हो एक भगवान की एक ही तस्वीर लगाएं।घर का पश्चिम और दक्षिण कोना वास्तुशास्त्र के नियम से अशुभ फल का कारण माना जाता है इसलिए पूजा घर पूर्व या उत्तर दिशा में ही होना चाहिए।

मंदिर में विराजित काली माँ को लगती है गर्मी … मनुष्यो की तरह आता है पसीना !

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गर्मी और पसीने से बचने के लिए लोग अपने घरों और दफ्तरों में AC लगाते है ताकि उन्हें इससे राहत मिल सके.

क्या आप एक ऐसे मंदिर के बारे में जानते हैं जहां विराजमान माता की मूर्ति को इंसानों की तरह गर्मी लगती है और पसीना भी आता है!

इतना ही नहीं माता की मूर्ति को गर्मी का अहसास न हो इसके लिए पूरे मंदिर में AC भी लगाया गया है
काली माई का मंदिर

जबलपुर के सदर इलाके में स्थित काली माई का मंदिर जहाँ मां काली की करीब 550 साल पुरानी प्रतिमा विराजमान है. मान्यता है कि स्वयंसिद्ध माता काली की भव्य प्रतिमा गोंडवाना साम्राज्य के दौरान स्थापित की गई थी.

बताया जाता है कि माता काली की इस प्रतिमा से गर्मी बर्दाश्त नहीं होती है और उन्हें पसीना आने लगता है. माता को पसीना न आए इसके लिए भक्तों ने इस मंदिर में बकायदा एसी भी लगवाया है.
काली माई का मंदिर – विज्ञान ने भी इसे माना चमत्कार